50190 टैलेंटेड बेटियों को बिहार सरकार दे रही है 10-10 हजार रुपये

लाइव सिटीज डेस्क : मेधावी छात्राएं बीच में ही पढ़ाई ने छोड़ दें. इसलिए सरकार ने उन्हें समय रहते प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है. मैट्रिक परीक्षा में प्रथम श्रेणी से पास करने वाली सामान्य श्रेणी अति पिछड़ा वर्ग (बीसी टू) की छात्राओं को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. यह राशि छात्राओं को तभी मिलेगी, जब वे प्रमाणित करेंगी कि उन्होंने इंटरमीडिएट कक्षा में दाखिला ले लिया है.
इसी आधार पर प्रत्येक छात्रा को मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना के तहत 10 हजार रुपए की राशि दी जाएगी. राज्य सरकार ने इस मद में 50.51 करोड़ राशि जारी कर दी है. यह राशि 19,431 सामान्य और 30,759 बीसी-टू श्रेणी की छात्राओं को दी जाएगी. इन परीक्षार्थियों ने वर्ष 2017 की बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से आयोजित मैट्रिक परीक्षा में 60 फीसदी या उससे अधिक अंक हासिल किया है.
इन 50,190 छात्राओं के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से राशि भेजी जाएगी. इसके अलावा पिछले वर्षों की उन 325 छात्राओं को भी इस वर्ष योजना का लाभ दिया जाएगा जिन्हें पैसा नहीं मिल पाया था. राशि के वितरण में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई तो संबंधित प्रधानाध्यापक जिम्मेदार माने जाएंगे. पहली कार्रवाई उनके खिलाफ ही होगी.
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़े वर्ग की छात्राओं के लिए विभिन्न स्तर पर प्रोत्साहन राशि वितरण की योजना है, जिसे संबंधित एससी-एसटी कल्याण पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ओर से संचालित किया जा रहा है.
एक स्कूल के प्राचार्य ने कहा कि मेधावी छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर देती है. प्रथम श्रेणी से पास करने वाली छात्राएं कोटा या अन्य स्थानों पर जाकर में जाकर मेडिकल-इंजीनियरिंग की तैयारी में जुट जाती हैं. वे इंटर परीक्षा में प्राइवेट छात्रा के रूप में शामिल हो जाती हैं.
ऐसी छात्राएं इंटर में किसी किसी रूप में पढ़ाई कर रही होती हैं, तो क्या उन्हें मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना का लाभ नहीं मिलेगा? अगर मिलेगा तो स्थानीय स्तर पर यह सवाल नहीं उठेगा कि उसे किस प्रकार योजना का लाभ मिल रहा है. राजधानी के एक हाईस्कूल के प्रधानाचार्य ने कहा कि हम इस मामले में जिला स्तर पर पदाधिकारी से पूरी स्थिति स्पष्ट करेंगे, फिर प्रोत्साहन राशि का वितरण किया जाएगा.

सरकार ने सभी हाईस्कूलों को निर्देश दिया है कि छात्राओं के इंटर में एडमिशन मामले की जांच करें और उसके बाद राशि जारी करें. इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक का कहना है कि योजना का मुख्य उद्देश्य मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा की दहलीज तक पहुंचाना है.इसलिए सरकार के स्तर पर यह योजना बनी है. लेकिन, हाईस्कूल के स्तर पर छात्राओं के एडमिशन की जांच के लिए कोई कमेटी है ही नहीं. शिक्षकों की कमी अलग है.

इस स्थिति में राशि के वितरण मामले में दिक्कत सकती है. शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर कोई छात्रा क्लेम करती है कि उसने इंटर में एडमिशन लिया है. वह इंटर कॉलेज का आईकार्ड लेकर आती है तो उसे राशि जारी कर दी जाएगी. लेकिन, बाद में वह एडमिशन आईकार्ड फर्जी निकला तो कौन फंसेगा? यह तय नहीं हो पाया है.

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