जच्चा बच्चा के स्वास्थ्य को लेकर प्रतिरक्षण की जरूरतों पर जोर

औरंगाबाद : प्रतिरक्षण के माध्यम से ही हम मातृ और शिशु मृत्यु दर पर काफी हद तक रोक लगा सकते है, लेकिन इसके लिए जरुरत है. गर्भवती महिला को गर्भावस्था धारण करने के बाद नियमित टीकाकरण करना. उक्त बातें दाउदनगर अनुमंडल स्वास्थ्य विभाग की हुई एक समीक्षात्मक बैठक के दौरान चिकित्सकों ने आशा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही.

दाउदनगर पीएचसी में आयोजित समीक्षात्मक बैठक में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं अनुमंडल अस्पताल के प्रभारी डीएस डॉ. मनोज कुमार कौशिक ने एएनएम व आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रतिरक्षण की उपलब्धियां बढाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि एएनसी (गर्भवती महिला के प्रथम जांच के समय) के समय ही उनका खाता खुलवायें. प्रधानमंत्री मातृत्व योजना के तहत प्रत्येक महीने की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की निशुल्क जांच के लिए उन्हें जागरूक करें. सुरक्षित मातृत्व के लिए यह अत्यंत ही जरूरी है. गौरतलब है कि भारत सरकार ने मातृत्व योजना के तहत निजी प्रैक्टिस कर रही महिला चिकित्सकों से प्रत्येक माह के 9 तारीख को सरकारी अस्पतालों में निशुल्क योगदान देने का आग्रह भी किया है.

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इतना ही नही स्वास्थ्य विभाग ने आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता को प्रत्येक महीने दो-दो और आशा फैसिलेटर एवं एएनएम को तीन-तीन बंध्याकरण कराने का लक्ष्य दिया गया. उन्होंने कहा कि प्रसव के सात दिनों के भीतर बंध्याकरण कराने के लिए भी महिलाओं को जागरूक करें. ऐसा करने वाली महिलाओं को सरकार द्वारा तीन हजार रुपया प्रोत्साहन राशि दिया जाएगा. स्वास्थ्य उपकेंद्र सही समय से खोलने एवं आम जनता को समुचित सुविधा प्रदान करने का निर्देश दिया गया. 21 जनवरी को बनने वाली मानव श्रृंखला में शत प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया. इस बैठक में लिपिक वृजमोहन लाल व एकाउंटेंट सुनील कुमार भी मौजूद थे.

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