बगहा: बहता हुआ दूषित गंदा पानी गंडक के पवित्रता पर कर रहा सवाल खड़ा

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बगहा: भारतवर्ष में गंगा नदी ही मैली नहीं हो रही है, अब गंड़क नदी भी मैली हो रही है. शिकागो धर्म सम्मेलन में लोगों ने महर्षि स्वामी विवेकानंद से प्रश्न किया था, कि भारत की पवित्र नदी कौन सी है, तो उन्होंने जवाब में कहा था, कि पवित्र नदी मेरे यहां गंड़क नदी है, तब फिर लोगों ने कहा कि गंगा नदी क्या हैं, तो उन्होंने कहा था कि गंगा तो माता है और माता अपवित्र नहीं हुआ करती.

स्वामी विवेकानंद हम सभी के बीच में आज मौजूद तो नहीं हैं, परन्तु उनके बोले गये शब्द आज भी गूंज रहे हैं. यह देश गंगा को बचाने में आज करोड़ो रूपया खर्च कर रहा है.

गंगा को बचाने के लिए सरकार के तरफ से कई जागरूकता के कार्यक्रम भी चलाये जा रहें हैं, पर गंड़क को बचाने के लिए सरकार से लेकर समाजसेवी और जनप्रतिनिधि का कोई ध्यान नहीं है. विकास का ढिढोरा पीटा जा रहा है, विकास हो भी रहा है.

सरकार का लाखों-करोड़ों रूपया इस पर खर्च भी हो रहा है, पर सरकार का लाखों, करोड़ों का खर्च गंड़क के लिए विनाश साबित हो रहा है. इसका उदाहरण बगहा नगर परिषद के दीनदयालनगर मुहल्ला में देखा जा सकता है. इस मुहल्ले में विकास के नाम पर नाला बनाने के लिए लाखों रूपया खर्च हुआ है. इस मुहल्ला में बने नालों से गंदा पानी निकाला जाता है, पर यह सुनकर आपको आश्चर्य होगा कि बहता हुआ गंदा पानी गंड़क नदी में ले जाकर गिराया जाता है, जिस कारण गंड़क का पानी दूषित हो रहा है. इस सन्दर्भ में इस मुहल्ला के वार्ड पार्षद मोबिन अंसारी के घर पर जब मैं पहुंचा, तो उनके घर पर ताला लटका हुआ मिला. मालूम हुआ कि वो बाहर गये हुए हैं.

जानकारी हो कि प्रत्येक वर्ष गंड़क के किनारे-किनारे कई छठ घाट भी लगते हैं. छठ घाट लगने के पहले प्रशासन के वरीय अधिकारी स्वयं मुआयना भी करते हैं, पर यह बहता हुआ गंदा पानी पदाधिकारियों को  दिखाई नहीं पड़ता. मजे की बात यह है कि जहां पर नाला से गंदा पानी गिराया जा रहा है, उसी जगह पर दीन दयाल नगर छठ घाट भी लगता है.

जानकारी हो गंड़क नदी का उद्गम स्थल नेपाल में है, जहां शालिग्राम भी मिलते हैं, शालिग्राम केवल गंड़क नदी में ही मिलता है, जिनकी पूजा सनातन धर्म के लोग करते हैं. पूजा गंड़क नदी की भी होती है. गंड़क को नारायणी और क्षीर सागर के रूप में भी जाना जाता है. भगवान विष्णु और लक्ष्मी इसमें विराजित हैं.

हिन्दू धर्मों के तस्वीरों में भगवान विष्णु और लक्ष्मी को शेषनाग पर शयनवस्था में  जो दिखाया जाता है. वहीं गंड़क नदी को ही दर्शाया गया है.  इसकी भी एक अल्ग कहानी है. बहरहाल बहता हुआ दूषित गंदा पानी गंड़क के पवित्रता पर सवाल खड़ा कर रहा है.

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