जरूर पढ़ें, व्हाट्स एप ग्रुप में गलत पोस्ट पर किसकी फंसेगी गर्दन !

लाइव सिटीज डेस्क : व्हाट्स एप या अन्य सोशल नेटवर्किंग ग्रुप में पोस्ट की जाने वाली वाली सामग्री को लेकर ग्रुप एडमिन जिम्मेदार है या नहीं इस पर पेंच फंसा हुआ है. एक ओर जहां ग्रुप में यदि उटपटांग, भ्रामक, या मिथ्या पोस्ट शेयर किया गया तो ग्रुप एडमिन के खिलाफ FIR भी दर्ज किया जा सकता है.  तो दूसरी ओर यदि दिल्ली हाई कोर्ट के एक फैसले की माने तो इसके लिए ग्रुप एडमिन जिम्मेदार नहीं है. 

ताजा मामला वाराणसी का है

वाराणसी के जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नितिन तिवारी ने एक संयुक्त आदेश में साफ किया अगर गलत तथ्यों, अफवाह और भ्रामक सूचनाएं सोशल मीडिया के किसी ग्रुप पर शेयर किया जाएगा तो ग्रुप एडमिनेस्ट्रेटर के खिलाफ FIR दर्ज किया जा सकता है. बता दें कि सोशल मीडिया पर गलत न्यूज और भ्रामक तस्वीरों के कारण हाल के दिनों में काफी चिंता व्यक्त की जा रही है. इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने यह फैसला किया है. 

संयुक्त आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर कई ऐसे ग्रुप हैं जो न्यूज ग्रुप के नाम से हैं. इसके अलावा अन्य नामों से भी कई ग्रुप हैं जो गलत न्यूज या खबरों को बढ़ावा देते हैं. आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया ग्रुप के एडमिनेस्ट्रेटर को ग्रुप को ओनरशिप के लिए तैयार रहना चाहिए. एडमिनेस्ट्रेटर को ग्रुप में केवल उन्हीं सदस्यों को शामिल करना चाहिए जिन्हें वह निजी तौर पर जानता हो.

पिछले साल दिसंबर 2016 में दिल्ली हाई कोर्ट ने नहीं माना ग्रुप एडमिन को जिम्मेदार

ऑनलाइन चैट ग्रुप पर बोलने की आजादी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया. दिल्ली हाईकोर्ट के अनुसार व्हाट्सएप्प, टेलीग्राम और दूसरी सोशल नेटवर्किंग सर्विसेज के चैट ग्रुप का एडमिन उन ग्रुप्स में पोस्ट की जाने वाली सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं है.

ग्रुप एडमिन दूसरे सदस्यों की हर एक पोस्ट पर लगाम नहीं लगा सकता
ग्रुप का एडमिन पर किसी दूसरे सदस्य की ओर से भेजी गई आपत्तिजनक सामग्री की वजह से मानहानि का दावा नहीं किया जा सकता. ग्रुप में सभी सदस्य जो कुछ सामग्री भेजते हैं उस पर चैट ग्रुप का एडमिन कोई लगाम नहीं लगा सकता.

एक चैट ग्रुप के प्रबंधक के ऊपर लगाए गए मानहानि के आरोप को खारिज करते हुए ये आदेश एकल जज बेंच के जस्टिस राजीव सहाय एंडला ने सुनाया. जस्टिस राजीव सहाय ने कहा कि मैं ये समझने में असमर्थ हूं कि कैसे किसी ग्रुप के एडमिन पर उस ग्रुप में दूसरे सदस्यों की ओर से भेजी गई आपत्तिजनक सामग्री के लिए मानहानि का दावा ठोका जा सकता है. ये आरोप उसी तरह है जैसे न्यूजप्रिंट बनाने वाले को उसमें छापी गई टिप्पणी के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए. 

एडमिन से अनुमति लेकर कोई सामग्री पोस्ट नहीं होती
जज ने ये भी कहा कि ग्रुप में कुछ भी पोस्ट होने से पहले एडमिन से उसकी अनुमति लेने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसा नहीं है कि बिना एडमिन के अप्रूवल के उस ग्रुप में कोई भी बात पोस्ट नहीं की जा सकती.

जस्टिस सहाय ने आगे कहा कि एडमिन सिर्फ एक ऑनलाइन चैट ग्रुप बनाता है और उसमें जोड़े जाने वाले सदस्यों का चयन करता है. जब कोई ग्रुप बनाया जाता है तो एडमिन कभी ये उम्मीद नहीं करता कि उसको किसी दूसरे सदस्य की वजह से गुनेहगार साबित किया जाएगा.

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक चैट ग्रुप के एडमिन विशाल दुबे पर लगाए गए मानहानि के आरोप को खारिज करते हुए ये फैसला सुनाया. अपनी पोस्ट्स के लिए आप खुद जिम्मेदार होंगे और उसका दंड भी आपको ही भोगना होगा किसी अन्य को नहीं.

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