मस्ताना के ‘हम हईं भोजपुरिया पुरूबिया… गीत पर दिल्ली में मस्त हो गए श्रोता

बेतियाः चंपारण की धरती प्रतिभाओं से भरी पड़ी है. अतीत से वर्तमान तक ऐसे अनेक लोग इस भूमि पर हुए हैं, जिन्होंने पूरे विश्व में चंपारण का नाम रौशन किया है. गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में राष्ट्रीय स्तर के भोजपुरी कवियों में गोरख प्रसाद ‘मस्ताना’ सबसे अग्रणी रहे. जब उन्होंने अपनी भोजपुरी रचना ‘हम हईं भोजपुरिया पुरूबिया हईं’  गाया तो दिल्ली का प्यारेलाल भवन तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान हो उठा. वहीं ‘देशवा बसे हिया में’ सुनाकर उन्होंने सभागार को देशभक्ति की भावना से ओत- प्रोत कर दिया. इस दौरान उन्हें देश के वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री राम बहादुर राय ने सम्मानित भी किया.

बता दें कि गोरख प्रसाद ‘मस्ताना’ बिहार राज्य भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष भी हैं और कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं. भोजपुरी में इनकी कई रचनाएं अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं. ‘जिनगी पहाड़ हो गईल’ नामक कविता संग्रह और श्रवण कुमार पर लिखे गए एकमात्र खंड काव्य ‘श्रवण कुमार’ के अलावा कई पुस्तकें इन्होंने लिखी हैं.mastana34

राज उच्च विद्यालय. बेतिया से सेवानिवृत होने के बाद भोजपुरी के मान-सम्मान के लिये इन्होंने कई कार्य किये हैं. भोजपुरी के लिए चल रहे आंदोलन के सूत्रधारों में से एक मस्ताना की रचना जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती है.

यूं तो अपनी भाषा से सबको प्रेम होता है .लेकिन बिहार में सर्वाधिक प्रयोग की जाने वाली भोजपुरी के मान-सम्मान के लिए इतनी मेहनत करने वाले डॉक्टर मस्ताना जैसे लोग विरले ही मिलते हैं.

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