EXCLUSIVE : गुजरात चुनाव तक गुजरात पुलिस बिहार के DGP के हवाले

लाइव सिटीज. गांधीनगर/पटना : चुनाव तो भारतीय निर्वाचन आयोग ही कराता है. 9 और 14 दिसंबर को होने वाला गुजरात विधान सभा चुनाव भी निर्वाचन आयोग ही कराएगा. लेकिन चुनाव के दौरान भी स्टेट के DGP की बड़ी भूमिका होती है. निर्देश चुनाव आयोग का होता है, किंतु सुरक्षा बलों की तैनाती में तालमेल DGP ही बैठाते हैं. महत्वपूर्ण बात यह है कि ठीक चुनाव के वक़्त गुजरात के DGP बदल गए हैं. DGP गीता जौहरी का रिटायरमेंट 30 नवंबर को हुआ.

गुजरात चुनाव तक गुजरात पुलिस बिहार के DGP के हवाले का आशय यह नहीं है कि पीके ठाकुर (DGP, बिहार) चुनाव कराने को गुजरात जा रहे हैं. दरअसल, मतलब यह है कि बिहार के रहनेवाले आईपीएस अधिकारी मोहन झा को गुजरात में DGP की हैसियत में चुनाव कराने का अवसर प्राप्त हो रहा है. आज शुक्रवार 1 दिसंबर से वे गुजरात चुनाव तक गुजरात के DGP के रूप में कार्य करेंगे.

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गुजरात कैडर के आईपीएस मोहन झा

आईपीएस मोहन झा 1985 बैच के गुजरात कैडर के अधिकारी हैं. अभी DG (एडमिन) के पद पर तैनात थे. DGP के तौर पर इनकी नियुक्ति चुनाव आयोग की सहमति से हुई है. मोहन झा गुजरात के चर्चित पुलिस अधिकारियों में शामिल रहे हैं. पोरबंदर में एसपी से लेकर गांधीनगर में पुलिस हेडक्वार्टर तक वे कई भूमिकाओं में रहे हैं. कभी किसी कारण, तो कभी किसी कारण मोहन झा सुर्ख़ियों में बने ही रहते हैं. अभी हाल में गुजरात हाईकोर्ट के एक मामले में भी आईपीएस मोहन झा की तेज चर्चा मीडिया में सुर्खियाँ बनी थी.

1990 के दशक में जब गुजरात में बहुत अधिक क्राइम था, तो पोरबंदर में मोहन झा ने अपराधियों के खिलाफ जैसी लड़ाई लड़ी थी, लोगों को आज भी याद है. बापू के शहर पोरबंदर को मोहन झा के एसपी बनने के पहले गुजरात का धनबाद कहा जाने लगा था. आशय यह कि सभी प्रकार का अपराध सिंडिकेट यहां पनप चुका था. लेकिन बिहार से जाकर गुजरात में आईपीएस बने मोहन झा ने एक के बाद एक तब सभी गिरोहों की हड्डी-पसली तोड़ दी थी.

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