पटना में दिखने लगे नए चेहरे, Chill करने के साथ ही पुराने फ्रेंड्स भी आ रहे याद

आज कल राजधानी पटना में नए-नए चेहरे काफी देखने को मिल रहे हैं. खासकर बोरिंग रोड इलाके में. यहां हॉस्टल और कोचिंग्स की भरमार जो है. यही कारण है कि यहां हर सीजन में नए चेहरे देखने को  मिल ही जाते हैं. इनमें कुछ तो अपने पुराने दोस्तों को छोड़ यहां आकर अपसेट हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो नई सर्किल पाकर खुश हैं, और खुल कर एन्जॉय कर रहे हैं.

 

शुक्रवार दोपहर जब मैं बोरिंग रोड से गुजर रही थी तो मेरी नजर अन्नपूर्णा गर्ल्स हॉस्टल पर पड़ी. यहां नयी लड़कियों का वेलकम, उस हॉस्टल में रहने वाली सीनियर्स कर रही थीं. यह देख मुझे भी अपने पुराने दिन याद आने लगे. बात ये थी कि मैंने भी कभी अपने पुराने सर्किल को छोड़ा था, उस वक़्त काम का प्रेशर और जिंदगी की भागदौड़ में पुराने दोस्त पीछे छूट गए थे. इन नए चेहरों को देख वो बातें फिर से ताज़ा हो उठीं.

मैंने उन न्यूकमर्स से इसी टॉपिक पर बात की और ये जानना चाहा कि क्या जिंदगी की उलझनों में उनके भी दोस्त पीछे छूट गए हैं और कितना याद करती हैं वो उन्हें –

Ritu
रितु

MBA में एडमिशन लेने आई रितु अपनी बेस्ट फ्रेंड शिल्पी को मिस करती हुई कहती हैं – जब हम बड़े हो जाते हैं, तब कई फायदे होते हैं. हम सेल्फ डिपेंडेंट हो जाते हैं. अपने फैसले खुद कर सकते हैं. लेकिन बड़े होने का अपना एक नुकसान भी है. हम अपने सबसे प्यारे दोस्त को कहीं न कहीं मिस कर देते हैं.

Neeli
नीली

वहीं नए सर्किल में आ कर काफी खुश दिख रही नीली वर्मा कहती हैं कि समय के साथ आगे बढ़ते हुए कई चीजें पीछे छूट जाती हैं. इनमें फ्रेंड्स भी हैं. जब हम छोटे होते हैं, तब ये फ्रेंड्स हमारी जिंदगी का इम्पोर्टेन्ट पार्ट होते हैं. जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारी प्रियोरिटीज बदल जाती हैं. कुछ सालों के बाद किसी दिन अचानक उनकी बहुत याद आती है. लेकिन फिर भी यहां आकर काफी Chill हूं.

Nupoor
नुपूर

पटना में कम्पटीशन की तैयारी करने आयी नूपुर का कहना है कि दोस्ती में कुछ कोशिशों की जरूरत होती है. कॉलेज में दोस्तों के साथ घूमना आसान है, मगर जिंदगी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, हम अपने रिलेशन को आगे बरकरार नहीं रख पाते. हम अपने दोस्तों के लिए समय निकालते ही नहीं, इस कारण दोस्ती में दरार तक पैदा हो जाती है.

Prerna
प्रेरणा

मास कम्युनिकेशन से मास्टर्स करने आई प्रेरणा कहती हैं कि जीवन में एक टाइम ऐसा आता है, जब हम अपनी लड़ाई खुद लड़ने निकल पड़ते हैं. इस सिचुएशन में जाने-अनजाने हम अपने दोस्तों की कद्र नहीं कर पाते.

वो कहती हैं – नेगेटिव थिंकिंग वाले फ्रेंड्स से दूर रहना अच्छा है, लेकिन अच्छे फ्रेंड्स से रिश्ता बरकरार रखना चाहिए.

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