नियोजित शिक्षक : हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी बिहार सरकार !

Patna-High-Court-min

पटना : बिहार के नियोजित शिक्षकों पर आये पटना हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने उस पर विचार करने की बात कही है. सूबे के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा है कि बिहार सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील भी कर सकती है. आज मंगलवार को ही पटना हाईकोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को सही ठहरा कर सभी नियोजित शिक्षकों को बड़ी खुशखबरी दे दी थी. इस मामले पर चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन की खंडपीठ ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था.

हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा कि हमें अभी फैसले की प्रति नहीं मिली है. कोर्ट के इस फैसले को डिटेल में अध्ययन करने के बाद ही सरकार कोई निर्णय लेगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस फैसले के खिलाफ बिहार सरकार अपील भी कर सकती है.

हाईकोर्ट के इस फैसले और शिक्षा मंत्री के बयान पर बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. संघ के महासचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि ऐसा करना हाईकोर्ट एवं संवैधानिक प्रतिबद्धता का उल्लंघन होगा एवं शिक्षा, शिक्षक तथा शिक्षार्थियों के लिए भी घातक होगा तथा सरकार की छवि भी कलंकित होगी.

सिंह ने बताया कि बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने 2009 में ही शिक्षकों के शोषणमूलक एवं शिक्षा विरोधी सरकारी नीतियों के खिलाफ याचिका दायर की थी. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन जज जीएस खेहर एवं एसए बाब्डे ने इसी संदर्भ के ऐतिहासिक फैसले से शिक्षकों के हौसले की आफजाई की थी और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत सभी उच्च न्यायालय एवं सरकार के लिए उक्त फैसले के ही अनुरूप कार्यान्वयन की बाध्यता का उल्लेख किया है.

इससे पहले संघ ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया. संघ के अध्यक्ष केदारनाथ पांडेय ने कहा कि अब बिहार सरकार के लिए यह बाध्यकारी है और पूरे देश में सरकार की बेहतर छवि के लिए भी यह आवश्यक है कि गुणात्मक शिक्षा योग्यतानुसार शिक्षकों को केन्द्रीय वेतनमान हू-ब-हू लागू करने संबंधी अधिसूचना तुरंत निर्गत करे.

BSTA
पटना हाईकोर्ट के फैसले के बाद मिठाई खिलाकर ख़ुशी मनाते शिक्षक संघ के अध्यक्ष

बता दें कि आज हाईकोर्ट ने सूबे के करीब 3.5 लाख शिक्षकों की मांग पर अपना फैसला देते हुए कहा कि समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग बिलकुल सही है. अगर एक समान कार्य के लिए समान वेतन नहीं दिया जा रहा है तो यह पूरी तरह से असंवैधानिक है. कोर्ट ने कहा है कि ऐसा न करना पूरी तरह संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*