कम पड़ गया नमो का 500 करोड़, कृषि विभाग ने केंद्र से मांगे 1093.36 करोड़

पटना : पूर्वोत्तर बिहार में आई भीषण बाढ़ के बाद अब राज्य सरकार की सबसे बड़ी चिंता किसानों को फसल क्षति मुआवज़ा देने की है. इसके लिए अभी भी सरकार को हज़ार करोड़ से ज़्यादा की राशि दरकार है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत माह बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौर करने के बाद राज्य सरकार को 500 करोड़ रुपये सहायता राशि के तौर पर दिया था. फिलहाल कृषि विभाग को जो बाढ़ से हुई फसल क्षति का प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है, उसके मुताबिक 6,95,937 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र, 46,675 हेक्टेयर असिंचित क्षेत्र तथा 67,840 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र यानी कुल मिलाकर 8,10,453 हेक्टेयर में फसल क्षति का प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है.

दरअसल, कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने राज्य में बाढ़ प्रभावित 21 ज़िलों में फसलों को हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति, नुकसान की भरपाई तथा वैकल्पिक खेती हेतु आवश्यक विचार विमर्श के लिए बुधवार को समीक्षा बैठक के बाद यह जानकारी दी. बैठक में बाढ़ प्रभावित सभी ज़िलों के ज़िला कृषि पदाधिकारी, परियोजना निदेशक, सहायक निदेशक आदि शामिल रहे. कृषि मंत्री ने बताया कि बाढ़ के दौरान विभाग द्वारा प्रारंभिक आंकलन कराया गया था, जिसके अनुसार कुल 8,10,453 हेक्टेयर में फसल क्षति का प्रतिवेदन प्राप्त हुआ था.

कृषि मंत्री ने कहा कि इसके लिए कुल 1,093.36 करोड़ रुपये फसल क्षति मुआवज़ा की मांग भारत सरकार से की गई है. उन्होंने बताया कि बाढ़ का पानी निकलने के बाद वास्तविक फसल क्षति का आंकलन किया जा रहा है. इसके लिए ज़िला स्तर से लेकर प्रखंड एंव पंचायत स्तर तक के पदाधिकारियों, कृषि समन्वयकों एंव किसान सलाहकारों को लगाया गया है. कृषि मंत्री ने आंकलन को युद्ध स्तर पर पूरा करने का निर्देश भी दिया है. उन्होंने आगे बताया कि समीक्षा में यह बात सामने आई है कि जहां बाढ़ का पानी निकल गया है, वहां 70-80 प्रतिशत धान की फसल सुरक्षित रह गई है, लेकिन जहां पानी नहीं निकल है वहां फसल बुरी तरह प्रभावित है.

कृषि मंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार एंव कृषि विभाग किसानों के साथ मुस्तैदी से खड़े हैं. बता दें की राज्य आपदा राहत कोष के प्रावधान के मुताबिक सिंचित क्षेत्र के तहत धान, मक्का, सब्ज़ी के लिए 13,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, असिंचित क्षेत्र के तहत अरहर, उड़द, मूंग, मडुआ के लिए 6,800 रुपये प्रति हेक्टेयर जबकि वार्षिक फसल आम, अमरूद, लीची, केला, गन्ना के लिए 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवज़ा दिया जायेगा.

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