बिहार स्टेट बार काउंसिल को निष्क्रिय रखने की इजाजत किसी को नहीं : पटना हाईकोर्ट

पटना : बिहार राज्य बार काउंसिल में गत तीन वर्षों से चुनाव नहीं होने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिहार स्टेट बार काउंसिल को निष्क्रिय रखने की इजाजत किसी को नहीं दी जायेगी. यह बार काउंसिल का कर्तव्य है कि वह स्टेट बार काउंसिल के चुनाव के लिए सही तरीके से जांच कर मतदाता सूची तैयार करे और चुनाव कराये. इसलिए वह तीन सप्ताह के भीतर अदालत को यह बताये की वह चुनाव कब करायेगी.

मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश डा. अनिल कुमार उपाध्याय की खण्डपीठ ने अधिवक्ता श्रीप्रकाश श्रीवास्तव की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि बिहार राज्य बार काउंसिल का चुनाव वर्ष 2014 में ही कराया जाना था जो अबतक नहीं कराया गया है. यह नियमो के विरूद्ध है.

 

वहीं बार काउंसिल के अधिवक्ता द्वारा अदालत में पुन: दलील दी गयी की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि इसी सम्बंध में एक मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है. अदालत ने उक्त दलील को खारिज करते हुए बार काउंसिल को अगली सुनवाई में यह बताने का निर्देश दिया की वह बिहार स्टेट बार काउंसिल का चुनाव कब करायेगी. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया की यदि बार काउंसिल आफ इंडिया कोई समय नहीं बताती है तो अदालत स्वयं इसके लिए ठोस कदम उठाते हुए बिहार स्टेट बार काउंसिल का चुनाव कराने के लिए चेयरमैन अथवा किसी और को मतदाता सूची तैयार कर चुनाव कराने का निर्देश दे देगी.

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