पुरान लड़ैता हैं रामाधार सिंह-सुशील सिंह, भेड़िया आया-भेड़िया आया वाला शोर है

-कन्हैया भेलारी-

पटना : ‘अनुशासित’ पार्टी भाजपा के दो माननीय बाउंड्री लाइन से बाहर जाकर आपस में लड़ रहे हैं. आलाकमान मुंह पर जाबी लगाकर सब कुछ देख-सुन रहा है. पूछने पर बिहार सरकार में बीजेपी कोटे के एक वरिष्ठ मंत्री ने अनमने मूड में इस प्रकार प्रतिक्रिया दी ‘ई दोनों का झगड़ा सलटाने का जो प्रयास करेगा, वही पीसा जाएगा. पुरान लड़ैता है. देखियेगा थककर अपने आप दोनो ठंढ़ा हो जाएगा’.

बात हो रही है औरंगाबाद के सांसद सुशील कुमार सिंह और पूर्व मंत्री रामाधार सिंह की आपसी टक्कर की. दोनो अपने को राणा प्रताप की विरासत की देन मानते हैं. सेम पार्टी में होने के बावजूद भी दोनों विचार के स्तर एक दूसरे से कोसों दूर हैं. एक मगही गाता है तो दूसरा भोजपुरी सुनता है. आपस में लड़ने का उचित और अनुचित मौके की फिराक में दोनो रहते हैं. हालांकि ऐसे भी लोग हैं जो इनके चलंत संग्राम को नूरा कुश्ती मानते हैं.

टटका में रामाधार सिंह ने आरोप लगाया है कि सांसद सुशील सिंह धनबाद से शूटर हायर करके उनका वध कराना चाहते हैं. उन्हाने शूटर का नाम भी अखबार वालों को बताया है. दूसरी तरफ सांसद का बयान आया है कि पूर्व मंत्री अपना दिमागी संतुलन खो दियें हैं और सरकार को इनको फौरन कांके ले जाकर उचित इलाज कराना चाहिए . ‘ मैं सपने में चींटी की हत्या की बात नहीं सोच सकता’ सुशील सिंह ने लेखक से सफाई दी .

देव कार्तिक छठ मेला का उद्घाटन समारोह, जहां से शुरू हुआ है ताजा विवाद

इस अरोप-प्रत्यारोप को लेकर मीडिया में गर्मी देखी-पढ़ी जा रही है, पर इसको लेकर औरंगाबाद की सरजमीं व राजनीतिक गलियारे में कोई एक्सट्रा आर्डिनरी हलचल हरगिज नहीं है. जिससे बात कीजिये वो कहेगा -‘अपना काम कीजिये, ये भेड़िया आया भेड़िया आया वाला शोर है’.

बहरहाल, जैसी करनी, वैसी भरनी. लगता है इसी का शिकार हो गए हैं पूर्व मंत्री रामाधार सिंह. बात 2006-07 देव महोत्सव की है. सीएम नीतीश कुमार चीफ गेस्ट थे. मंत्री की हैसियत से रामाधार सिंह ने जिलाधिकारी से मिलकर सुनिश्चित किया कि प्रोटोकाल ऐसा बने कि पूर्व विधायक सुशील कुमार सिंह कार्यक्रम में मंचासीन न होने पाएं. प्रशासन द्वारा ऐसा ही षड़यंत्र रचा गया. लेकिन कार्यक्रम के दिन बेचारे का प्लान फेल हो गया. नीतीश कुमार ने जब सुशील सिंह को आडियेंस की कतार में देखा तो बमक गए. सुशील सिंह को डीडीसी से मंच पर बुलवाकर अपने पास बैठाये.

लेकिन एक बार जो प्रोटोकाल बन गया तो बन गया. बनाने वाला ही उसकी जाल में 24 अक्टूबर को आहूत देव महोत्सव में फंस गया. एक स्थानीय अधिकारी के अनुसार सांसद सुशील सिंह के भाषण के बाद उपस्थ्ति मंत्री को सभा को संबोधित करना था. इस्टैबलिश नियम का उल्‍लंघन करके संचालनकर्ता पर दबाव बनाया गया और पूर्व विधायक व मंत्री रामाधार सिंह को बोलने का अवसर प्रदान किया गया. जिसपर सुशील सिंह के समर्थक भड़क गए. वे चिल्लाने लगे कि प्रोटोकाल का रेप कर-करवाकर हमारे सांसद को बेइज्जत किया जा रहा है’. हंगामा हो गया. इसके बाद रामाधार सिंह चिढ़ कर सभा स्थल से चले गए.

रामाधार सिंह की गिनती हल्ला बिग्रेड के अवतारी नेता के रुप में की जाती है . अपने रिश्‍तेदार भी गंभीर आरोप लगा चुके हैं . दूसरी तरफ सांसद सुशील कुमार सिंह शालीनता के साथ दबंग नेता की श्रेणी में गिने जाते हैं. जमीन और जमीर के कारण ही इन्‍हें 20 साल के अंदर परम प्रतापी छोटे सरकार सत्येन्द्र नारायण सिंह के खानदान की राजनीति पर लगभग पूर्ण विराम लगाने में सफलता मिली .

(यह आलेख बिहार के सीनियर जर्नलिस्ट कन्हैया भेलारी  ने लिखा है, लाइव सिटीज ने हैडिंग के निर्धारण के अलावा इसमें और कोई तथ्य नहीं जोड़ा है. )

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*