पहले देखिये पटना की कुछ तस्वीरें, फिर जानिए छठ पर्व में ठेकुआ का महत्व

पटना (जुलकर नैन) : लोक आस्था के महापर्व छठ कि शुरुआत हो चुकी है. पूरा वातावरण भक्तिमय हो चुका है. आज छठ पूजा का तीसरा दिन है. नहाय-खाय के साथ महापर्व छठ शुरू हो चुका है. इस दिन व्रती सुबह स्नान करने के बाद चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी खा कर छठ पर्व कि शुरुआत की. उसके बाद दूसरे दिन खरना किया गया. खरना में पूड़ी खीर का प्रसाद बनाया खाया गया.

आज गुरुवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. शुक्रवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के बाद यह महापर्व समाप्त हो जाएगा. इन सब में छठ पर बनने वाले विभिन्न प्रकार के व्यंजन और छठ के प्रसाद का विशेष महत्व होता है. इसमें भी सबसे महत्वपूर्ण है ठेकुआ.

छठ पूजा के अवसर पर प्रसाद के रूप में ठेकुआ विशेष रुप से बनाया जाता है. दूसरे शब्दों में कहें तो ठेकुआ ही छठ पूजा का प्रमुख प्रसाद है. आपको बता दें कि ठोककर बनाने के कारण ही इसे ठेकुआ कहा जाता है. ठेकुआ से ही भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और प्रसाद के रूप में इसे बांटा जाता है.

ठेकुआ बनाने की सामग्री

1. किलो गेहूं का आटा
2. गुड़
3. कद्दूकस किया हुआ नारियल
4. इलायची का पाउडर या कूटा हुआ
5. तलने लायक रिफायंड या घी
6. किशमिश

ठेकुआ बनाने की विधि

1-सबसे पहले एक बर्तन में गुड़ को लेकर भिगों दें ताकि वह आटा के साथ गूंथने लायक हो जाए.

2-अब किसी अन्य बर्तन में आटा निकालें और इसमें नारियल, इलायची और किशमिश डालकर अच्छे से मिलाएं.

3-भिगोए हुए गुड़ के पानी को छलनी से छान लें और उसी पानी से आटा गूथें.

4-गूंथे हुए आटे की छोटी-छोटी लोई बनाएं और फिर इस लोई को ठेकुआ के सांचे में रखकर बनाएं. ठेकुआ का सांचा अलग-अलग डिजाइन में भी बाजार में मिल जाएगा.

अब कढाई में तेल या घी अच्छी तरह से तेज आंच पर गर्म करें. तेल के गर्म हो जाने के बाद आंच कम करके कढाई में और सांचे में बनाए हुए ठेकुआ को डालें और हल्के ब्राउन (भूरे) रंग होने तक पलटते रहें.
उसके बाद भूरे होने के बाद कढाई से ठेकुआ निकालें.

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