बिहार की ग्रामीण महिलाएं बनेंगी Internet फ्रेंडली, इन पांच जिलों में शुरू हुआ अभियान

कटिहार (प्रो दिलीप वत्स) : अब वो दिन दूर नही जब बिहार के गांव मे रहने बाली मोबाइल फ्रेंडली महिला इंटरनेट फ्रेंडली बनकर न सिर्फ अपनी क्षमता को बल्कि अपनी जानकारी को नई ऊंचाई दे सकेंगी. इस काम का जिम्मा Google द्वारा चयनित तथा प्रशिक्षित प्रभावशाली महिलाओं को दिया गया है. ये प्रशिक्षण प्राप्त महिला इंटरनेट साथी के नाम से जानी जाती है.

ये इंटरनेट साथी इंटरनेट साइकिल कार्ट को लेकर गांवों में जाती हैं. वहां की महिलाओं को स्मार्ट फ़ोन का उपयोग करने, फ़ोन और टैबलेट के माध्यम से इंटरनेट उपयोग करने और ऑनलाइन जानकारी खोजने के लिए प्रशिक्षण देती हैं. महिलाओं को एक-एक नि:शुल्क साइकिल उपलब्ध कराई गई है. साइकिल के पीछे के हिस्से में इनबिल्ट किट बॉक्स है. इसमें इंटरनेट का 2जी, राउटर डिवाइस, दो एंड्रॉइड मोबाइल, एक टेबलेट, बुकलेट शामिल हैं. इन महिलाओं को उस इलाके की दूसरी महिलाओं को इंटरनेट फ्रेंडली बनाने की जिम्मेदारी दी गई है.

अंतर बढ़ा तो हरकत में आए

मोबाइल पर सोशल मीडिया के बढ़ते दायरे और इंटरनेट उपयोगकर्ता ग्राफ में महिला-पुरुषों के बीच बढ़ते अंतर के बाद सरकार हरकत में आई है. शहरी क्षेत्रों में इंटरनेट फ्रेंडली महिलाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, जबकि ग्रामीण इलाके में यह स्थिति उलट है. इस स्थिति के बाद गूगल व टाटा ट्रस्ट को इसका दायरा फैलाने की हरी झण्डी दी गई है. मोबाइल पर ही घर से लेकर व्यापार, शिक्षा, नौकरी तक की जानकारी लेने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

किन जिलों में शुरू हुआ यह अभियान 

यह अभियान अभी छपरा, भोजपुर, कटिहार, किशनगंज और अररिया में चल रहा है. शुरुआत एक अगस्त से ही हो चुकी है. इंटरनेट सेवा गूगल दे रही है. वहीं, आर्थिक सहायता टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विसेज दे रहा है. राज्य में इस काम को फिया फाउंडेशन के माध्यम से किया जा रहा है. इसकी स्टेट मैनेजर आरती वर्मा हैं.

योजना के तहत राज्य की आठ लाख 40 हजार महिलाओं को डिजिटल साक्षर बनाया जाएगा. छह महीने में अभियान चलाकर यह लक्ष्य हासिल किया जाएगा. कहना होगा कि यह इंटरनेट साथी योजना की सफलता ने न सिर्फ आधी आबादी को बल्कि बिहार के विकास को रफ्तार दे सकेगी.

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