शराबबंदी : अभी नहीं छूटी लत, 18 महीने में 90,000 हो गए गिरफ्तार

लाइव सिटीज डेस्क: बिहार अब ड्राई स्टेट है. लेकिन लोगों की शराब पीने की लत अभी छूटी नहीं है. शराब की तलब लोगों को जान पर खेलकर जहरीली शराब पीने के लिए भी मजबूर कर रही है. इसकी ताजा नज़ीर शनिवार को रोहतास में देखने को मिली थी. रोहतास में शनिवार को चार लोगों की मौत जहरीली शराब पीने की वजह से हो गई.

इस ताजा वाकये के कारण शराबबंदी का फैसला फिर सुर्खियों में है. खुला सच है कि नीतीश कुमार की सरकार सूबे में शराब की आमद रोकने में नाकाम रही है. शराबबंदी 1 अप्रैल, 2016 को लागू की गई थी. लेकिन पटना हाई कोर्ट ने जब पिछले फैसले को रद कर दिया तो 2 अक्टूबर को नया कानून बनाकर इसे लागू कर दिया गया.

18 महीने में 90,000 ​गिरफ्तार

महज 18 महीनों में 90,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं हैं. जबकि 77,000 एफआईआर दर्ज की गई हैं. पुलिस ने 5 लाख से ज्यादा छापे मारे हैं. शराबबंदी असरदार साबित नहीं हुई है इसके पीछे बड़ा कारण यह भी है कि शराब अधिनियम में गिरफ्तार होने वालों में से 95 फीसदी लोग जमानत लेकर बाहर आ गए. रोहतास कांड शराबबंदी के बाद का दूसरा बड़ा काण्ड है. इससे पहले अगस्त 2016 में गोपालगंज जिले में जहरीली शराब पीने से 18 लोगों की मौत हो गई थी.

समानांतर इकॉनमी चला रहे माफिया

इन दो हादसों ने शराब माफिया की समानांतर अर्थव्यवस्था का खेल उजागर कर दिया है. ट्रकों में भरकर शराब न सिर्फ प्रदेश में आ रही है बल्कि लोगों तक आसानी से पहुंच भी रही है. रोज ही पूरे प्रदेश में शराब की बड़ी खेप पकड़ने की खबरें आ रही हैं.

उम्मीद थी कि काम आएगा फैसला

शराबबंदी का फैसला नीतीश कुमार ने चुनाव प्रचार के दौरान एक महिला से किए वायदे को पूरा करने के लिए किया था. नीतीश कुमार को उम्मीद थी कि ये फैसला चुनाव में वोट दिलवाने में अहम साबित होगा. हालांकि नीतीश कुमार अपने राजनीतिक सहयोगी बदल चुके हैं. लेकिन शराबबंदी के पाले में वह अभी भी खड़े हैं.

पूर्व सहयोगी और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद मानते हैं कि, ‘शराबबंदी नीतीश सरकार की बड़ी विफलता है. शराब घर पर पहुंचाई जा रही है. जो खरीद सकते हैं, शराब उन्हें दरवाजे पर मिल रही है. लेकिन जो इसे खरीद नहीं सकते हैं, वह जहरीली शराब की तरफ रुख कर रहे हैं.’

क्या कहते हैं अधिकारी

जबकि बिहार के गृह सचिव आमिर सुब्हानी के पास इस वक्त उत्पाद और निषेध विभाग का भी प्रभार है. कहते हैं कि पुलिस और अधिकारी शराबबंदी को लागू करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. हम अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिशें कर रहे हैं. लेकिन अपराधी हमेशा अपराध की कोशिश करते हैं. हमारा काम उन्हें पकड़ना है. उन्होंने इस बात से इंकार किया कि प्रदेश में शराब तस्करी का कोई नेटवर्क काम कर रहा है.

शराब बंदी के बारे में एडीजी पुलिस मुख्यालय एसके सिंहल कहते हैं कि पुलिस के साथ—साथ उत्पाद विभाग के अधिकारी भी लगातार निगाह बनाए हुए हैं. लेकिन कुछ आदतन अपराधी हैं, जो अपराध करते हैं. लेकिन अब हम बड़े कारोबारियों को पकड़ रहे हैं. शराब पीने पर संपत्ति को जब्त करने के नियम को भी हम सख्ती से लागू करवा रहे हैं. हम अपने पुलिसकर्मियों पर भी एक्शन लेने से नहीं चूके हैं. 23 पुलिसकर्मियों को हमने जेल भेजा है और 220 ड्यूटी पर लापरवाही बरतने के कारण सस्पेंड किए गए हैं.

आसानी से मिल रही जमानत

कानून सख्त है और सजा कड़ी है, लेकिन जमानत लेना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है. शराबबंदी कानून के तहत 18 महीने में गिरफ्तार हुए 90,000 लोगों में से महज 3500 ही जेल में हैं. ये सारी स्थिति तब है जब बिहार की जेलों के कुछ क्षमता ही 38,000 है. यानी कि इस वक्त जेल में बंद कैदियों में से 10 फीसदी लोग सिर्फ शराब पीने के कारण जेल में हैं. IG जेल आनंद किशोर कहते हैं कि कोर्ट के पास पहले ही बहुत काम है और ऊपर से शराबबंदी के मामलों का दबाव झेलना आसान काम नहीं है.

क्या कहता है राज्य शराबबंदी कानून

शराब पास रखने पर रखने वाले को और परिवार के किसी भी सदस्य को जिसे इसकी जानकारी हो, अवैध तरीके से परिवहन, आयात, निर्यात, निर्माण, रखने या बिक्री करने पर जेल होगी. सजा की मियाद 10 साल से कम नहीं होगी जबकि इसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है. जुर्माना एक लाख रुपये से कम नहीं होगा जबकि इसे 10 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है.

शराब की जानकारी होने पर

अगर शराब का सेवन, निर्माण बिक्री या वितरण या भंडारण किया जाता है. चाहें वह किसी भी भवन या मकान में हो. ये माना जाएगा कि 18 साल से अधिक आयु वाले सभी लोगों को इस संबंध में जानकारी थी, उन्हें निर्दोष साबित होने तक आरोपी माना जाएगा.

शराब में मिलावट करने पर

अगर किसी भी पदार्थ में शराब की मिलावट की जाती है. तो दोषी को मृत्युदण्ड या उम्रकैद के साथ या अलावा जुर्माना भी किया जा सकता है. जुर्माना 5 लाख से कम नहीं होगा, जिसे बढ़ाकर 10 लाख तक किया जा सकता है.

शराब की बिक्री करने पर

10 साल की कैद, जिसे उम्रकैद और 10 लाख तक के जुर्माने में तब्दील किया जा सकता है. शराब पीने की सजा 5—10 साल के बीच होगी. जिसे उम्रकैद या फिर 10 लाख रुपये तक के जुर्मान में बदला जा सकता है.

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