कब सुलझेगी नियोजित शिक्षकों की समस्याएं, CM नीतीश को लिखा गया 9 पॉइंट्स वाला लेटर

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CM नीतीश कुमार और केदार नाथ पांडेय

पटना : बिहार के नियोजित शिक्षकों की समस्याएं किसी से छुपी नहीं हैं. सेवाशर्त निर्धारण न होने से लेकर लंबित वेतन इत्यादि इनकी प्रमुख समस्याएं हैं जिसके लिए सूबे के करीब 3.5 लाख नियोजित शिक्षक लगातार आंदोलनरत हैं. अब बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नियोजित शिक्षकों की समस्याओं पर ध्यान देने की मांग की है. इसके लिए संघ के अध्यक्ष विधान पार्षद केदार नाथ पांडेय ने आज सोमवार को मुख्यमंत्री को एक लंबा ख़त लिखा है.

मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में पांडेय ने 9 मुख्य बिन्दुओं पर उनका ध्यान आकृष्ट कराया है. अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि शिक्षा मंत्री के साथ 21 जुलाई 2017 और 6 सितम्बर 2017 को बिहार विधान परिषद् के शिक्षक और स्नातक क्षेत्र के विधायकों के साथ 19 सूत्री बिन्दुओं पर विमर्श हुआ था. इस दौरान शिक्षा विभाग ने आश्वस्त किया था कि लंबित समस्याओं पर शीघ्र कारवाई की जायेगी लेकिन आश्वासन के बावजूद अभी तक निम्नांकित समस्याएँ ज्यों की त्यों हैं. 2017 में मात्र दो महीने शेष हैं लेकिन शिक्षा विभाग जिस गति से काम कर रहा है उससे 2017 में भी किसी भी समस्या का समाधान संभव नहीं दिख रहा है. आगे केदार नाथ पांडेय ने 9 बिन्दुओं पर सिलसिलेवार तरीके से नियोजित शिक्षकों की मांगों को मुख्यमंत्री के सामने रखा है.

1 . नियोजित शिक्षकों की दो वर्षों से अधिक समय से लंबित सेवाशर्त नियमावली को लागू किया जाना – इस नियमावली के बगैर विद्यालयों में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा हो रही हैं जिनका निदान जैसे-तैसे नहीं हो सकता. अतः यथाशीघ्र यह नियमावली अधिसूचित हो इसके लिए आपका हस्तक्षेप आवश्यक है.

2 .  प्रधानाध्यापक पद पर प्रोन्नति – राज्य के राजकीयकृत और प्रोजेक्ट माध्यमिक/उच्च  माध्यमिक विद्यालयों में 85 प्रतिशत प्रधानाध्यापक के पद रिक्त हैं और माध्यमिक शिक्षा विभाग जैसे-तैसे प्रभार के माध्यम से विद्यालयों का संचालन कर रहा है. प्रधानाध्यापक के अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे संभव है. 800 शिक्षकों को प्रधानाध्यापक पद पर प्रोन्नति देने की कारवाई दो वर्षों से चल रही है. प्रतिदिन सेवानिवृत्ति हो रही है लेकिन प्रोन्नति नहीं हो पा रही है.

3 . माध्यमिक विद्यालयों में तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति – मंत्री के नेतृत्व में शिक्षा विभाग ने आश्वस्त किया था कि एक माह में जन शिक्षा से आये हुए कर्मियों का सामंजन करके चतुर्थ श्रेणी के पदों को भर दिया जायेगा और तृतीय श्रेणी के पदों के लिए अलग से व्यवस्था की जायेगी. आज की तिथि में लगभग 80 प्रतिशत विद्यालयों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पद रिक्त हैं और सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में शिक्षकों को शिक्षण छोड़कर लगाया जाता है लेकिन इस विषय पर भी शिक्षा विभाग की गति बेहद धीमी है.

4 . उच्च विद्यालयों और उच्च माध्यमिक विद्यालयों का परफारमेंस आधारित अनुदान –  बिहार विधान परिषद् के 185 और186 वें सत्रों में सरकार ने आश्वस्त किया था कि लगभग 335 करोड़ का अनुदान शीघ्र निर्गत किया जायेगा लेकिन पिछले 6 महीने से इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. दशहरा, दीपावली और छठ जैसे पर्व गुजर गये.

5 . जम्मू कश्मीर से बीएड की डिग्री प्राप्त करने वाले शिक्षकों का वेतन भुगतान – आपके निर्देश पर शिक्षा विभाग की अधिसूचना संख्या 1108 दिनांक 12.4.2017 द्वारा जम्मू-कश्मीर राज्य में अवस्थित विश्वविद्यालयों से प्रदत्त बीएड की डिग्री नियोजित शिक्षकों के लिए अपेक्षित अर्हता घोषित की जा चुकी है. बावजूद लगभग एक हजार शिक्षक जो विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत हैं. दो वर्षों से उनके वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है. नियमावली की अधिसूचना के बावजूद शिक्षा विभाग अनिर्णय की स्थिति में है.

6 . माध्यमिक विद्यालयों में अप्रशिक्षित शिक्षके के सवैतनिक प्रशिक्षण के संबंध में – इस विषय पर शिक्षा विभाग की अधिसूचना संख्या 2238 दिनांक 21.9.2017, पत्रांक 2239 दिनांक 21.9.2017 द्वारा अधिसूचना निर्गत होने के बावजूद आज तक शिक्षा विभाग यह तय नहीं कर पाया कि 2017-19 शिक्षण सत्र से माध्यमिक और उच्च माध्यमिक अप्रशिक्षित शिक्षके का प्रशिक्षण किन महाविद्यालयों में होगा और इसके लिए उन्हें क्या करना होगा. जबकि भारत सरकार के अनुसार विद्यालयी शिक्षा के अन्तर्गत सारे शिक्षकों का प्रशिक्षित होना अनिवार्य है. विशेष रूप से यह भी कहना है कि 2015-17 से जिन शिक्षकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है, अधिसूचना निर्गत होने के बावजूद उनके वेतन का भुगतान माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा नहीं किया जा रहा है.

7 . सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के पेंशन उपदान के भुगतान के संबंध में – राज्य सरकार इस बात के लिए प्रयत्नशील है कि सेवानिवृत्त कर्मियों को शीघ्र सेवोत्तर लाभों का भुगतान किया जाय ताकि उच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर नहीं हों. इसके बावजूद माध्यमिक शिक्षा विभाग 6 महीने से साल-साल भर तक सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापकों के सेवोत्तर लाभों का भुगतान नहीं करता. उनके सेवोत्तर लाभ के मामले लंबित पड़े रहते हैं.

8 . उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति, प्रबंधन की नीति और उनके वेतन भुगतान की जटिल प्रक्रिया – शिक्षा विभाग द्वारा मध्य विद्यालयों से माध्यमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों से उच्च माध्यमिक विद्यालयों में लगभग ढ़ाई से तीन हजार विद्यालय उत्क्रमित किए जा चुके हैं लेकिन न उनमें अध्यापक हैं और न प्रधानाध्यापक का पद है और न कोई प्रबंधन की नीति है. ऐसे उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय सिर्फ सर्टिफिकेट बांट रहे हैं.

9 . नियोजित शिक्षकों को 7वें वेतन का लाभ और वेतन निर्धारण के संबंध में – आपके निर्देश पर ज्ञापांक 1632 दिनांक 21.06.2017 द्वारा नियोजित शिक्षकों के लिए सातवें वेतन का आदेश निर्गत हुआ लेकिन इस संबंध में भी कोई उपयुक्त कारवाई अभी तक नहीं की जा सकी है. अतः अनुरोध है कि आप अपनी अध्यक्षता में शिक्षा विभाग के साथ बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ की एक बैठक आयोजित करने की कृपा करें ताकि शिक्षा विभाग की जड़ता समाप्त हो सके और वर्तमान वर्ष की शेष अवधि में इन समस्याओं का समाधान संभव हो सके. ताकि अगले सत्र से शिक्षक उत्साहपूर्वक सरकार के गुणवतापूर्ण शिक्षा को साकार करने की दिशा में प्रयत्नशील हो सकें.

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