बाय..बाय..नेहरा जी, आपके जैसे कमबैक किसी ने नहीं किया, एंज्वॉय रिटायरमेंट

(विमलेंदु कुमार सिंह) : ‘नेहरा जी!’ मध्यम गति के भारतीय तेज गेंदबाज को कमेंटेटर और उनके पुराने साथी वीरेन्दर सहवाग ने यही नाम दिया था. ऐसा खिलाड़ी जो खराब परफॉरमेंस के कारण कम और चोटिल होने के कारण ज्यादा समय तक टीम से बाहर रहे. लेकिन क्या किसी खिलाड़ी ने टीम ऐसा कमबैक किया है? बिल्कुल नहीं.

लेकिन अब उन्होंने फाइनली क्रिकेट को गुडबाय कहने का मन बना लिया है. वह क्रिकेट के सभी प्रारूपों से विदा ले रहे हैं. वह न्यूजीलैंड के खिलाफ नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला ग्राउंड पर होने वाले टी—20 मैच में आखिरी बार इंडियन जर्सी में दिखेंगे. 18 वर्षों के लंबे क्रिकेट कॅरियर में उन्होंने भारतीय क्रिकेट की खूब जमकर सेवा की.

 

उनके सिर पर इंडियन कैप सुशोभित हुआ था 1999 में. अजहरूद्दीन के हाथों में भारतीय क्रिकेट टीम की कमान थी. और जगह थी श्रीलंका की सिंहलीज स्पोर्टस ग्राउंड. यह उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आगाज था. तब से लेकी आज तक वह भारत की ओर से 17 टेस्टमैच, 120 एकदिवसीय मैच और 26 टी—20 मैचों में नुमाइंदगी कर चुके हैं. इतने लंबे कॅरियर में वह खूब चोटिल हुए. कई लोग तो यह कहते थे कि नेहरा और इंज्यूरी मानो चोली—दामन के रिश्ते से बंध चुके हों. उनकी 12 मर्तबे सर्जरी हुई.

यह उनकी जीवटता का ही प्रमाण है कि इसके बाद भी उन्होंने 235 अंतरराष्ट्रीय विकेट चटकाए और बल्ले के दिग्गजों को पैवेलियन का रास्ता दिखाया. इन 235 विकेटों में 44 विकेट टेस्ट मैचों में, 157 विकेट एकदिवसीय मैचों में और 34 विकेट टी—20 मैचों में चटकाए. कौन भूल सकता है पाकिस्तान के खिलाफ वह मैच जिसमें वह आखिरी ओवर फेंक रहे थे और पाकिस्तान को 6 गेंदों में 9 रन बनाना था और भारत ने वह मैच 5 रनों से अपनी झोली में कर लिया था. पाकिस्तान के दिल के अरमां को ‘नेहरा सर’ ने आंसुओं में बहा दिया था.

जख्म उनके कॅरियर का जंजाल बना रहा. जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मैचों में डेब्यू किया था तभी वह चोटिल हो गए और कई सालों तक टीम से बाहर रहे. लेकिन 2001 में उनकी वापसी हुई जिम्बाबे के खिलाफ हरारे स्पोर्टस क्लब के ग्राउंड पर. तब जहीर खान, जवागल श्रीनाथ और आशीष नेहरा विपक्षी बल्लेबाजों के लिए सिरदर्द हुआ करते थे. 2003 के विश्वकप में नेहरा जी चमक बरकरार रही. उन्होंने 19.26 के औसत से 15 विकेट अपनी झोली में किए. लेकिन टेस्ट मैच के साथ एकदिवसीय मैचों में लगातार रगड़कर खेलने का नतीजा यह हुआ कि वह एक बार फिर जख्मी हो गए.

काफी समय तक उन्हें टीम के बाहर इंतजार करना पड़ा. किसी खिलाड़ी के लिए ऐसे पल काफी हताशा से भरे होते हैं. उसकी जीवटता की परीक्षा होती है. जो टूटता नहीं है वह एक बार फिर से मैदान पर होता है और पूरी रौ में होता है. आॅल आइम लीजेंड एमएस के हाथों में टीम की कमान थी. उन्हीं के नेतृत्व में आशीष नेहरा ने एकबार फिर 2009 में टीम में कमबैक किया और 2011 के वर्ल्ड कप में मैदान पर दिखे. इस दौरान नेहरा एकदिवसीय मैचों में दूसरे सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाले गेंदबाज रहे.

दुर्भाग्यवश नेहरा का अंतिम एकदिवसीय पाकिस्तान के खिलाफ अविस्मरणीय सेमीफाइनल रहा. वह फिर से चोटिल हो गए. और अच्छे परफॉरमेंस के बावजूद फाइनल में उन्हें पैवेलियन में बैठना पड़ा. वर्ल्ड कप के बाद उन्हें टीम से ड्रॉप होना पड़ा. बाहर ही रहे. लेकिन उन्होंने क्रिकेट के टी—20 फॉर्मेट में खेलना शुरू कर दिया. IPL में जलवा बिखेरते रहे. उम्र भले बढ़ रही थी लेकिन खेल में गजब का निखार आ गया था.  नेशनल टीम सेलेक्टर्स इसकी अनदेखी न कर पाए. 2016 में उन्हें टी—20 वर्ल्ड कप में खेलने के चयनकर्ताओं ने चुन लिया. वेटरेन नेहरा टीम का हिस्सा बन गए. उन्होंने गजब की बॉलिंग की. नई गेंद से वह लगातार अच्छी गेंदें डालते रहे और इकोनॉमी रेट हमेशा 7 के नीचे रखा. टूर्नामेंट में उनकी झोली में पांच विकेट भी आए.


आईपीएल में नेहरा 88 मैच खेले और 106 विकेट लिया. उनका इकोनॉमी रेट भी 7.85 रहा. लसिथ मलंगा जिन्होंने 98 मैच खेले हैं, को अगर छोड़ दें तो नेहरा उनके बाद दूसरे गेंदबाज हैं जिन्होंने 100 से कम मैच खेलकर 100 से ज्यादा विकेट लेने में कामयाबी पायी. नेहरा ने यह शानदार कीर्तिमान स्थापित किया. यह सही है कि सभी फॉर्मेट के क्रिकेट से उनके संन्यास लेने के बाद हम उन्हें मैदान पर नहीं देख पाएंगे. लेकिन सबसे बड़ी बात यह होगी कि उनका कमबैक किसी भी खिलाड़ी के लिए प्रेरणादायी रहेगा. लोग उनकी वापसी को बतौर मिसाल के तौर पर पेश करते रहेंगे.

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