भारत की सड़कों पर कभी दौड़ती थी जेब्रा गाड़ी, घोड़े और बैल से ज्यादा ताकतवर होते थे

लाइव सिटीज डेस्क : आजकल दुनिया बहुत ही तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही है और ऐसे में सभी पुरानी चीजें अब बस तस्वीरों में देखने के लिए रह गईं हैं. इस बीच जो घोड़ा गाड़ी और बैल गाड़ी सड़को पर चला करती थी वो आज कहीं न कहीं तस्वीरों में कैद हो कर रह गईं हैं. घोड़ागाड़ी और बैलगाड़ी के बारे में तो सभी ने सुना होगा, लेकिन क्या कभी सुना है कि ट्रांसपोर्टेशन के लिए इस देश में जेब्रा गाड़ी का इस्तेमाल किया जाता था.

जी हां, गुलाम भारत के उस दौर में अंग्रेज ट्रांसपोर्टेशन के लिए जेब्रा गाड़ी का इस्तेमाल करते थे. 1930 में जेब्रा गाड़ी बंगाल के कोलकाता में चलती थी। इस गाड़ी का इस्तेमाल इसलिए किया जाता था जेब्रा घोड़े और बैल से ज्यादा ताकतवर होते थे और तेजी से काम करते थे.

जेब्रा कार्ट के साथ सबसे बड़ी प्रॉब्लम ये थी कि इन्हे संभालना काफी मुश्किल होता था और इनका खाना-पीना आम घोड़े से अलग होता था. जेब्रा की किक मारने की आदत के कारण भी कई लोगों ने इसे पालना बेहतर नहीं समझा. इसकी एक किक आदमी को मार भी सकती है.

19 सेन्चुरी की शुरुआत में जेब्रा कार्ट के साथ फोटो क्लिक करना और ट्रैवल करना काफी फेमस था. इसकी शुरुआत सबसे पहले अफ्रीका में हुई थी. साल 1889 में इसे लंदन में शुरू किया गया. इसके बाद अंग्रेजी हुकूमत इसे भारत भी लेकर आई.

भारत में इसकी शुरुआत कोलकाता से की गई. वहां के अमीर और अंग्रेज इसे ट्रैवलिंग के लिए इस्तेमाल करते थे. जेब्रा अफ्रीकन प्रजाति का जानवर है, इसलिए ये भारत की जलवायु में एडजस्ट नही कर पा रहे थे. यही वजह रही कि जेब्रा गाड़ी ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकी.

जब जेब्रा कार्ट की शुरुआत की गई, उस वक्त लोगों में इसका खासा क्रेज था. सालों से चली आ रही घोड़ागाड़ी से लोग बोर हो गए थे और कुछ नया देखने को मिला था.

जेब्रा कार्ट यूरोपीय देशों के साथ यूएस की कई सिटी में शुरू हई. इसके अलावा ब्राजील, न्यूजीलैंड और भारत में शुरू हुई.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*