पटना के घाट पर उगेलन सुरूज मल….उदीयमान भगवान भास्कर को दिया जा रहा है अर्घ्य

पटना (विमलेन्दु कुमार सिंह) : राजधानी पटना समेत पूरे बिहार में उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देने का सिलसिला शुरू हो गया है. भगवान सूर्य ने दर्शन दे दिए हैं. लाइव सिटीज की रातभर की रिपोर्टिंग में कैसे रहा पटना का हाल. कैसे रहे इंतजाम नीचे पढ़िए संवाददाता विमलेन्दु कुमार की जुबानी-

अभी सुबह के तीन बजे हैं. घाट पर लोगों का आना शुरू हो गया है. कल शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया. शाम के अर्घ्य में होता यह है कि लोग आते हैं और अर्घ्य अर्पित कर तुरंत वापस चले जाते हैं. लोगों के आने और जाने का सिलसिला अनवरत चलता रहता है. इसलिए घाट पर भीड़ होने के बावजूद बहुत ज्यादा भीड़ का अहसास नहीं होता है.

लेकिन सुबह में सभी को इंतजार रहता सूर्य की उदित होने का. लाखों व्यग्र आंखें पूरब दिशा की ओर टकटकी लगाए रहते हैं. व्रती पानी में खड़े करबद्ध सूर्य देवता का इंतजार करते रहते हैं. ‘उगअ न सूरूज देव भेल अरग के रे बेर, पूजन के रे बेर….’ घाट पर बज रहे छठ के इस गीत में सूर्योदय की प्रतीक्षा में पानी में खड़े व्रती की व्यग्रता महसूस की जा सकती है.

जाड़ा दस्तक दे चुका है यह भी पहली बार छठ घाट पर आकर ही अहसास हो रहा है. छोटे बच्चे और बुजुर्ग एहतियातन गर्म कपड़ा धारण कर चुके हैं. जिंदगी से कोई रिस्क नहीं. लोगों का सिर पर छठ के प्रसाद की टोकरी, नारियल, सूप, दउरा, केले का घौद लेकर आना अनवरत जारी है. गाड़ियों से आने वाले लोग भी छठ घाट पर सक्रिय कार्यकर्ताओं के निर्देश के बाद गाड़ी निर्दिष्ट जगह पर पार्क करने के बाद सिर पर टोकरी लेकर घाट पर अपने लिए जगह तलाशने की जुगत में हैं.

मैं गर्दनीबाग रोड नंबर 10 पंचमंदिर, कच्ची तालाब और माणिकचंद तालाब अनीसाबाद, पटना जैविक उद्यान और लालू प्रसाद जी और नीतीश जी के आवास के बाहर का चक्कर लगाकर देख आया हूं. यहां रोशनी अंदर की गहमागहमी की कहानी बयां कर रही है. दूसरी जगहों पर छठ समिति से जुड़े कार्यकर्ता और प्रशासन के लोग मुस्तैद हैं. गंगानदी में अर्घ्य देने जाने वाले लोग भी करीब तीन बजे रात को ही निकल चुके हैं. उनकी गाड़ी लगातार निकल रही है. इन्हें सड़क जाम होने का डर सता रहा है इसलिए रिस्क नहीं लेना चाहते हैं. थोड़ा पहले निकलना ज्यादा सुरक्षित है.

दीदारगंज से लेकर दीघाघाट तक छठ मनाने के लिए जाने वाले लोग हैं. कुछ लोग हाजीपुर की ओर भी जा रहे हैं. गंगा नदी जाने वालों की कोई कमी नहीं है, लेकिन अब स्थानीय तालाबों पर भी खूब रौनक नजर आ रही है. दरअसल यहां व्यवस्था पूरी तरह से टनाटन है. अलग—अलग सोसाइटी में देख रहा हूं कि छत पर बड़ा—सा टैंक बना है. केले के पेड़ और आम के पत्ते से टैंक को सजाया गया है, चारो ओर से. झिलमिल रोशनी से जगमगा रहा है पूरा छत.

सोसाइटी से अलग भी दूसरे छतों पर भी ऐसी व्यवस्था ही देख रहा हूं. छत पर पटाखे छोड़े जा रहे हैं. अनार और फूलझड़ी भी खूब रोशनी बिखेर रहे हैं. लेकिन तालाबों के इर्दगिर्द इसकी पूरी मनाही है और पूरी सख्ती से मनाही है. स्पीकर पर कार्यकर्ता पटाखा छोड़ने से मना कर रहे हैं और कानूनी कार्रवाई व जुर्माने की चेतावनी दे रहे हैं. लोग पटाखे नहीं छोड़ रहे लेकिन फिर भी कुछ शरारती बच्चे थोड़ी दूरी पर जाकर पटाखे चला रहे हैं.

घाट पर आने वाले व्रतियों को समिति की ओर से मुफ्त में अगरबत्ती, धूप, फूल और दूध उपलब्ध कराए जा रहे हैं. आस्था और भक्तिभाव चरमोत्कर्ष को छू रहा है. भावनाएं उमड़ रही हैं. अलग—अलग समूहों में महिलाएं छठ के गीत गा रही हैं. कोरस में. ‘मारबउ रे सुगवा धनुष से सुगवा गिरे मुरूछाय…’ ‘पटना के घाट पर उगेलन सुरूज मल….’ लाउडस्पीकर पर घोषणा होती है. सूर्योदय का समय 5.57 बजकर मिनट पर है. पांच मिनट बाकी हैं. व्रती और साथ में आए घर के लोग अलर्ट मोड में आ जाते हैं. करवद्ध खड़े व्रतियों की हाथों में प्रसाद की टोकरी एवं अन्य सामग्रियां थमायी जा रही है. साथ आए लोगों ने दूध या गंगा जल से अर्घ्य देना शुरू कर दिया है.

मोबाइल फोन के कैमरे चमक रहे हैं. यंग जेनरेशन सेल्फी लेने का कोई मौका चूकना नहीं चाहता. सोशल मीडिया पर दनादन फोटो शेयर किया जा रहा है. देर से घाट पर पहुंचने वालों के चेहरे पर जगह तलाशने की हड़बड़ी और परेशानी साफ दिखाई दे रही है. किसी तरह एडजस्ट कर लेने की जुगत में वो पहचान वाले चेहरों की तलाश में हैं. कहीं कोई दिखाई दे जाए. जिन्हें जगह मिल गई है वो पूजा शुरू कर चुके हैं और जिन्हें जगह नहीं मिली है वे भी किसी तरह पूजा शुरू कर देने की कोशिश में हैं.

Pix : different sources of web

सूर्य की लालिमा खत्म हो चुकी है और रोशनी धीरे धीरे अंधकार को पूरी तरह खत्म कर चुका है. अब सबकुछ स्पष्ट दृष्टिगोचर है. कुछ लोगों की पूजा समाप्त हो चुकी है. वे अपने साजो सामान कपड़ों में बांध रहे हैं. प्रसाद का वितरण और ग्रहण दोनों चल रहा है. लोग धीरे धीरे घरों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं. व्रतियों के लिए फ्री शर्बत और चाय का वितरण हो रहा था. व्रतियों से ज्यादा एसोसिएट्स इसका मजा ले रहे हैं. किसी को कोई रोक टोक नहीं है. सब बांटने के लिए ही है.

अब चाट और गोलगप्पों के खोमचे पर भी लोग रूक रहे हैं. पूजा समिति की ओर से यथासंभव दान देते जाने की अपील लगातार की जा रही है. कुछ लोग दे रहे हैं और कुछ लोग बच निकलने की कोशिश में शॉर्टकर्ट ले रहे हैं. छठ पूजा समिति के लोगों की सक्रियता अब ज्यादा दिखाई दे रही है. बच्चे बैलून और आइसक्रीम के लिए मचल रहे हैं.

” हर्रर्रर्र…..साल की भांति इस साल भी छठ पूजा समिति आपका स्वागत करता है, करता था और करता ही रहेगा…. छठ का प्रसाद देते जाइए…ऐ ठेला वाला भाई जी, ठेला आगे बढाइए….कोई जाम मत लगाइए…बढ़ते रहिए…बढ़ते रहिए…एक बच्चा खो गया है जो अपना नाम…..ऐ भाई जी….आगे बढ़िए….हर्रर्रर्र साल की भांति…..”

उद्घोषणा जारी है. लोग अपनी धुन में हैं. घर लौटने की जल्दीबाजी है. नववधुएं एवं अन्य सुहागिनें दूर से ही पहचान में आ रही हैं. नाक पर से सिंदूर, पैर में अलता, पायल की छनछन की आवाज और अंचरा या आंचल जिसे यहां खोंयछा भी कहा जाता है, में आशीर्वाद के रूप में भगवान का प्रसाद है. घर जाने की सबको जल्दीबाजी है. व्रती जिसे यहां परवैतिन भी कहते हैं घर जाकर पारन करेंगी. 36 घंटे का उपवास खत्म होगा. एक महापर्व संपन्न हो जाने की निश्चिंतता सबके चेहरे पर है. थकान भी चेहरे पर पढ़ा जा सकता है.

घाट पर लोगों ने प्रसाद पा लिया है. अब घर पर नारियल छीलने की तैयारी होगी. लोग गन्ना चूसेंगे. अपने इष्ट मित्रों, सगे संबंधियों को प्रसाद भेजेंगे. पिछले चार दिनों से चल रहा अनुष्ठान और सप्ताह भर से चल रही गहमागहमी को विराम लग गया है. लाउडस्पीकर का शोर थम चुका है. चारो ओर कचरा बिखरा पड़ा है. छठ पर्व के लिए की गई सारी साफ—सफाई अब इतिहास बन चुका है. सड़क पर केले के छिलके भी हैं, चाय पीकर फेंकी गई प्यालियां भी हैं. अब अगले साल तक का इंतजार है. फिर छठ की तैयारी शुरू होगी. पूरे जोशोखरोश के साथ.बोलो छठी मईया की जय…. सुरूज देव की जय…

और हां आज शुक्रवार है, खस्सी मुर्गा मछली के दुकान पर भी कुछ कम भीड़ न होगी आज. कुछ वर्जित नहीं है आज.

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