तरकारी से सरकारी : आलोक मेहता बन सकते हैं राजद के प्रदेश अध्यक्ष

लाइव सिटीज डेस्क : बिहार की सियासत तेजी से कुशवाहा की राजनीति की ओर बढ़ रही है. केंद्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा को लेकर बिहार में महागठबंधन की नई इबारत लिखने को तैयार राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद अब कुशवाहा बिरादरी को केंद्रित करने में जुटते नजर आ रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इसी कड़ी में उन्होंने अब राजद के प्रदेश अध्यक्ष की कमान कुशवाहा बिरादरी से आनेवाले आलोक मेहता को सौंपने का मन बनाया है. इसके संकेत भी मिलने लगे हैं.

यदि आलोक मेहता ने राजद की कमान संभाल ली और एनडीए को झटका देकर उपेंद्र कुशवाहा बिहार के महागठबंधन की राजनीति में आ जाते हैं तो बेशक बिहार की सियासत में यह किसी भूचाल से कम नहीं होगा. खासकर बिहार में एनडीए और नीतीश सरकार के लिए यह राजनीतिक तूफान साबित हो सकता है. जिस तरह उपेंद्र कुशवाहा को एनडीए हाशिये पर ला रहा है, इससे इसके संकेत भी मिलने लगे हैं.

मीडिया में आ रही खबर के अनुसार लालू प्रसाद हर हाल में नीतीश कुमार को बिहार की सियासत में पटकनी देना चाहते हैं. इसी कड़ी में महागठबंधन में शामिल करने के लिए वे उपेंद्र कुशवाहा के साथ रणनीति बना रहे हैं. लाइव सिटीज ने उपेंद्र कुशवाहा और लालू प्रसाद से मिलने की बात प्रमुखता से छापा था. बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा की ओर से इसका अब तक खंडन नहीं किया गया है.

वहीं कुशवाहा की पार्टी रालोसपा के वरीय नेता भी संकेत दे रहे हैं कि वे सब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पटकनी देने के लिए कुछ भी कर सकते हैं. रालोसपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागमणि ने अपने फेसबुक पोस्ट पर एक पोस्टर लगा कर बिना कुछ कमेंट किये ही बहुत कुछ कह दिया था. पोस्टर में नागमणि जहां खुद ‘चाणक्य’ बन गये हैं. वहीं उपेंद्र कुशवाहा को ‘सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य’ और नीतीश कुमार को ‘धनानंद’ बना दिया गया है. इतिहास भी चीख-चीख कर कह रहा है कि चंद्रगुप्त ने चाणक्य के सहयोग से धनानंद को सत्ता से बाहर कर दिया था. पोस्टर का संदेश देखें तो ऐसी ही कुछ रणनीति बनाने में लगे हैं रालोसपा के दिग्गज सितारे.

राजनीतिक गलियारों में अब नये घटनाक्रम में जो बात छन कर आ रही है, उससे लगता है कि राजद भी अब पूरी तरह तैयार है. रालोसपा का मानना है कि बिहार में उपेंद्र कुशवाहा को सीएम कैंडिडेट बना दिया जाये. वहीं मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो लालू प्रसाद भी अंदर ही अंदर इसके लिए तैयार हैं. उन्हें भी तेजस्वी को सीएम बनाने की हड़बड़ी नहीं है. उनका एक ही टार्गेट है कि नीतीश कुमार को किसी तरह पटकनी दी जाये. बताया जाता है कि इसकी की दूसरी कड़ी हैं आलोक मेहता. अब आलोक मेहता को प्रदेश राजद की कमान देने की रणनीति तैयार की जा रही है.

कुशवाहा बिरादरी के अंदर झांके तो उपेंद्र कुशवाहा की तरह अपने इलाके में आलोक मेहता के पास भी आधार वोट बैंक है. वहीं तेजस्वी यादव की युवा टीम में आलोक मेहता सबसे अनुभवी सदस्य माने जाते हैं. वे लालू प्रसाद के भी काफी विश्वासी भी हैं. यदि सोची-समझी रणनीति के तहत मामला आगे बढ़ा तो मिशन 2019 में महागठबंधन एक बार फिर मजबूत स्थिति में होगा. राजद के पास यादव के अलावा कुशवाहा का भी मजबूत वोट बैंक मिलेगा. हालांकि शिवचंद्र राम का भी नाम प्रदेश अध्यक्ष में आ रहा है लेकिन मेहता का पलड़ा भारी नजर आ रहा है.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कुशवाहा बिरादरी भी अब बिहार में ‘तरकारी’ बन कर रहना नहीं चाहती है. वह भी सत्ता में सीधा इंट्री मारना चाहती है. इसके लिए वह बिहार की सत्ता में उपेंद्र कुशवाहा के माध्यम से कब्जा जमाना चाहती है. संकेत मानें तो राजद भी इस क्षण को छोड़ना नहीं चाहता है. लालू प्रसाद ने भी मन बना लिया है कि उपेंद्र कुशवाहा के माध्यम से नीतीश कुमार को बिहार में पटकनी दी जा सकती है. हालांकि अंतिम क्षण में क्या होगा कोई भी पार्टी पटल पर अपना पत्ता खोलने के मूड में नहीं है. सब गुजरात चुनाव को बैरोमीटर के रूप में देख रहा है.

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