गोवर्धन पूजा : आज देश भर में परंपरागत ढंग से मनाया जा रहा गोवर्धन पर्व

लाइव सिटीज डेस्कः दिवाली के अगले दिन मनाए जाने वाले गोवर्धन त्योहार को अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा कर ब्रजवासियों की भारी बारिश से रक्षा की थी. ऐसा करके श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को भी चूर-चूर किया था. गोवर्धन पूजा का श्रेष्ठ समय प्रदोष काल में माना गया है. इस दिन मंदिरों में कई तरह के खाने-पीने के प्रसाद बनाकर भगवान को 56 भोग लगाए जाते हैं. इस दिन खरीफ फसलों से प्राप्त अनाज के पकवान और सब्जियां बनाकर भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है.

इस पर्व के दिन शाम के समय खास पूजा रखी जाती है. इस दिन मंदिरों में अन्नकूट किया जाता है. इस दिन गोबर का गोबर्धन बनाया जाता है. इसका खास महत्व होता है. इस दिन सुबह-सुबह गाय के गोबर से गोबर्धन बनाया जाता है. यह मनुष्य के आकार के होते हैं. गोबर्धन तैयार करने के बाद उसे फूलों और पेड़ों का डालियों से सजाया जाता है. गोबर्धन को तैयार कर शाम के समय इसकी पूजा की जाती है. पूजा में धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल, खील, बताशे आदि का इस्तेमाल किया जाता है. गोवर्धन में ओंगा यानि अपामार्ग की डालियां जरूर रखी जाती हैं.

गोवर्धन पूजा का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपाद तिथि को मनाया जाता है. इस दिन सुबह शरीर पर तेल की मालिश करके स्नान करना चाहिए. फिर घर के द्वार पर गोबर से प्रतीकात्मक गोवर्धन पर्वत बनाएं. इस पर्वत के बीच में पास में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति रख दें. अब गोवर्धन पर्वत और श्री कृष्ण को विधिन्न प्रकार के पकवानों व मिष्ठानों का भोग लगाएं. साथ ही देवराज इंद्र, वरुण, अग्नि और राजा बलि की भी पूजा करें. पूजा के बाद कथा सुनें. प्रसाद के लिए दही और चीनी का मिश्रण बनाएं और सब में बांटे. इसके बाद ब्राह्मण को भोजन करवाकर उसे दान-दक्षिणा दें.

पूजा मुहूर्त
सुबह का मुहूर्त- सुबह 06:28 बजे से 08:43 बजे तक
शाम का मुहूर्त – 03:27 बजे से सायं 05:42 बजे तक
प्रतिपदा – रात 00:41 बजे से शुरू (20 अक्टूबर 2017)
प्रतिपदा तिथि समाप्त – रात्रि 1:37 बजे तक (21 अक्तूबर 2017)

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*