चेन्नई में भारी बारिश : अलर्ट मोड में प्रशासन, चरमराई शहर की व्यवस्था

लाइव सिटीज डेस्क : तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में रविवार रात शुरू हुई बारिश लगातार हो रही है. बारिश की वजह से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है. बारिश से चेन्नई में 2 साल बाद फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. सोमवार को चेन्नई में 35 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं. मौसम विभाग ने अगले चार से पांच दिन तक भारी बारिश की भविष्यवाणी की है. इसे देखते हुए सरकार और प्रशासन अलर्ट पर है.

डीएमके की नेता कनिमोझी ने तस्वीरें शेयर करते हुए बाढ़ की स्थिति से अवगत कराया. डीएमके नेता ने ट्वीट कर कहा कि ”अथीपट्टु पुडुनगर पानी में, जबकि अभी तो मॉनसून की शुरुआत है.” कनिमोझी ने न सिर्फ बदतर होते हालात की तस्वीर पेश की, बल्कि राज्य सरकार की व्यवस्था पर तंज भी कसा. कनिमोझी अथीपट्टु पुडुनगर की तस्वीरें शेयर की. यह चेन्नई का ही एक इलाका है. खबरों के अनुसार इसके अलावा कई इलाकों में घरों में पानी घुस गया है.

आपकों बता दें कि लगातार हो रही बारिश से एक बार फिर 2015 के बाद चेन्नई पर भयंकर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. तमिलनाडु सरकार ने मौसम विभाग की चेतावनी के बाद चेन्नई, तिरुवल्लुर, कांचीपुरम जिलों में स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने का आदेश दिया है. मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक भारी बारिश की आशंका व्यक्त की है.

शि‍क्षण संस्थानों को बंद करने का आदेश एजुकेशन डिपार्टमेंट ने मौसम विभाग की उस सूचना के बाद लिया, जिसमें कहा गया है कि शुक्रवार से पहले बारिश रुकने की संभावना कम है. चेन्नई के कई इलाकों में भारी बारिश से वॉटर लॉगिंग हो गई है. इससे ट्रैफिक काफी धीमी रफ्तार से चल रहा है. चेन्नई कॉरपोरेशन ने बाढ़ की दृष्ट‍ि से 300 निचले इलाकों की पहचान की है. खतरा होने पर यहां से लोगों को निकालने की कोशिश की जाएगी. 175 रिलीफ सेंटर भी बनाए गए हैं.

साइकलोन वॉर्निंग सेंटर के डायरेक्टर एस बालाचंद्रन ने बताया कि इस बार भी श्रीलंका के पास ही साइकलोन बन रहा है. इससे तमिलनाडु के तटीय इलाकों में भारी बारिश की आशंका उत्पन्न हो गई है. हालांकि मौसम विभाग का आंतरिक इलाकों में औसत बारिश का अनुमान है.

आपको बता दें कि दिसंबर 2015 में भी चेन्नई में भारी बारिश हुई थी. उस दौरान तमिलनाडु में 200 से अधि‍क लोगों की मौत हो गई थी. दिसंबर 2015 में भी चेन्नई में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से चार लाख से ज्‍यादा लोगों को घर छोड़ कर राहत शिविरों में रहना पड़ा था. 20 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा के नुकसान की आशंका व्यक्त की गई थी.

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