कभी हाथ को पीठ पर बांधकर प्रैक्टिस करती थीं मिताली

लाइव सिटीज डेस्क : भारतीय महिला टीम की कप्तान और वन-डे क्रिकेट में सबसे अधिक रन (6 हजार रन) बनाने वाली महिला क्रिकेटर मिताली राज को डांसर से क्रिकेटर बनने में बहुत मेहनत करनी पड़ी है. भाई और पिता के साथ सेंट जॉन्स क्रिकेट एकेडमी के ग्राउंड पर जाना था. आंखों में नींद और मन में भरतनाट्यम. पिता को लगता था कि देर तक सोने से बेहतर है कि भाई के साथ सुबह उठकर क्रिकेट कोचिंग करे ताकि आलस दूर हो.

मिताली के कोच उसे पत्थर से प्रैक्टिस कराते थे. चोट लगने पर एक हाथ को पीठ पर बांधकर दूसरे से प्रैक्टिस करती थीं. मिताली के पिता दोराई राज बताते हैं “वह बिना किसी उत्साह के बॉल वापस फेंक देती थी. बोर होती तो किसी को खाली देखकर कहती कि बॉल फेंको तो मैं शॉट मारूं. ऐसे ही आधे मन से वह शॉट मार रही थी, लेकिन दूर खड़े एकेडमी के कोच ज्योति प्रसाद उसे देख रहे थे. देखा कि वह बहुत ही सहज तरह से बॉल को स्ट्रेट हिट कर रही है. उन्होंने कहा कि बच्ची में गजब का टैलेंट है, उसे संपथ कुमार नायडू से कोचिंग दिलवाइए.”

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मिताली के पिता कहते “जब वह वापस आएगी तो उसे डायमंड की ज्वैलरी गिफ्ट करेंगे. पढ़ने की शौकीन मिताली के पास 500 से अधिक किताबों की लाइब्रेरी है.”

संयोग से क्रिकेटर बनी
दोराई के मुताबिक, “मिताली क्रिकेट में तो संयोग से आई. पहले जब हम उसे सुबह जल्दी उठाते थे तो वह रोती थी, लेकिन बाद में उसने बहुत मेहनत की. संपथ भी बहुत कड़क और मुश्किल कोच थे.” मिताली की प्रैक्टिस के दौरान कई बार वे उसे एक स्टंप से बल्लेबाजी करने के लिए कहते थे और बॉल मिस होने पर खूब डांट पड़ती थी. वो लड़कों के साथ भी प्रैक्टिस करती थी और वे तेज गेंद डालते थे. कैच प्रैक्टिस करते समय यदि मिताली जरा भी लापरवाही करती थी तो संपथ उसे पत्थर से कैच प्रैक्टिस करवाते थे.”

“यदि उसके हाथ में पत्थर से चोट भी लग जाती थी तो उसे पीठ पर बांधकर दूसरे हाथ से प्रैक्टिस पूरी करवाई जाती थी. ग्राउंड में पानी का टैंक था, वहीं पक्की जगह थी उसी सीमेंट पिच पर मिताली बैटिंग की प्रैक्टिस करती थी.” दोराई बताते हैं कि उसकी प्रैक्टिस के दौरान मैं खुद कई बार फील्डिंग करता था.

बेटी के लिए मां ने छोड़ी जॉब
वो कहते हैं कि मिताली की मां लीलाराज भी एक निजी कंपनी में नौकरी करती थीं, इसलिए हम उसे ज्यादा समय नहीं दे पाते थे. ऐसे में कोच की सलाह पर मिताली की मां ने अपनी जॉब छोड़ दी थी. दोराईराज कहते हैं कि प्रैक्टिस करने के दो साल के अंदर ही मिताली ने अंडर-17, अंडर-19 और आंध्र प्रदेश की सीनियर टीम के लिए खेलना शुरू किया, तब पहली बार लगा कि यह इंटरनेशनल लेवल पर बेहतर खेलेगी. बता दें कि मिताली के पिता दोराईराज भी अपनी सर्विस के दौरान एयरफोर्स और आंध्रा बैंक से खेल चुके हैं.

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