शहाबुद्दीन-प्रभुनाथ-दिलीप को जेल में ठेलने वाले IPS भट्टी अभी बिहार नहीं आयेंगे

पटनाः बिहार कैडर के बेहद आक्रामक आईपीएस अधिकारी माने जाने वाले राजविंदर सिंह भट्टी के बिहार लौटने की चर्चाओं पर अब विराम लग गया है . भट्टी अभी सेंट्रल डेपुटेशन पर केन्‍द्रीय जांच ब्‍यूरों में ज्‍वाइंट डायरेक्‍टर के पद पर तैनात हैं . उनके सेंट्रल डेपुटेशन की दूसरी पारी का कार्यकाल अभी खत्‍म होने वाला था . ऐसे में,पिछले कुछेक महीने से बिहार में बड़ी चर्चा थी कि वे बिहार लौट रहे हैं . बिहार सरकार भी ख्‍वाहिशमंद थी .

भट्टी बिहार के अपने कैडर में अपर पुलिस महानिदेशक स्‍तर (एडीजी) के अधिकारी हैं . कहा जाने लगा था कि बिहार रिटर्न के साथ ही उन्‍हें पुलिस हेडक्‍वार्टर में बड़ी जिम्‍मेवारी मिलेगी . लेकिन अब यह कंफर्म हो गया है कि वे अभी बिहार नहीं लौट रहे हैं . बिहार के डीजीपी पी के ठाकुर ने बताया है कि भट्टी के सेंट्रल डेपुटेशन को केन्‍द्र सरकार ने अवधि विस्‍तार दे दिया है . ऐसे में,वे अभी बिहार नहीं लौट सकेंगे .

आर एस भट्टी का नाम बिहार के अंडरवर्ल्‍ड में खौफ का दूसरा नाम रहा है . 1990 बैच के इस आईपीएस अधिकारी ने एएसपी के तौर पर अपने पहले पदस्‍थापना काल से ही अपराधियों के खिलाफ बेहद तीखे ऑपरेशन के कारण सुर्खियां बटोरनी शुरु कर दी थी . जब वे बाढ़ में एएसपी थे,तब पटना आकर राजद के बाहुबली विधायक दिलीप कुमार सिंह (अनंत सिंह के बड़े भाई) को अहले सुबह गिरफ्तार कर लिया था . हैरत की बात थी कि बिहार विधान सभा का सत्र चल रहा था और रेड की खबर गिरफ्तारी हो जाने तक पटना के तत्‍कालीन एसएसपी को भी नहीं लगी थी .

बाद में भट्टी को एसपी बना मधुबनी भेजा गया . आनंद मोहन के आंदोलन के कारण मधुबनी में टेंशन पैदा था . भट्टी ने पहुंचते ही मधुबनी के सभी कल-पुर्जे टाइट कर दिए थे . फिर पटना के एसपी (सिटी) बने . यह वह दौर था,जब पटना में एसएसपी को नहीं लोग एसपी (सिटी) को ही जानते थे . बहके अपराधियों के बीच तब भट्टी की ‘लाल डायरी’ का टेरर था . कहा जाने लगा था कि जिसका नाम इस डायरी में लिख गया,उसका काम तमाम हो गया .

उस दौर में न जाने कितने अपराधी कैसे गायब हो गए थे,जिनका पता आज तक किसी को नहीं चला . विधायक अशोक सिंह मर्डर केस के मेन एक्‍यूज्‍ड बने दबंग पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के लिए भट्टी ने ऐसी मुश्किल खड़ी कर दी थी कि उन्‍हें बहुत छुपते-छुपाते छुट्टी के दिन जज के घर में जाकर सरेंडर करना पड़ा था . उसी वक्‍त की लिखा-पढ़ी है,जिसके कारण आज प्रभुनाथ सिंह को कोर्ट से सजा हो गई है .

फिर भट्टी ने जहानाबाद में रणवीर सेना से पहल मुठभेड़ की,कई मारे गये . आगे लालू प्रसाद ने गोपालगंज भेजा . तब लालू प्रसाद के ससुराल वाले ही तबाह हो गये थे . पूर्णिया में अजीत सरकार की हत्‍या के बाद बहुत बिगड़े हालात को संभालने के लिए लालू प्रसाद हवाई जहाज में भट्टी को साथ लेकर पूर्णिया में लैंड किए थे . आगे वे सेंट्रल डेपुटेशन में सीबीआई में चले गये थे .

आगे चुनाव के वक्‍त केन्‍द्र से रिलीव कराकर तब चुनाव आयोग वाले बिहार स्‍पेशल ऑब्‍जर्वर के जे राव इन्‍हें बिहार लेकर आए . टास्‍क सबसे कड़े सिवान का मिला . अब तक सिवान में हुआ यह था कि बच्‍चू सिंह मीना-सी के अनिल-रतन संजय ने अपने कार्यकाल में बाहुबली शहाबुद्दीन के खिलाफ आपरेशन तो बहुत चलाया था,लेकिन जेल के भीतर ठेल नहीं पाये थे . परिणाम,बाहर खौफ बरकरार था . के जे राव ने भट्टी के लिए सिवान में एसपी के पोस्‍ट को अपग्रेड कर डीआईजी का स्‍पेशल पोस्‍ट क्रिएट कराया और भट्टी की तैनाती कराई . कोई एसपी नहीं,सिवान की कमान सीधे भट्टी के हाथों .

परिणाम यह निकला कि किसी को भनक तक नहीं लगी और तय समय से भी कम अवधि में भट्टी की स्‍पेशल टीम ने नई दिल्‍ली में सुबह-सुबह शहाबुद्दीन को अरेस्‍ट कर लिया . दिल्‍ली पुलिस ने बेहिचक गिरफ्तारी की पूरी क्रेडिट बिहार से दिल्‍ली गई भट्टी की स्‍पेशल टीम को प्रदान किया . तब सिवान की एसआई गौरी कुमारी भी देश भर में सुर्खियों में आ गई थी,क्‍योंकि भट्टी फार्मूले के तहत दिल्‍ली में शहाबुद्दीन का पीछा यह महिला अधिकारी कर रही थी . आगे शहाबुद्दीन सभी चुनाव हारते चले गये और अब भी जेल से मुक्ति नहीं मिली है .

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