भारत के 12 प्रसिद्ध मंदिरों में एक है पटना का उलार सूर्य मंदिर

बिहटा/पटना (मृत्युंजय कुमार) : भारत के 12 प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों में से एक है पटना का उलार सूर्य मंदिर. द्वापरयुग में जहां राजा शाम्ब को मिली थी कुष्ट रोग से मुक्ति. भगवान भास्कर का यह मंदिर दुल्हिन बाजार प्रखंड मुख्यालय से पांच किलोमीटर दक्षिण पटना-औरंगाबाद मुख्य मार्ग के बगल में स्थित है. देश में कोणार्क (उड़ीसा), देवार्क (बिहार का देव) के साथ यह ओलार्क (अब उलार) सबसे बड़े तीसरे सूर्य आर्क स्थल के रूप में जाना जाता है.

प्रत्येक रविवार को काफी संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान कर सूर्य को जल व दूध अर्पित करते हैं. चैत और कार्तिक में छठ पर यहां लाखों की भीड़ जुटती है. लोक कथाओं के अनुसार जो नि:संतान सच्चे मन से इनकी उपासना करते हैं उन्हें संतान की प्राप्ति होती है. पुत्र प्राप्ति के बाद मां के आंचल पर नटुआ व जाट-जटिन की नृत्य करवाने की परंपरा है.

प्रचलित कथा के अनुसार द्वापर काल में राजा शाम्ब क्रोधित होकर ऋषि गर्ग ने श्राप दे दिया था. भगवान श्री कृष्ण के प्रयास से नारद जी ने श्रापमुक्ति के लिए उन्हें उपाय बताया. शाम्भ ने घोर तपस्या कर सूर्य को प्रसन्न किया. एक ही रात में उसने देश में 12 स्थानों पर ओलार्क, लोलार्क, औंगार्क, देवार्क, कोर्णाक आदि सूर्य मंदिर बनवाए. वे एक माह तक तालाब में स्नान कर भगवान भास्कर की पूजा-आराधना की और कुष्ट रोग से मुक्ति पायी.

मुगलकाल में इस मंदिर को भी ध्वस्त कर दिया गया था. 1950-54 में संत अलबेला बाबा ने जन सहयोग से इसका जीर्णोंद्धार कराया. यहां खुदाई में मिली काले पत्थर की पाषाणकालीन की कई खंडित मूर्तियां हैं. यह मंदिर मूर्तिकला, वास्तुकला एवं कल्पना नमूना है. महंथ अबध बिहारी दास ने बताया कि इस बार भी यंहा लाखों छठ व्रतियों को पहुंचने की संभावना है. प्रशासन और स्थानीय लोगों की मदद से यंहा साफ-सफाई की जा रही है.

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