AIIMS ने बना लिया है Pocket वेंटीलेटर, अब अस्पताल में एडमिट होने की जरूरत नहीं

लाइव सिटीज डेस्कः जिन मरीजों को वेंटीलेटर पर अधिक समय तक रखने की जरूरत होती है, उनके लिए अच्छी खबर है. फेफड़ों की खराबी के चलते सांस लेने में होने वाली परेशानी के लिए अब हॉस्पिटल में वेंटीलेटर पर रहने की जरूरत नहीं होगी. एम्स ने एक निजी कंपनी के साथ मिलकर एक पोर्टेबल वेंटीलेटर विकसित किया है. यह वेंटीलेटर इतना छोटा है कि इसे पॉकेट में भी रखा जा सकता है. साथ ही यह बहुत किफायती है.

पहले महीनों तक हॉस्पिटल में वेंटीलेटर पर रहना होता था. कभी-कभी तो वेंटीलेटर के लिए नंबर भी लगाना होता था. अब न तो वेंटीलेटर के लिए नंबर लगाना होगा और न ही वेंटीलेटर के लिए महीनों तक हॉस्पिटल में रहना होगा. एम्स के डॉक्टरों और आईआईटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक पॉकेट वेंटीलेटर बनाया है.

वेंटीलेटर वायुमंडल में मौजूद हवा से चलने में सक्षम है और इसके लिए अलग से ऑक्सीजन की आपूर्ति की आवश्यकता नहीं है. इसे एन्ड्रॉयड एप्प के जरिये संचालित किया जा सकता है. एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि ये वेंटीलेटर खासतौर पर उन मरीजों के लिए फायदेमंद रहेगा जो सिर्फ सांस लेने में तकलीफ होने के चलते ही महीनों तक हॉस्पिटल में वेंटीलेटर पर रहते हैं.

जल्द ही ये पॉकेट वेंटीलेटर बाजार में मरीजों के लिए आ जाएगा. लेकिन इसके लिए ये जरूरी होगा कि एक बार इसे लगवाने के लिए टेकनीशियन की जरूरत होगी. वो एक नली मरीज के मुंह से निकालकर मशीन से जोड़ेंगे और एक तार भी होगा जो बिजली सप्लाई करेगा.

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