प्रद्युम्न की हत्या पर प्रसून जोशी ने शेयर की भावुक कर देने वाली कविता

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लाइव सिटीज डेस्क : गुरुग्राम के रयान इंटरनेशनल स्कूल में एक बच्चे की हत्या ने देश भर में सनसनी फैला दी है. मासूम प्रद्युमन की हत्या से हर कोई स्तब्ध है. इस मर्डर ने ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हम अपने बच्चों को कहां सुरक्षित मानें. देश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जोरदार बहस छिड़ी है. नये उपाय सुझाये जा रहे हैं और कड़ी सजा की पैरवी की जा रही है.

सोशल मीडिया पर हर कोई बच्चों की सुरक्षा को लेकर अपने दिल की बात लिख रहा है. लोगों अपने-अपने तरीके से अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहे हैं. इस बीच गीतकार प्रसून जोशी ने भी दिल दहला देने वाली इस घटना पर एक कविता लिखी है. और समाज को जगाने की कोशिश की है. फिल्म तारें जमीं पर में बेहद प्यारे और मासूमियत भरे गीत लिखने वाले प्रसून जोशी की यह कविता आप भी पढ़िये. प्रसून जोशी ने अपनी यह कविता फेसबुक पर शेयर की है.

जब बचपन तुम्हारी गोद में आने से कतराने लगे,
जब माँ की कोख से झाँकती ज़िन्दगी,
बाहर आने से घबराने लगे,
समझो कुछ ग़लत है.
जब तलवारें फूलों पर ज़ोर आज़माने लगें,
जब मासूम आँखों में ख़ौफ़ नज़र आने लगे,
समझो कुछ ग़लत है 
जब ओस की बूँदों को हथेलियों पे नहीं,
हथियारों की नोंक पर थमना हो,
जब नन्हें-नन्हें तलुवों को आग से गुज़रना हो,
समझो कुछ ग़लत है
जब किलकारियाँ सहम जायें
जब तोतली बोलियाँ ख़ामोश हो जाएँ
समझो कुछ ग़लत है
कुछ नहीं बहुत कुछ ग़लत है
क्योंकि ज़ोर से बारिश होनी चाहिये थी
पूरी दुनिया में
हर जगह टपकने चाहिये थे आँसू
रोना चाहिये था ऊपरवाले को
आसमान से 
फूट-फूट कर
शर्म से झुकनी चाहिये थीं इंसानी सभ्यता की गर्दनें
शोक नहीं सोच का वक़्त है
मातम नहीं सवालों का वक़्त है.
अगर इसके बाद भी सर उठा कर खड़ा हो सकता है इंसान
तो समझो कुछ ग़लत है. 

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