बेमिसाल : श्रावणी मेले में रुखसार बहा रही हैं मिल्लत की बयार

लाइव सिटीज डेस्क : अगर मन में सेवा भाव हो तो मजहब राह में आड़े नहीं आता है. सेवा करनेवाले समाज के लोगों के लिए समय भी निकाल लेते हैं. कुछ ऐसा ही दिख रहा है विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में. मजहब की बाधाओं से दूर रुखसार जबीं सांप्रदायिकता की मिसाल बनी हुई हैं. रुखसार के इस नेक काम की चर्चा प्रशासनिक महकमे में ही नहीं, पूरा कांवरिया पथ पर हो रही है.

दरअसल विश्वप्रसिद्ध कांवरिया मेला प्रारंभ हो चुका है. बिहार के सुल्तानगंज से लेेकर झारखंड के देवघर तक 108 किमी लंबे इस मेले में सेवा करनेवालों की वैसे तो कमी नहीं हैं. लेकिन, रुखसार जबीं सांप्रदायिक एकता की मिसाल पेश कर रही हैं. वे मुंगेर जिले के तारापुर में श्रावणी मेला पथ से गुजरने वाले कांवरियों को मदद करती हैं. उन्हें राह दिखाती हैं, ताकि वे भटके नहीं.

बता देें कि पूरा सावन माह गंगाधाम (सुल्तानगंज) से बाबाधाम (देवघर) तक कांवरियों का मेला लगा रहता है. इस माह में देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से कांवरिया बिहार के भागलपुर जिले में अवस्थित सुल्तानगंज आते हैं. यहां से उत्तरवाहिनी गंगा का जल भर झारखंड के देवघर स्थित बाबा भोलेनाथ पर चढ़ाते हैं. आम कांवरिया तो तीन से चार दिनों में पैदल 108 किमी की यात्रा तय करते हैं, जबकि डाक बम महज 18 से 24 घंटे में अपनी यात्रा तय करते हैं. दरअसल डाक बम को रास्ते में कहीं रुकना नहीं होता है.

इसी विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले में रुखसार जबीं सांप्रदायिक सद्भाव की बयार बहाने में लगी हैं. कांवरिया पथ पर अवस्थित तारापुर के गाजीपुर की रहनेवाली रुखसार कांवरियों की सेवा में लगी रहती हैं. यही नहीं, वे अन्य मुस्लिम महिलाओं को भी इस नेक काम के लिए प्रेरित करती हैं और उनसे मदद लेती हैं. पेशे से रुखसार जबीं तालीमी मरकज हैं. वे शिक्षण कार्य से जुड़ी हुई हैं.

रुखसार जबीं अपनी महिला साथियों मज़हबी परवीन, सोफिया खातून, हलीमा खातून, इशरत बानो के साथ मिल कर पिछले कई वर्षों से कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं की सेवा में लगी हुई हैं. हर सावन में वे देश के विभिन्न राज्यों से आये कांवरियों को रास्ता बताने का काम करती हैं. उन्हें शौचालय, विश्रामालय की जानकारी देती हैं. इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर बाजार से आवश्यक सामानों को मुहैया भी कराती हैं. इसके लिए वे निकट के सरकारी धर्मशाला पहुंच जाती हैं. इसके अलावा शिविरों में पहुंच कर वहां के वॉलेंटियर की भी मदद करती हैं.

तारापुर की रहनेवाली रुखसार की मानें तो मानव की सेवा करने से बड़ा कोई पुण्य नहीं हैं. जरूरतमंदों की अगर कुछ मदद हम कर सकें तो इससे बड़ी चीज कोई हो ही नहीं सकती है. इसके लिए समाज के हर वर्ग को सामने आना चाहिए. वे कहती हैं कि कांवरियों की सेवा करने की प्रेरणा हमें प्रशासनिक स्तर पर मेला मित्र एवं स्वयंसेवक गठन की प्रक्रिया से मिली.

सरकारी सेवा में रहने के बाद भी जिस तरह से सभी चौकीदार, जनवितरण विक्रेता, तालीमी मरकज , टोला सेवक, विकास मित्र आदि सेवा में लगे रहते हैं, वह हमारे दिल को छू गया. हम अपने नियमित दिनचर्या से समय निकालकर अगर दूसरों की सेवा कर पाते हैं, तो बहुत अच्छा लगता है. खास बात कि मुंगेर के डीएम उदय कुमार सिंह व एसडीओ शैलेंद्र कुमार भारती ने रुखसार की सराहना की है.

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