बीजेपी के लिए बहुत बड़ा ‘टेंशन’ बन गये हैं ये तीनों

लाइव सिटीज डेस्क : इस बार पूरे देश की नजर है गुजरात विधानसभा चुनाव पर. हालांकि अब तक गुजरात विधानसभ चुनाव की ​डेट चुनाव आयोग ने जारी नहीं की है. वहीं इसी साल गुजरात के अलावा हिमाचल प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होना है.

गुजरात चुनाव पर बिहार की नजर भी लगी है. दरअसल गुजरात विधानसभा का चुनाव सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से जुड़ा हुआ है. खास बात तो यह है कि हाल ही में राज्यसभा के चुनाव में अमित शाह जीत कर भी पटकनी खा चुके हैं. इनकी लाख कोशिश के बाद भी अहमद पटेल चुनाव जीत गये.

एक बार फिर सबकी नजर गुजरात चुनाव पर टिक गई है. हर राजनीतिक दल जोर लगा रहे हैं. सूत्रों की मानें तो भाजपा को भी इस बार वहां पर काफी संघर्ष करना पड़ रहा है. लेकिन इस बार अहमद पटेल की जो भी भूमिका होगी, लेकिन वहां के तीन युवा नेता गुजरात भाजपा के लिए सबसे बड़ा टेंशन बन गये हैं.

सूत्रों की मानें तो पिछले दो सालों में ये तीनों नेता उभरकर सामने आए हैं. पाटीदार, ओबीसी और दलित समुदायों को प्रभावित करने वाले से तीनों नेता क्रमश: हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकुर और जिग्नेश मेवाणी गुजरात बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं. ये तीनों गुजरात में पॉलिटिक्स का हिस्सा बन गये हैं.

पॉलिटिकल एक्सपर्ट की मानें तो युवाओं में मौजूद ग़ुस्से से जन्मे ये नेता गुजरात में बीजेपी के लिए चुनौती बन सकते हैं. इसका असर दिखने भी लगा है. बता दें कि साल 2015 में पटेल आरक्षण की मांग के बाद पाटीदार नेता के रूप में हार्दिक पटेल का नाम तेज़ी से सामने आया है. वे पाटीदार को आरक्षण न देने के लिए बीजेपी को दोषी ठहराते हैं. अमित शाह भी अपनी गुजरात गौरव यात्रा के दौरान पाटीदार युवाओं का विरोध देख चुके हैं. वहीं उन्होंने राहुल गांधी की यात्रा का स्वागत किया था.

इसी तरह दलित नेता जिग्नेश मेवाणी भी भाजपा को पानी पिला रहा है. मेवाणी अभी राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के संयोजक हैं. वे गुजरात में दलितों पर हो रहे हमलों के लिए वहां की सरकार को ज़िम्मेदार मानते हैं. मेवाणी पेशे से वकील हैं. मेवाणी भी कहते हैं कि इस बार बीजेपी को हर क़ीमत पर हराया जाना चाहिए. वहीं अल्पेश ठाकुर ओबीसी नेता के रूप में उभरे हैं. वे कहते हैं कि यहां विकास सिर्फ दिखावा है. गुजरात में लाखों लोग बेरोजगार है. हालांकि अल्पेश ठाकुर का झुकाव बीजेपी की ओर है, लेकिन विकास व बेरोजगार के मुद्दे पर यह झुकाव बीजेपी की ओर रहेगा या नहीं, यह अभी से कहा नहीं जा सकता है.

बहरहाल पूरे देश को गुजरात में विस चुनाव होने की घोषणा का इंतजार है. चुनाव की डेट घोषित होने के बाद ही इसकी सही तस्वीर सामने आयेगी. लेकिन इतना तो तय है कि इस बार भाजपा के लिए विस चुनाव का रास्ता काफी आसान नहीं है.

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