पहुंच गए दफ्तर, आपरेशन स्‍टार्ट, खंगाल डालेंगे विभाग को

पटना : के के पाठक ने आज बुधवार को बिहार के बहुत बदनाम खान व भूतत्‍व विभाग के प्रधान सचिव पद की जिम्‍मेवारी संभाल ली है. पाठक को बिहार का सबसे कड़क आईएएस आफिसर माना जाता है. सभी जानते हैं कि पाठक के पास कोई पैरवी नहीं चलती.

studio11

पाठक के पदभार ग्रहण करने का इंतजार पूरा बिहार कर रहा था. पहले उन्‍होंने योगदान देने से मना कर दिया था. पर बाद में तैयार हो गये थे. मंगलवार 8 अगस्‍त को ही उनके योगदान की खबर थी, लेकिन वे कल कार्यालय नहीं पहुंच पाये थे. आज बुधवार को समय से पहुंचे. विभाग की वेबसाइट पर उनके नाम को अपडेट कर दिया गया है.

KK-PATHAK

बिहार को पता है कि पाठक बहुत दिनों तक खान व भूतत्‍व विभाग में रह गये तो क्‍या होगा. कार्रवाई सभी गलत करने वालों पर होगी. बालू माफिया के खिलाफ कार्रवाई अभी बिहार सरकार के एजेंडे में है. डिप्‍टी चीफ मिनिस्‍टर सुशील कुमार मोदी कह चुके हैं कि बिहार का बालू माफिया राजद को फंडिंग करता है. बालू के कारोबार के किंगपिन सुभाष यादव (लालू यादव के साले नहीं) को लालू प्रसाद का बेहद करीब बताया गया है. दूसरी बात है कि लालू प्रसाद मोदी के आरोपों को मानने को तैयार नहीं हैं.

पाठक लंबे समय तक विभाग में रहे तो यह भी तय मानिए कि सिर्फ बालू माफिया ही नहीं पत्‍थर माफिया भी निशाने पर आएगा. कार्रवाई सबों के खिलाफ होगी. यह संभव नहीं होगा कि राजद वाले नप गए और दूसरे बच गए.

कैसे हैं के के पाठक,समझिए

उदाहरण बहुत मिलेंगे. लेकिन पाठक को समझने के लिए 1990 के दशक के प्रारंभ की बात करते हैं. तब वे बाढ़ के एसडीओ थे. बाढ़ में ही आईपीएस आर एस भट्टी एएसपी थे. पाठक और भट्टी की जोड़ी को बिहार का सबसे सख्‍त आईएएस-आईपीएस माना जाता रहा है. भट्टी अभी सीबीआई में बड़े ओहदे पर हैं.

बाढ़ के लदवां गांव में मर्डर हुआ. तब अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप कुमार सिंह राजद के विधायक हुआ करते थे. सरकार लालू प्रसाद की थी. विधान सभा का सत्र चल रहा था. सत्र के दिनों में विधायक को गिरफ्तार करने के पहले विधान सभा अध्‍यक्ष की अनुमति लेनी होती है. विधायक की गिरफ्तारी ऐसे भी बगैर आला अधिकारियों की अनुमति के बगैर नहीं होती है.

लेकिन पाठक और भट्टी ने पटना में आकर दिलीप कुमार सिंह को अरेस्‍ट कर लिया. अरेस्‍ट करने जा रहे हैं,इसकी सूचना तब के सीनियर एसपी और डीएम को भी नहीं थी. डीएम-एसएसपी पहले इंकार कर रहे थे, लेकिन जब पता चला कि पटना में रेड मारने पाठक और भट्टी आ गये हैं,तो सीनियर एसपी ने कहा था- ये दोनों कुछ भी कर सकते हैं,हमें कुछ भी नहीं बताया गया है.

एक और उदाहरण बियाडा का है. पाठक बियाडा के एमडी बनाये गये थे. आफिस बोरिंग केनाल रोड के सरकारी भवन के छठे-सातवें तल्‍ले पर था. पाठक सुबह ठीक 9.59 मिनट पर लिफ्ट छोड़ सीढि़यों से ऊपर पहुंच जाते थे. परिणाम,सभी दूसरे को भी ठीक 10 बजे ही आ जाना होता था. नहीं आए तो पाठक कोई माफी मंजूर नहीं करते थे.

दफ्तर पहुंचते ही शुरु हो गए पाठक

आज बुधवार को भी खान व भूतत्‍व विभाग के दफ्तर में पहुंचते ही पाठक ने एक भी मिनट का समय जाया नहीं किया. शुरुआत में सबों से मिले. फिर तुरंत अधीनस्‍थ अधिकारियों की मीटिंग बुलाई. संदेशा साफ दे दिया कि वैसा विभाग में उनके रहते नहीं चलेगा,जैसा अब तक चलाकर विभाग को बदनाम कर दिया गया है.

यह भी पढ़ें –
मंगलवार से चलेगा माफिया ताकतों पर के के पाठक का डंडा
इस्‍तेमाल होने के लिए तैयार नहीं हैं बिहार के IAS के के पाठक
बालू माफिया, सावधान ! बुखार छुड़ाने को आ गए हैं के के पाठक

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*