Breaking News

बथुआ एक गुण अनेक, चाहे जैसे भी खाएं

लाइव सिटीज डेस्क/गोपालगंज : खरीफ फसलों के साथ पैदा होने वाले बथुआ के महत्व को भले ही कोई नहीं समझ पाए लेकिन गुणकारी बथुआ के अनेकों फायदे उपयोग में लाने से मिल सकता है. बथुआ हाजमा से लेकर खून बनाने तथा पर्याप्त आयरन के साथ कई रोगों की अचूक दवा है. इससे गर्म स्वभाव वालों को अत्यंत फायदा होता है. यह प्यास को शांत करता है. इसके पत्तों का रस गांठों को तोड़ता है. यह प्यास लाता है. सूजनों को पचाता है और पथरी को गलाता है.

छोटे-बड़े दोनों प्रकार के बथुवा क्षार से भरे होते हैं. यह वात, पित्त, कफ (बलगम) तीनों दोषों को शांत करता है. आंखों को अत्यंत हित करने वाले मधुर, दस्तावर और रुचि को बढ़ाने वाला है. शूलनाशक, मलमूत्रशोधक, आवाज को उत्तम और साफ करने वाले, स्निग्ध पाक में भारी और सभी प्रकार के रोगों को शांत करने वाला है. चिल्ली यानी लाल बथुआ गुणों में इन दोनों से अच्छा है. लाल बथुआ गुणों में बथुए के सभी गुणों के समान है. प्रमेह को दबाता है. पेशाब और सुजाक के रोग में बहुत ही फायदेमंद है.

भिन्न-भिन्न रोगों की अचूक दवा हैं बथुआ

-बथुआ जबतक बाजार में उपलब्ध रहे उसका सेवन बराबर करते रहना चाहिये. बथुए का उबाला हुआ पानी पीयें. इससे पेट के हर प्रकार के रोग लीवर (जिगर का रोग), तिल्ली, अजीर्ण (पुरानी कब्ज), गैस, कृमि (कीड़े), दर्द, अर्श (बवासीर) और पथरी आदि रोग ठीक हो जाते हैं.

-1 गिलास कच्चे बथुए के रस में शक्कर मिलाकर रोज पीने से पथरी गलकर बाहर निकल जाती है.

-बथुआ आमाशय को ताकतवर बनाता है और कब्ज को दूर करता है. यह पेट को साफ करता है, इसलिए कब्ज रोग से पीड़ितों को बथुए का साग रोज खाना चाहिए. कुछ हफ्ते लगातार बथुआ का साग खाते रहने से हमेशा होने वाला कब्ज दूर हो जाता है.

-बथुआ के पत्तों को गर्म पानी में उबालकर छान लें और उसे ठंडा करके उसी पानी से सिर को खूब अच्छी तरह से धोने से बाल साफ होने के साथ चमकदार दिखाई देंगे. और बालों के जुएं भी मर जाते है.

-2 चम्मच बथुआ के बीज को 1 गिलास पानी में उबालें. उबलने पर आधा पानी बचने पर इसे छानकर पीने से रुका हुआ महिलाओं का मासिक-धर्म खुलकर आता है.

-रोजाना बथुए का साग खाने से आंखों की सूजन दूर हो जाती है.

-बथुआ को उबालकर तथा निचोड़कर इसका रस पीये और सब्जी साग बना कर खायें. बथुए के उबले हुए पानी से त्वचा को धोयें बथुआ के कच्चे पत्ते पीसकर निचोड़कर रस निकालें. 2 कप रस में आधा कप तिल का तेल मिलाकर हल्की आग पर गर्म करें. जब रस खत्म होकर तेल रह जाए तब छानकर किसी साफ साफ शीशी में सुरक्षित रख लें और त्वचा पर रोज लगायें. इस प्रयोग को लम्बे समय तक करने से सफेद दाग,दाद, खुजली, फोड़ा, कुष्ठ और त्वचा रोग के सारे रोग दूर हो जाते हैं.

-बथुए को पीसकर इसमें सोंठ और नमक मिलाकर गीले कपड़े में बांधकर कपड़े पर गीली मिट्टी लगाकर आग में सेंकें. सेंकने के बाद इसे फोड़े पर बांध लें इस प्रयोग से फोड़ा बैठ जायेगा या पककर जल्दी फूट जायेगा.

-आग से जले अंग पर कच्चे बथुए का रस बार-बार लगाने से जलन शांत हो जाती है.

-गुर्दे के रोग में बथुए का साग खाना लाभदायक होता है अगर पेशाब रुक-रुककर आता हो या बूंद-बूंद आता हो तो, बथुए का रस पीने से पेशाब खुलकर आने लगता है.

-आधा किलो बथुआ और 3 गिलास पानी लेकर उबालें और फिर पानी छान लें. बथुए को निचोड़कर पानी निकाल लें और छने हुए पानी में मिला लें. इसमें स्वादानुसार नींबू, जीरा, जरा-सी कालीमिर्च और सेंधानमक मिलाकर पी जायें. इस प्रकार तैयार किया हुआ पानी दिन में 3 बार पीयें. इससे पेशाब में जलन, पेशाब कर चुकने के बाद होने वाला दर्द ठीक हो जाता है. दस्त साफ आते हैं. पेट की गैस, अपच (भोजन न पचना) दूर होती है. पेट हल्का लगता है. उबले हुए पत्ते भी दही में मिलाकर खाने से बहुत ही स्वादिष्ट लगते हैं.

यह भी पढ़ें- सुबह नंगे पांव हरी घास पर चलने के फायदे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *