राजकीय सम्मान से होगा ‘पीरो के गांधी’ का अंतिम संस्कार

लाइव सिटीज डेस्क/आरा: पूरे भोजपुर में गांधी के नाम से प्रचलित प्रखर समाजवादी और पूर्व विधायक रामइकवाल वरसी अब नहीं रहे. रविवार की देर रात पटना के आईजीएमएस में उनका निधन हो गया. उनके निधन की खबर सुनकर पूरे भोजपुर में शोक की लहर दौड़ गई. वहीं वारसी के निधन पर मुख्मंत्री नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने शोक जताया है. पूरे राजनीतिक हल्के में वारसी के निधन के बाद से शोक का माहौल है.banglore-saree-house-23.jpg

ताजा जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने पुरे राजकीय सम्मान के साथ उनके अंतिम संस्कार की घोषणा की है. जदयू नेता श्याम रजक ने शोक जताते हुए कहा कि उनका निधन राजनीतिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति है.

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अपने सरल स्वभाव एवं गांधीवादी विचारधारा को अपनाने वाले रामइकवाल वारसी सबके चहेते थे. 1969 में तत्कालीन पीरो विधानसभा क्षेत्र से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते. उनके  समाजवादी विचारों व जनहित से प्रेरित होकर डॉ राम मनोहर लोहिया ने  उन्हें एक नया नाम दिया पीरो का गांधी. इस नये नाम ने  उनके गजब का  आवेश व जज्बा भर दिया था. अपना पूरा जीवन वरसी ने जन सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया.  वे विधायक रहते हुए जिस तरह मुखर होकर गरीबों की आवाज उठाते रहे  उसी तरह जीवन के अंतिम समय में भी  उनकी यह मुहिम धीमी नहीं पड़ी. उनका मानना था कि जब तक समाज के  अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को  उनका हक नहीं मिलता तब तक लोकतंत्र का सपना साकार नहीं होगा.

1926 में तरारी प्रखंड के छोटे से गांव ओरसी में जन्मे पीरो के गांधी ने अपने जीवन का लक्ष्य लोगों की सेवा करना बना लिया. वरसी  एवं उनके परिजन  अभावों के बीच जीते रहे. इकवाल वरसी ने पूर्व विधायक के नाम पर सरकार की ओर से मिलने वाले पेंशन को लालच का ठिकरा बताकर उसमें से फुटी कौड़ी भी लेने से इंकार कर दिया. वे कहते थे कि सरकार का यह पैसा गरीबों पर खर्च किया जाना चाहिए. वे 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में कूद पड़े. इस दौरान जेल में उनकी मुलाकात जय प्रकाश नारायण सहित अन्य राजनीतिक दिग्गजों से हुई जिनसे वे काफी प्रभावित हुए.

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डॉ राम मनोहर लोहिया को अपना आदर्श मानते हुए वारसी उनके पदचिन्हों का आजीवन अनुसरण करते रहे. कहते हैं कि लोहिया ने ही उन्हें सबसे पहले ‘पिरो के गांधी’ की संज्ञा दी थी. उनके निधन पर राजनीति जगत का कहना है कि पीरो के गांधी की भरपाई कोई नहीं कर सकता. उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए कई लोग सुबह से ही उनके दरवाजे पर पहुंच गए हैं.

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