क्यों महत्वपूर्ण है मुहर्रम की 10वीं तारीख?

पटना/फुलवारी शरीफइस्‍लामिक कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम है. यह माह मुसलमानों के लिए काफी खास माना जाता है. पहली मुरर्हम से लेकर दसवीं मुहर्रम तक लोग खास तौर पर इबादत करते हैं. जब कि 9वीं और 10वीं को रोजा रखते हैं. आखिर क्‍यों महत्‍वपूर्ण है मुहर्रम की दसवीं इस संबंध में मौलाना सुहैल अहमद नदवी ने बताया कि मुसलमानों के लिए यह एक खास तारीक है. पहले जब रमजान शरीफ का रोजा नहीं था जब मुहर्रम के 9वीं 10वीं का रोजा फर्ज था. मगर जब रमजान माह के एक माह के रोजे को अल्‍लाह ने फर्ज करार दिया और हमारे नबी ने इससे रोजे को रखने का हुक्‍म दिया जब से यह रोजा नफल रोजा हुआ और इसका दर्जा फर्ज के बाद करार दिया गया.

इन दोनों रोजे रखने से एक साल का कुफ्फारा यानी पाप से मुक्‍ति मिलती है. इसके साथ ही मुहर्रम की दसवीं को हजरत आदम अलैहिस सलाम की तौबा कबूल की गई. वह इसी दिन पैदा किए गए इसी दिन अर्श कुर्सी आसमान जमीन शम्‍श कमर सिरातें जन्‍नत बनाये गए. इसी दिन हजरत इब्राहिम अलैहिस सलाम पैदा हुए और आग से उनको निजाम मिली. मूसा अलैहिस सलाम की उम्‍मत को फिरऔन से निजात मिली. वह अपनी फौज के साथ नील नदी में गर्क हो गया. इसा अलैहिस सलाम इसी दिन पैदा किए गए और उन्‍हें आसमान की तरफ उठाया गया. हजरत नूह अलैहिस सलाम की किश्‍ती जूदी पहाड़ पर ठहरी. हरजत सुलेमान अलैहिस सलाम को मुल्‍क अजीम अता किया गया. युनुस अलैहिस सलाम को मछली के पेट से निकाला गया. याकूब अलैहिस सलाम के आंखों की रौशनी वापस आई. हजरत युसूफ अलैहिस सलाम कंए से निकाले गए. हजरत अय्‍यूब अलैहिस सलाम की तकलीफ दूर हुई. इसी दिन आसमान से पहली बारिश हुई. इसी दिन हजरत हुसैल शहीद हुए. इस कारण मुहर्रम की दसवीं का काफी महतव है.

अल्‍लाह का फरमान है कि इस दिन अपने घर में अच्‍छे-अच्‍छे पकवान बना कर दोस्‍तो रिश्‍तेदारों गरीबों को खिलाओ. अल्‍लाह का हुक्‍म है कि जो इस दिन अपने घर में अच्‍छा पकवान बनायेंगा अल्‍लाह सालों भर उसके घर में खुशहाली रखेगी. इस दिन को आशुरा कहते हैं. इस लिए मुहर्रम के 9वीं और 10वीं को रोजा रख कर इबादत करना चाहिए और हंगामा जुलूस से बचना चाहिए.

muharram

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