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कार्यशाला से अफसरों को बताया ‘जेंडर बजटिंग’ का महत्व

लाइव सिटीज डेस्क: शुक्रवार को पटना के नियोजन भवन में जेंडर रिसोर्स सेंटर द्वारा ‘जेंडर बजटिंग’ पर विभिन्न विभागों के अधिकारीयों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रुप में महिला विकास निगम की एमडी डॉ. एन. विजयालक्ष्मी, अवर सचिव समाज कल्याण विभाग, श्रीमती सुजाता चलाना, जेंडर रिसोर्स सेंटर के प्रधान सलाहकार आनंद माधव मौजूद थे.


कार्यशाला में जेंडर बजटिंग एक्सपर्ट ‘सेंटर फॉर बजट एंड गवर्नेंस अकाउंटेब्लिटी’ की डॉ. सोना मित्रा तथा इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ मैनेजमेंट एंड रिसर्च के डॉ. बी एस सिंह ने उपस्थित अधिकारियों को जेंडर बजटिंग के सभी पहलुओं से अवगत कराया. मुख्य अतिथि के रूप मे बोलते हुये डॉ एन विजयालक्ष्मी ने कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए बिहार में जेंडर बजटिंग के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों से इस पर थोड़ा क्रिएटिव करने की जरुरत पर बल दिया. उन्होंने कहा कि अनेक क्षेत्र जैसे कृषि में महिलाओं का बहुत ज्यादा योगदान होने के बावजूद उन के सुविधा के लिए कोई खास पॉलिसी नहीं है. रोड्स, ट्रांसपोर्ट जैसे कई विभागों में महिलाओं की सुविधा के लिए कोई इंतजाम नहीं है.

साथ ही बहुत सारे सरकारी भवनों में महिलाओं के लिए टॉयलेट्स तक की व्यवस्था नहीं है. इस से वर्क फ़ोर्स में महिलाओं का योगदान जनसंख्या के अनुपात में अत्यंत कम है. उन्होंने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर वुमन फ्रेंडली इक्विपमेंट लाने की जरुरत पर बल दिया ताकि विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान में बढोत्तरी हो सके. उन्होंने कहा कि अगर महिलाऐं विभिन्न विभागों में काम करने आ रही है तो उनके सुविधा के लिए भी सोचना होगा. महिलाओं को अपना रोल्स एंड रेस्पोंसिब्लिटी अच्छे से निभाने के लिए उन सुविधाओं पर खास ध्यान देना होगा. डॉ. विजया लक्ष्मी ने बताया कि बिहार में सैकड़ों वीमेन डेयरी का निर्माण किया गया है तथा महिलाओं के लिए अनेक फिशरीज सोसाइटी बनाने का कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वर्क फ़ोर्स में महिलाओं के योगदान को सुनिश्चित कर ही देश को डेवलपिंग से डेवलप्ड बना सकते हैं.

दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात आनंद माधव के वक्तव्य के साथ कार्यशाला की शुरुआत की गई. माधव ने जेंडर स्पेस को लोगों के समक्ष लाने की बात पर जोर देते हुए बताया कि वर्ष 2009 से ही बिहार में इस संबंध में वर्कशॉप आयोजित किया जा रहा है. यूनाइटेड नेशन के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरे विश्व में चलाई जा रही है तथा दैनिक दिनचर्या इसे इम्प्लीमेंट करने की आवश्यकता है. कार्यशाला में जेंडर बजटिंग एक्सपर्ट डॉ सोना मित्रा ने जेंडर रेस्पोंसिव बजटिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जेंडर रेस्पोंसिव बजटिंग की प्लानिंग के स्तर से शुरुआत कर कार्यशाला में जेंडर बजटिंग एक्सपर्ट डॉ बी एस सिंह ने जेंडर बजटिंग के लिए इंस्टीट्युशनल मैकेनिस्म पर अपने विचार से उपस्थित अधिकारीयों को अवगत कराया. उन्होंने बताया कि जेंडर बजटिंग डिपार्टमेंट के हिसाब से अलग-अलग होता है.

उन्होंने बजटिंग की लाभार्थी तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए इस का रियलिटी चेक कराने के तरीके पर भी प्रकाश डाला. साथ ही उन्होंने जेंडर बजटिंग के लिए जरूरी सभी घटक के बारे में विस्तार से उपस्थित अधिकारियों को अवगत कराया. कार्यशाला के अंत में जेंडर रिसोर्से सेंटर के श्री आशीष कुमार ने जेंडर बजटिंग के लिए वेलफेयर ओरिएंटेड कार्यक्रमों के बदले इक्वल पार्टिसिपेशन की बात कही. उन्होंने बताया कि जेंडर बजटिंग के बेहतर क्रियान्वयन के लिए इसमें आए गैप को ढूंढ़कर इनोवेटिव तरीके से कार्य करने की जरुरत है.

कार्यशाला में राज्य के 18 विभागों से आए अधिकारी मौजूद रहे. कार्यशाला में एक ओपन सेशन का आयोजन किया गया जिसमें एक्सपर्ट ने अधिकारीयों द्वारा पूछे गए सभी सवालों का जवाब दिया. ज्ञात हो कि जेंडर रिसोर्से सेंटर समय-समय पर ऐसे कार्यशालाओं का आयोजन करते रहती है. इस कार्यशाला में महिला विकास निगम के कार्यकारी परियोजना निदेशक रूपेश कुमार सिन्हा, जीआर से एस. आनन्द तथा डॉ. चंदन भी उपस्थित थे.

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