पटना के ‘जूतों के डॉक्टर’, कभी करते थे बूट पालिश, आज लालू-नीतीश तक ऑर्डर देकर बनवाते हैं जूते

लाइव सिटीज डेस्क : आपने कई तरह के डॉक्टर्स को देखा होगा जो अलग-अलग रोगों के एक्सपर्ट होते हैं. उसी तरह से मशीनों के भी डॉक्टर होते हैं और कपड़ों के डॉक्टर को टेलर कहते हैं.

लेकिन हम आज जिस चीज के डॉक्टर से आपको मिलवाने वाले हैं दरअसल वो अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाते हैं और वो जुतों के डॉक्टर हैं. पटना के रहने वाले डॉ डोमन दास ना तो इंसान के डाक्टर हैं और ना ही जानवरों के. ये सिर्फ जुतों का इलाज करते हैं.

सुनने में भले ही आश्चर्य लग रहा हो मगर ये श्रीमान जूतों के डॉक्टर हैं जो पिछले 50 सालों से चमड़े की चीड़-फाड़ कर रहे हैं. जूते बनाने और मरम्मत करने में इनकी महारत को देखकर लोग इन्हें डॉक्टर साहब कहते हैं.

इन्होंने अपने चमड़े का क्लीनिक भी खोल रखा है. इनके बनाए जूते न सिर्फ बड़े-बड़े मंत्रियों-नेताओं, अफसरों ने इस्तेमाल किए बल्कि हिन्दी व भोजपुरी फिल्मों में भी इनके बनाए जूतों का इस्तेमाल होता है.

पटना के करबिगहिया में अपने चमड़े के क्लीनिक पर बैठे डॉ. डोमन दास ने बताया कि बॉलीवुड की कुछ फिल्मों के लिए भी उनके यहां से खास जूते मंगवाए गए हैं. लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ती गई. बड़े-बड़े अफसर से लेकर कॉलेज जाने वाले युवा उनके यहां खास ऑर्डर देकर जूते बनवाने लगे.

बूट बनवाने के लिए तो लोग काफी दूर-दूर से यहां पहुंचने लगे. यहां तक कि विदेश में रहने वाले एनआरआई भी उनके यहां से बना हुआ जूता मंगवाने लगे. उनके बनाए जूते दुबई, अमेरिका, इंग्लैंड तक जा चुके हैं. वे कहते हैं कि उन्हें किसी भी जूते का फोटो खींचकर दिया जाए तो वे बिल्कुल वैसा ही जूता बना देंगे.

वे कहते हैं कि उन्हें लोग चमड़े का डॉक्टर इसलिए कहते हैं कि क्योंकि वे चमड़े की चीर-फाड़ करते हैं. जैसे कोई सर्जन मरीज का ऑपरेशन करता है वैसे वे भी जूतों का इलाज करते हैं. उन्होंने बकायदा इसके लिए लैदर टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग भी ली है.

डॉ. दास के जूतों का कारखाना पिछले 30 वर्षों से लोगों के बीच अपनी खास पहचान बनाए हुए है. यहां आपको ब्राडेंड कंपनियों के बनाए जूतों जैसे बेहतरीन, मजबूत व टिकाऊ जूतों कम रेट पर मिल जाएंगे. इनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार व कई अन्य बड़े नेता यहां से अपने लिए खास ऑर्डर देकर जूते बनवाते हैं.

जिंदगी के 67 बसंत देख चुके डॉ. डोमन दास बचपन की उम्र में पटना के गांधी मैदान में बूट पॉलिश किया करते थे. वे बताते हैं कि 1965 में किसी तरह लोगों के जूते पॉलिश कर अपना जीवन यापन करते थे. फिर उन्होंने पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर के नज़दीक फुटपाथ पर सोल रिपयेरिंग का काम करना शुरू किया.

जूता बनाने में रुचि होने के कारण धीरे-धीरे वे इसमें महारथ हासिल करने लगे. सिर्फ 8वीं पास डॉ. डोमन दास ने 1989 में लैदर टेक्नोलॉजी में बकायदा ट्रेनिंग कर प्रमाणपत्र प्राप्त किया. फिर पटना के करबिगहिया में डॉ. डोमन दास के नाम से अपना क्लीनिक खोला.

डोमन दास का कहना है कि आजकल जो मार्केट में रेक्सीन के जूते धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं, वे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं. सिर्फ चार-पांच फूटवियर कंपनियां ऐसी हैं जो कि सही चमड़े का इस्तेमाल करती हैं. उन्होंने कहा उनके यहां बनाए गए जूते असली चमड़े के होते हैं. जिन्हें पैरों में पहनने से किसी तरह की कोई बीमारी नहीं होती.

साथ ही उनके यहां के जूते का रेट भी अन्य ब्रांडेड कंपनियों के मुकाबले कम होता है. वे बताते हैं कि जो जूते ब्राडेंड कंपनियां 5000 से 6000 हजार में बेचती हैं वे उनके यहां 1200 से 1500 तक में मिल जाते हैं. उनके यहां विद्यार्थियों को खास डिस्काउंट भी दिया जाता है.

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