‘तरकारी से सरकारी’ बनने की बिहारी जंग गुजरात चुनाव के बाद देखने को मिलेगी

पटना : जिन्‍हें नहीं पता, उनके लिए. बिहार में सब्‍जी को ही तरकारी कहते हैं. जात कुशवाहा को कोइरी कहते हैं. फिर यह कि बिहार में सबसे अधिक तरकारी कोइरी समाज के लोग ही पैदा करते हैं. लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) के फार्मूले पर चलने वाला कोइरी (कुश) समाज अब बिहार की राजनीति में तरकारी बने नहीं रहना चाहता. सीधे सरकारी (सत्‍ता में काबिज) बन जाना चाहता है. अगुआई करने को उपेन्‍द्र कुशवाहा आगे आते दिख रहे हैं. लेकिन तरकारी से सरकारी बनने को उन्‍हें कई कड़े फैसले लेने हैं. केन्‍द्रीय मंत्रिपरिषद से बाहर आना होगा. अभी प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के कैबिनेट में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के राज्‍य मंत्री हैं.

पिछले दिनों उपेन्‍द्र कुशवाहा ने पटना के गांधी मैदान में रैली की. सच है कि मीडिया ने रैली को बहुत स्‍पेस नहीं दिया. पर जैसे ही लालू प्रसाद से उनकी सीक्रेट मुलाकात की खबर आउट हुई, कोहराम मचना प्रारंभ हो गया. ध्‍यान रखिएगा कि स्‍वयं उपेन्‍द्र कुशवाहा ने अब तक लालू प्रसाद से बात-मुलाकात से इंकार नहीं किया है.

upendra-kushwaha

उपेन्‍द्र कुशवाहा के मन में ‘तरकारी से सरकारी’ बनने की प्‍लानिंग बहुत दिनों से चल रही थी. साथ में, यह भी पता था कि अकेले संभव नहीं है. तब वे नीतीश कुमार पर आक्रामक रहते थे. लालू प्रसाद पर कम ही बोलते थे. लेकिन, उपेन्‍द्र कुशवाहा की मैथेमेटिक्‍स ऐसे बिगड़ी कि नीतीश कुमार महागठबंधन तोड़ एनडीए में आ गये. अब केन्‍द्र सरकार के मंत्री रहते उपेन्‍द्र कुशवाहा बिहार में नीतीश कुमार पर भी हमलावर नहीं हो सकते थे.

नीतीश कुमार ने बिहार कैबिनेट में कुशवाहा की पार्टी रालोसपा को शामिल न कर धक्‍का दिया. कई दिनों बाद उपेन्‍द्र कुशवाहा एनडीए में आए मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई देने गये थे. बधाई के इस क्षण का वीडियो भी सोशल मीडिया पर आया था. सबों ने नोटिस किया कि मुलाकात की गर्मी कहीं नहीं थी. पूर्व मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा जबरिया दोनों को बेहद करीब लाए थे फोटो और वीडियो के लिए.

कुशवाहा की फ्यूचर प्‍लानिंग का पता नरेन्‍द्र मोदी-अमित शाह को भी है. पिछले महीने जब केन्‍द्रीय मंत्रिपरिषद का विस्‍तार चल रहा था, तब कुशवाहा अकड़ गए, इसलिए बाहर नहीं हो सके. कुशवाहा ‘तरकारी से सरकारी’ बनने के बिहार मिशन में दिल से अब चाहते भी हैं कि उन्‍हें नरेन्‍द्र मोदी जबरिया बाहर कर दें. ताकि बिहार में कुशवाहा समाज के बीच संदेशा जाए. लेकिन ऐसा न नरेन्‍द्र मोदी करेंगे और न ही नीतीश कुमार होने देंगे. लालू प्रसाद के साथ आगे चलने को उपेन्‍द्र कुशवाहा को खुद आगे निकलकर आना होगा.

उपेन्‍द्र कुशवाहा की सीक्रेट प्‍लानिंग को जान भाजपा और जदयू दोनों ने कुशवाहा पलिटिक्‍स के लिए अपने कल-पुर्जे ठीक करने शुरु कर दिए है. भाजपा ने जीतन राम मांझी की पार्टी हम से सम्राट चौधरी को पहले ही तोड़ कर लाया था. नीतीश कुमार के दरबार में भी कुशवाहा नेताओं को तवज्‍जो मिला शुरु हो गया है. इधर, ‘तरकारी से सरकारी’ बनने के मिशन में बिहार के सभी कुशवाहा एक हो जाएं के तहत कुशवाहा खेमे में जमा हुए पूर्व मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा और नागमणि चाहते हैं कि एलान तुरंत हो जाए.

लेकिन पोलिटिकल एनालिस्‍ट कहते हैं कि लालू प्रसाद पहले कांग्रेस से भी विचार करेंगे. नीतीश कुमार को हराना उनकी सर्वोच्‍च प्रायोरिटी है. ऐसे में, घर से बाहर निकल उपेन्‍द्र कुशवाहा को ऑफर देना वे ठीक-ठाक सौदा मानने की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन गुजरात-हिमाचल प्रदेश के विधानसभा के चुनाव के नतीजों के एलान तक इंतजार के मूड में हैं. उपेन्‍द्र कुशवाहा भी वेटिंग पीरियड में अभी भीतर-भीतर काम करने को तैयार हैं. केन्‍द्र में राज्‍य मंत्री की हैसियत से भले बहुत काम और अधिकार न हो,प्रोटोकॉल और फैसिलिटी तो मिली ही हुई है.

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