ब्रिटिश सरकार ने भारत में बंद कराई थी ये प्रथा, पति के साथ जिंदा जला दी जाती थी महिलाएं

लाइव सिटीज डेस्क : भारत को संस्कृति और सभ्यताओं का देश कहा जाता है. लेकिन यहां ऐसी कई परंपराएं और सभ्यताएं हुईं जो इंसानों को बेबस करने के अलावा और कुछ नहीं करती थी. कुछ परंपराओं के मुताबिक तो लोगों को जिंदा जला दिया जाता था. इस प्रथा को सती प्रथा कहा जाता था. इस प्रथा को निभाने के लिए पति के साथ जिंदा जल जाती थी महिलाएं.

सती प्रथा में विधवा पत्नी मृत पति की चिता के साथ जिंदा जल जाती थी. उस वक्त अधिक उम्र के पुरुष की शादी कम उम्र की लड़की से कर दी जाती थी. फिर उस पुरुष की मृत्यु हो जाने पर लड़की को भी उसकी लाश के साथ जलने पर मजबूर किया जाता था. महिलाओं पर हो रहे इस अत्याचार के खिलाफ ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राम मोहन राय ने आवाज उठाई. उन्हीं के प्रयासों से 4 दिसंबर, 1829 को ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में सती प्रथा पर रोक लगाई गई.

अंग्रेजों ने भारत में पति की मौत के साथ महिलाओं के जिंदा जल जाने की प्रथा पर रोक लगाया. सती प्रथा के नाम से प्रचलित यह प्रथा महिलाओं के साथ किया जाने वाला ऐसा अत्याचार था, जिसमें वे पति की चिता के साथ जिंदा जल जाती थीं.

अलाउद्दीन खिलजी से अपनी इज्जत बचाने के लिए पद्मावती सती हो गईं थीं.

सती प्रथा को लेकर यह कहा जाता है कि जब देवी सती अपने पति शिव के अपमान से व्यथित हुईं तो उन्होंने यज्ञ की अग्नि में जलकर अपनी जान दे दी. सती का मतलब पवित्र महिला से हैं. यही रिवाज बाद में सती प्रथा के रूप में सामने आया. राजा राम मोहन राय के प्रयासों से 4 दिसंबर 1829 में ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में सती प्रथा पर रोक लगाई गई.

 

ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के खिलाफ लोगों को जागरूक किया. उन्होंने बाल विवाह, जातिवाद, कर्मकांड और पर्दा प्रथा को खत्म करने का भी प्रयास किया.

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