कभी लगता था भक्तों का मेला, आज सुनसान पड़ा मंदिर

सीतामढ़ी : नोट बंदी के बाद स्थिति बेशक अब समान्य हो रही है, लेकिन सीतामढ़ी मे नोट बंदी का असर ऐसा देखने को मिल रहा है कि भक्त एक तरह से समझिये तो भगवान से ही रुठ गये है. जिन पौराणिक मंदिरो मे भक्तो का तांता लगा रहता था आज वहा सन्नाटा पसरा रहता है. भक्तों के आने से जिनकी रोजी रोटी चलती थी उनके चुल्हे चौके की आंच पुरी तरीके से ठंढ़ा पड़ चुकी है.

सीतामढ़ी का यह वह पौराणिक स्थल है जहा हमारे धार्मिक ग्रंथो मे ऐसी मान्यता है कि माता सीता यहा जमीन से प्रकट हुई थी जब राजा दशरथ ने हल चलाया था. यहां आये दिन लोग पुजा पाठ करने से लेकर शादी विवाह के लिये आते रहते है. इतना ही नहीं दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों की संख्या भी यहां कम नही, लेकिन नोट बंदी के बाद यहा पुरी तरिके से सन्नाटा पसरा है.यहां आने वाले भक्तों की संख्या ना के बराबर है. मंदिर परिसर को देखने से यह स्पष्ट हो जाता है कि नोट बंदी के बाद भक्त भगवान को एक तरिके से भुल गये है.

मंदिर में आने वाले लोगों से जिनकी रोजी रोटी चलती थी उनका भी बुरा हाल है.  दुकानदार रौशन कुमार और बिनोद साह का कहना है कि नोट बंदी के बाद अब समय गुजारना मुश्किल हो गया है. कस्टमर का पता नही है. दिनभर बैठकर ग्राहक का इंतजार करना मुश्किल हो गया है. सीतामढ़ी का पुरनौराधाम ही ऐसा मंदिर नही जिसकी यह स्थिति है. रामायणकाल से जुड़े यहां आधा दर्जन से ज्यादा ऐसे पौराणिक स्थल है जिनकी यह स्थिति बनी हुई है. नोट बंदी के बाद ऐसे पौराणिक स्थलों पर न सिर्फ भक्तों के आवा जाही मे कमी आयी है बल्कि शादी विवाह होना भी कम हो गया है. पुनौराधाम के उपप्रबंधक आसनारायण यादव  का कहना है कि टूरिस्ट जो हर साल विवाह पंचमी के मौके पर यहां आते थे, उनकी संख्या ना के बरारबर है. बहरहाल सीतामढ़ी मे नोट बंदी के बाद स्थिति आम लोगों की बेहद खराब हो गयी थी. पैसे के अभाव मे लोग अपनी जरुरतें किसी तरीके से पूरी कर रहे थे. किसी ने सही ही कहा है भूखे पेट भजन न होत गोपाला.

sita

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