Patna to Jamshedpur : इस Travelogue में खुल गई है नीतीश-रघुवर के सच की पोलपट्टी

– निहारिका सिंह –

मैं निहारिका सिंह हूं. नई दिल्ली से हूं. लेकिन इन दिनों बिहार-झारखंड टहल रही हूं. रिसर्च के कई काम हैं. रणवीर सेना के सुप्रीमो दिवंगत ब्रह्मेश्वर मुखिया पर मेरा शोध काफी आगे बढ़ा हुआ है. आज आपको पटना टू जमशेदपुर वाया रांची का एक्सपीरियंस शेयर करना चाहती हूं. बहुत वक़्त नहीं लगेगा आपको. विस्तार में हमें भी नहीं जाना है. लेकिन, पहली नजर में जैसा मैंने देखा-पाया, आपको बता देना चाहती हूं. मेरी ख्वाहिश तो यह है कि बात बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास तक भी पहुंच जाए. वे सुन लेंगे, तो जनता का भला हो जाएगा. नहीं सुनेंगे तो मैं क्या कर सकती हूं.

Patna to Ranchi

थोड़ी लेट हो गई हूं. फिर भी फ्लाइट छूटने का डर नहीं है. अब भी एक घंटे पहले पटना एयरपोर्ट पहुंची हूं. लेकिन, बाप रे बाप, पटना एयरपोर्ट का हाल तो बस स्टैंड से भी बुरा है. एयरपोर्ट में भीतर जाने को बहुत लंबी लाइन लगी है. एक ही इंट्री गेट है. मुझे लगता है कि जब पटना एयरपोर्ट की शुरुआत हुई होगी, तब भी एक ही इंट्री गेट होगा. पता नहीं, लोगों ने यात्रियों की बढ़ती संख्या को समझा क्यों नहीं.

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पटना एयरपोर्ट में काउंटरों पर लगी लंबी लाइन

लगेज लेकर देर तक लाइन में लगी रही. भीतर जाकर एयरलाइन्स के चेक-इन काउंटर पर भी रेलमपेल वाली भीड़ थी. अब मैं कोई VIP तो ठहरी नहीं कि किनारे से सभी काम हो जाते. ठंड में भी पसीने आये मुझे. खैर, रेलते-झेलते फ्लाइट में पहुंच ही गई. मेरा मन इसमें डूबा है कि पटना एयरपोर्ट के लिए सरकार कुछ करती क्यों नहीं. मुझे पता है कि नीतीश कुमार कहेंगे कि यह तो केंद्र का काम है. लेकिन मैं अपने को कैसे समझाऊं कि अब तो केंद्र में भी नीतीश कुमार के मन की सरकार है, तो फिर दिल से दिल मिलकर काम हो क्यों नहीं रहा.

पटना एयरपोर्ट पर बहुत सारे VVIP आते होंगे, लेकिन उन्हें भी फ़िक्र नहीं होती. कुछ दिनों पहले लाइव सिटीज के प्लेटफ़ॉर्म पर ही मैंने पटना एयरपोर्ट में फर्श पर भी बैठने को परेशान यात्रियों की तस्वीर देखी थी. तब शायद कुछ चिल-पों हुई थी. मुझे लगता है कि बिहार की मीडिया को पटना एयरपोर्ट की सूरत बार-बार दिखानी चाहिए. वैसे यह किसी ने मुझे बताया है कि सुशील कुमार मोदी के बेटे की शादी में शामिल होने को ‘दैनिक जागरण’ समूह के संपादक संजय गुप्ता नई दिल्ली से पटना आये थे. फिर वापसी में उन्होंने पटना एयरपोर्ट का असली चेहरा देखा. इसके बाद दैनिक जागरण लगातार कैम्पेन चला रहा है. शायद कुछ भला हो जाए, पटना एयरपोर्ट के एयर पैसेंजर्स का.

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बीते दिनों पटना एयरपोर्ट से सामने आई यात्रियों के फर्श पर बैठने की तस्वीरें
Ranchi to Jamshedpur

40 मिनटों के बाद मेरी फ्लाइट राँची लैंड कर गई. पहली बार रांची आई हूं. रांची का एयरपोर्ट पटना के एयरपोर्ट की तरह मरा हुआ नहीं है. फ्लाइट से सीढ़ियों से नीचे नहीं उतरना है. एरोब्रिज से मैं बाहर आई. एयरपोर्ट की नई बिल्डिंग अच्छी बनी है. साफ़-सफाई है. वाशरूम भी क्लीन है. लेकिन इस नए एयरपोर्ट का क्रेडिट झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास को नहीं दे सकती, क्योंकि यह पहले ही बन गया था.

अब एयरपोर्ट से बाहर आ गई हूं. जमशेदपुर से लेने को टैक्सी वाला चंचल आया है. तुरंत मिल गया. टैक्सी में बैठते ही मैंने पूछा – कितना वक़्त लगेगा. वह बताने लगा – मैडम, सड़क बहुत खराब है. पहले 2 घंटे लगते थे. अब 3 से साढ़े 3 घंटे भी लग सकते हैं. रास्ता भी बदलना होगा. कारण कि पुराने वाले रास्ते में इतने बड़े-बड़े गड्ढे हैं कि जा ही नहीं सकता.

टैक्सी ड्राइवर की बात की सत्यता को जानने के लिए गूगल में सर्च करती हूं. बात सही निकलती है. अब मेरा मन फिर से उदास हो गया है. जब रांची से जमशेदपुर की सड़क भी खराब होगी, तो और क्या बात करूं. रास्ते में सड़क के निर्माण का कार्य कहीं-कहीं देखती हूं, पर यह तो बहुत धीमा है. बात मेरी समझ में नहीं आई कि मुख्यमंत्री रघुवर दास भी जमशेदपुर से ही आते हैं, तो तीन वर्षों में भी वे रांची-जमशेदपुर सड़क की सूरत क्यों नहीं ठीक करा सके.

रांची से जमशेदपुर जाने वाली सड़क की खस्ता हालत
वादे हैं, वादों का क्या

मैंने रिसर्च के लिए पढ़ा था कि झारखंड के चुनाव के पहले नरेंद्र मोदी और अमित शाह, दोनों ने झारखंड को देश का नंबर-1 प्रदेश बनाने का वचन दिया था. जीत मिली भी. वायदे तो ऐसे ही बिहार में चुनाव के वक़्त नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने बिहार को भी नंबर-1 बना देने का किया था. लेकिन मुझे आज दोनों प्रदेश कहीं से भी देश का नंबर-1 प्रदेश बनने की दौड़ में दूर-दूर तक नहीं दिखते हैं.

(Disclaimer : लाइव सिटीज ने निहारिका सिंह के आलेख को हूबहू प्रकाशित किया है. विचार और तथ्य की जिम्मेवारी संपूर्ण रूप से आलेख की लेखिका का है.)

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