भारत का बिल गेट्स जिसने दान में दे दिए हजारों करोड़,लेकिन खुद आज भी चलते हैं सेकंड हैंड कार में

लाइव सिटीज डेस्क : देश की तीसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी विप्रो टेक्नोलॉजिस के चेयरमैन अजीम प्रेमजी महादानी हैं. इन्हें लोग भारत के बिल गेट्स के नाम से जानते हैं. लोग इन्हें दानवीर उद्योगपति के नाम से भी जानते हैं. अजीम हाशिम प्रेमजी एक भारतीय उद्योगपति, निवेशक और भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी विप्रो के अध्यक्ष हैं. वे भारत के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक हैं और सन 1999 से लेकर सन 2005 तक भारत के सबसे धनि व्यक्ति भी थे.

परोपकार के लिए स्थापित अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को उन्होंने विप्रो की अपनी लगभग आधा हिस्सा दान कर दिया है, जिसकी मार्केट वैल्यू 27 हजार करोड़ से ज्यादा है. अजीम प्रेमजी को वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स (अब WIPRO) 1966 में पिता मोहम्मद हासम प्रेमजी से विरासत में मिली थी.

देश के विभाजन के बाद मोहम्मद अली जिन्ना ने मोहम्मद हासम प्रेमजी से कहा था- ‘पढ़े-लिखे मुसलमान हो, एक मजबूत मुस्लिम राष्ट्र बनाने में मेरी मदद करो. मेरे साथ पाकिस्तान चलो और वहां मनचाहा पद संभालो.’राइस किंग ऑफ बर्मा के नाम से मशहूर सीनियर प्रेमजी ने जिन्ना का यह आग्रह ठुकराते हुए कहा था- ‘नो सर, इंडिया इज माय होम.’

भारत को ही अपना एकमात्र घर बताने वाले ऐसे पिता के बेटे ने आगे भी अपने हर काम में देश को सबसे ऊपर रखा. कंपनी चलाने का तरीका हो, संपत्ति दान करना हो या फिर RSS के किसी कार्यक्रम में हिस्सा लेना, उन्होंने लालच को किनारे रखते हुए अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया.

अजीम प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई 1945 को मुंबई के एक निजारी इस्माइली शिया मुस्लिम परिवार में हुआ. इनके पूर्वज मुख्यतः कछ (गुजरात) के निवासी थे. उनके पिता एक प्रसिद्ध व्यवसायी थे और ‘राइस किंग ऑफ बर्मा’ के नाम से जाने जाते थे. विभाजन के बाद मोहम्मद अली जिन्नाह ने उनके पिता को पाकिस्तान आने का न्योता दिया था पर उन्होंने उसे ठुकराकर भारत में ही रहने का फैसला किया.

सन् 1945 में अजीम प्रेमजी के पिता मुहम्मद हाशिम प्रेमजी ने महाराष्ट्र के जलगांव जिले में ‘वेस्टर्न इंडियन वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड’ की स्थापना की. यह कंपनी ‘सनफ्लावर वनस्पति’ और कपड़े धोने के साबुन ’787’ का निर्माण करती थी.

उनके पिता ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए उन्हें अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय भेजा पर दुर्भाग्यवश इसी बीच उनके पिता की मौत हो गयी और अजीम प्रेमजी को इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर भारत वापस आना पड़ा. उस समय उनकी उम्र मात्र 21 साल थी.

भारत वापस आकर उन्होंने कंपनी का कारोबार संभाला और इसका विस्तार द्दोसरे क्षेत्रों में भी किया. सन् 1980 के दशक में युवा व्यवसायी अजीम प्रेमजी ने उभरते हुए इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के महत्त्व और अवसर को पहचाना और कंपनी का नाम बदलकर विप्रो कर दिया. आई.बी.एम. के निष्कासन से देश के आई.टी. क्षेत्र में एक खालीपन आ गया था जिसका फायदा प्रेमजी ने भरपूर उठाया. उन्होंने अमेरिका के सेंटिनल कंप्यूटर कारपोरेशन के साथ मिलकर मिनी-कंप्यूटर बनाना प्रारंभ कर दिया. इस प्रकार उन्होंने साबुन के स्थान पर आई.टी. क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रित किया और इस क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित कंपनी बनकर उभरे.

सन् 2001 में उन्होंने ‘अजीम प्रेमजी फाउंडेशन’ की स्थापना की. यह एक गैर लाभकारी संगठन है जिसका लक्ष्य है गुणवत्तायुक्त सार्वभौमिक शिक्षा जो एक न्यायसंगत, निष्पक्ष, मानवीय और संवहनीय समाज की स्थापना में मददगार हो. यह फाउंडेशन भारत के लगभग 13 लाख सरकारी स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति के लिए काम करता है. यह संगठन वर्तमान में कर्नाटक, उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पांडिचेरी, आंध्र प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश की सरकारों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है. सन् 2010 में, अजीम प्रेमजी ने देश में स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए लगभग 2 अरब डॉलर दान करने का वचन दिया. भारत में यह अपनी तरह का सबसे बड़ा दान है। कर्नाटक विधान सभा के अधिनियम के तहत अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय भी स्थापित किया गया.

वॉरेन बफेट और बिल गेट्स द्वारा प्रारंभ किया गया ‘द गिविंग प्लेज’ एक ऐसा अभियान है जो दुनिया के सबसे धनि व्यक्तियों को अपनी अकूत संपत्ति का ज्यादातर भाग समाज के हित और परोपकार के लिए दान करने के लिए प्रोत्साहित करता है. अजीम प्रेमजी इसमें शामिल होने वाले पहले भारतीय हैं. रिचर्ड ब्रैनसन और डेविड सैन्सबरी के बाद वे तीसरे गैर अमेरिकी व्यक्ति हैं. सन् 2013 में उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने अपनी कुल संपत्ति का लगभग 25 प्रतिशत दान में दे दिया है और 25 प्रतिशत अगले पांच सालों में करेंगे.

वि‍प्रो के चेयरमैन फ्लाइट में इकोनॉमी क्‍लास में जाना पसंद करते हैं और खुद के पास होंडा सि‍टी कार थी. सालभर पहले प्रेमजी के सीनि‍यर के करीबी मैनेजर ने उन्हें सुझाव दि‍या कि वह पुरानी होंडा कार को अपग्रेड कर लें. इस सुझाव पर उन्होंने अमल तो किया लेकिन अपने ही बचत वाले स्वभाव से. हजारों करोड़ दान करने वाले प्रेमजी ने फैसला लिया और अपने ही एक कर्मचारी से सेकंड हैंड मर्सडीज-बेंज खरीद ली.

अजीम प्रेमजी का 1000 अरब रुपए से ज्यादा बिजनेस 67 देशों में फैला हुआ है. 2003 में फोर्ब्स मैग्जीन ने प्रेमजी को 10 ऐसे लोगों में गिना था, जो दुनिया बदल देने की ताकत रखते हैं. 2005 में भारत सरकार ने प्रेमजी को तीसरे सर्वोच्च सम्मान पद्मभूषण से नवाजा था. 2011 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से नवाजा गया.

प्रेमजी ने जनवरी 2001 में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की स्थापना की थी. यह देशभर में स्कूलों को बेहतर बनाने का काम करता है. प्रेमजी वॉरेन बफे तथा बिल गेट्स द्वारा शुरू ‘द गिविंग प्लेज’ अभियान का भी हिस्सा हैं. इसमें शामिल होने वाले पहले भारतीय तथा तीसरे गैर अमेरिकी व्यक्ति प्रेमजी ने अपनी कुल संपत्ति का लगभग 25 प्रतिशत दान कर दिया है और बाकी अगले पांच साल में कर देंगे.

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