बगहा में कवि और कविता के नये पौध में आगे रहेगा सौरभ सतर्ष का नाम

बगहा : आदि कवि वाल्मीकि की तपो भूमि कहलाने वाली बगहा की धरती पर बहुत सारे कवियों का प्रार्दुभाव हुआ है. जिनको आज भी जनमानस याद करता है. जिन नामों को हम सभी याद करते हैं, उनमें श्रीराम सरोज और पाण्डेय आशुतोष का नाम शामिल है. इन्हें भला कौन भुला सकता है. इनके रचनाओं से उप राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत और देश के तमाम तत्कालीन हस्तियां परिचित रहे. इन्हीं पीढ़ियों में एक, दो नाम और जीवंत हैं, जिनका स्मरण करके बगहा का जनमानस फुले नहीं समाता है, वो नाम है पंडित दिनेश भ्रमर और गणेश पाठक विशारद.

लोगों की बात अगर मानी जाए तो, गणेश विशारद जी से पंडित दिनेश भ्रमर आदि लोगों ने अपने कविताओं को पल्लवित, पुष्पित किया है. कवि और कविता के नये पौध में आजकल जिन नामों की चर्चा यहाँ हो रही है, उसमें सौरभ सतर्ष का नाम भी शामिल है. सौरभ सतर्ष के एक कविता संग्रह का लोकापर्ण भी हो चुका है. उनके कविता रचनाओं में यह उद्धृत है-

त्रिकालदर्शी, मेरे मोहन!,
सकल चराचर में व्याप्त हो तुम।
आदि अंत हो तुम जगत के,
पल में आरंभ समाप्त हो तुम।
मगर हे! कान्हा क्या दोष मेरा,
भाग्य में तुम क्यों नहीं हो,
कब चाहे राधा विराट सत्ता,
बस सूक्ष्म ही पर्याप्त हो तुम।।

उनकी अध्यात्म शैली के अतिरिक्त –

 

मैं शब्द, अर्थ, भावों का सामूहिक समर्पण हूँ।
अव्यक्त पीर की कथा का, स्नेहयुक्त तर्पण हूँ।
पीर-प्रीत जिसकी जितनी उसने उतना देखा है,
तो बोलो दोष मेरा क्या हैं मैं तो एक दर्पण हूँ।।”

समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती रही है. साहित्यिक गतिविधियों एवं संपादकीय सहयोग भी देते रहे हैं. सौरभ सतर्ष एक साधारण परिवार की उपज है. इनके पिता योगेन्द्र मिश्र पुलिस विभाग में सेवारत हैं, तो माता मृदुला शुक्ल एक साधारण गृहिणी है, जो परिवार सम्भालती हैं. सौरभ सतर्ष बताते हैं कि माता-पिता के आशीर्वाद से मैं अपनी शिक्षा- बी. टेक.(मैकेनिकल) तक प्राप्त किया हूँ.

आगे बताते हैं, कि वो रेलवे के मुरादाबाद जोन में सहायक स्टेशन मास्टर की नौकरी में सेवा देने जा रहें हैं. इनके व्यक्तित्व के सन्दर्भ में चम्पारण साहित्य परिषद के सचिव अखिलेश ठाकुर, बुद्धिजीवियों में राकेश सिंह, शिक्षक राजेन्द्र मिश्र आदि लोगों का बताना है कि सौरभ सतर्ष की रचनाओं में वो धार है, जिससे बगहा का इतिहास गौरवान्वित होगा.

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