बाजार में सिक्कों की भरमार, लेने वाला कोई नहीं

बगहा (अरविंद नाथ तिवारी):

कहावत पुरानी है कि टकसाल से निकला सिक्का, फिर टकसाल में लौटता है, पर अब यह कहावत बेमानी साबित होने लगी है. इन दिनों सिक्का टकसाल से निकल तो रहा है, लेकिन टकसाल तक पहुंच नहीं पा रहा है. नोटबंदी के बाद बाजार से जब नोट गायब हुआ तो बैंकों ने लोगों को सिक्के देना शुरू कर दिया. इतने सिक्के बांट दिए गए कि बाजार सिक्कों की खनक से पट गया. लेकिन अब नोटबंदी का तूफान गुजर चुका है. नोटों की हरियाली फिर से बाजार में उग आई है. लेकिन आंधी के दौर में उड़कर आए सिक्के अब भी बाजार में जमे हुए हैं, लेकिन अब उनका कोई नामलेवा नहीं रह गया है.


बाजार इन दिनों सिक्कों से पटा हुआ है. लेकिन सिक्के की खनखनाहट से लोग भाग रहे हैं. बाजारों में सिक्के की मान्यता घटने लगी है, इसको ग्राहक और दुकानदार दोनों ही छूना नहीं चाह रहे हैं, जैसे ही कोई कहता है कि साहब सिक्के लेंगे. एक हजार के सिक्के पड़े हुए हैं. लेकिन दुकानदार साफ मना कर रहे हैं. दुकानदार तड़का से जवाब देते हैं कि आफत कौन मोल लेगा? जब ‘लाइव बगहा’ ने इसका कारण जानना चाहा तो दुकानदारोें ने बताया कि, ‘साहब जी, बैंक सिक्के नहीं ले रहा है, जबकि सिक्के वहीं से मिले थे. बैंक में लेकर जाओ तो क्लर्क मना करते हैं कि कौन गिनेगा इतने सिक्के? हालात यह हो गए हैं कि बैंक सिक्के थमा तो रहा है, मगर पकड़ नहीं रहा है.


बैंक के सिक्के नहीं लेने की नीति पर जदयू नेता अब्दुल गफ्फार का कहना है, कि “सिक्के” बाज़ारों में एक बहुत बड़ी समस्या बन कर खड़े हो गए हैं. रिज़र्व बैंक ने कैश की किल्लत से निपटने के लिए नोट की बजाय सिक्कों को बाज़ारों में जारी किया है. आज भी बैंको के पास नोटों की भारी किल्लत बनी हुई है. कारण यही है कि भारत सरकार जानबूझकर नोटों की छपाई और नोटों की बैंकों में सप्लाई पर अंकुश लगा कर रखना चाहती है, ताकि लोग मजबूरन कैशलेस विकल्पों की तरफ़ अग्रसर हो सकें. अलबत्ता वैल्युशन कम होने के कारण सिक्कों की प्रचुर मात्रा बैंकों में उपलब्ध है. बैंकर्स मजबूरन अपने ॻाहकों को सिक्कों की थैली थमा रहे हैं. वैसे ग्राहक जिन्हें पैसों की सख़्त ज़रुरत है, वो सिक्कों का बोझ ढोने को मजबूर हो रहे हैं. वैसे ॻाहक जिन्हें पैसों की सख़्त ज़रुरत नहीं है, वो कल पर टाल देते हैं.
समस्या तब खड़ी हो रही है जब दुकानदार सामान खरीदने के लिए सिक्के की थैली बड़े कारोबारी को देते हैं तो होलसेलर साफ इंकार कर देते हैं. इसका कारण यह है कि थोक कारोबारियों से बैंकर्स सिक्के वापस नही ले रहे हैं. समस्या तब भी खड़ी होती है जब जनता पेट्रोल पम्पों पर सिक्के देने का प्रयास कर रही है. पेट्रोल पंम्प वाले भी सिक्कों को लेने से मना कर रहे हैं. कारण कि पेट्रोल पम्प वालों से भी बैंकर्स सिक्के वापस नही ले रहे हैं. नतीजतन बाज़ारों में सिक्कों का बोझ बढ़ता जा रहा है.

वहीं बगहा नगर के भाजपा अध्यक्ष रह चुके सुरेश भालोटिया कहते हैं कि’ ई रेज़गारी ना बा हेडेक बा. बैंक देता आ लेइ ना, बाजार में दुकानदार लेते ना बा’. एक जन साधारण नागरिक सलमान खान का कहना है कि सरकार और बैंक वाले सीधी—साधी जनता को बेवकूफ बना रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ कोई आवाज़ भी नही उठा रहा है. कारण है कि अधिकांश जनता देशभक्ति का सुबूत देने जुटी है. बाजार में सिक्कों के कारोबार में घुसपैठ कर जाने से अफरातफरी के हालात हैं.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*