‘ड्रेगन’ चीन की गिद्ध दृष्टि बाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के सांपों पर

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बगहा/अरविंद : भारत की सीमाओं के बाद अब ड्रेगन (चीन) की गिद्ध दृष्टि अब भारत स्थित जंगलों में रहने वाले सांपों पर भी गड़ गयी है. सांपो का हरण करने के लिए बगल के पड़ोसी देश नेपाल के सुस्ता, बेलाटांडी, हथुअनवा को अपना आशियाना बना रखा है. इस आशियाने में वही लोग रहने वाले हैं, जो भारत के सजायाफ्ता या अपराध जगत से रिश्ता जोड़ते हैं. ये वही लोग हैं, जो पहले भी बाघ, हिरण, गेंडा जैसे महत्वपूर्ण जानवरों के दुश्मन बन हत्या कर तस्करी करते रहे हैं.

सूत्रों की बात माने तो इन तस्करों का ध्यान बाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के विषैले सांपों पर टिका है. सांपों के तस्करी के लिए पैसों का अच्छा खेप इनको मिल चुका है. बताया जा रहा है कि चीन में सांपों के सूप व मांस का सेवन किया जाता है. सांपों के जहर से दवाएं बनती हैं. इनकी चमड़ी और हड्डी आदि से कई प्रकार की चीजें बनती हैं. कई प्रकार के सांपों का उपयोग सेक्स पॉवर की दवाएं बनाने के काम में भी आता है. चीन में सांपों की इस मांग को देखते हुए तस्कर भारतीय जंगलों से सांपों की तस्करी कर चीन भेजने के फिराक में लगे हैं और चुपके-चुपके जंगल के वैसे जगह तलाश रहे हैं, जहाँ विषैले सांपो का आशियाना हो.

सीमा पर सक्रिय तस्कर संपेरों को इस काम को अंजाम देने के लिए लगा रखा है, जिसकी मुंहमांगी कीमत देने के लिए तैयार हैं. बताया जा रहा है कि एक चीन का बड़ा शख्सियत काठमांडू से बैठकर इस कारोबार का संचालन कर रहा है.
भारतीय सांपों की दुर्लभ प्रजातियों का करैत, दोमुहां, अजगर, कोबरा आदि का चीन में भारी मांग है. चीन के व्यापारी इन सांपों को पड़ोसी देशों में भी भेजते हैं.

लालच के कमाई में गुजर-बसर करने वाले भारतीय संपेरों को तस्कर रुपये का लालच देकर उनसे सांप खरीदने के लिए तैयार बैठे हैं. यह भी बताया जा रहा है कि एसएसबी की निगाह ऐसे तस्करों पर लगी है. एसएसबी कभी उनकी गर्दन दबोच सकती है.जानकारी हो गत वर्ष बाल्मीकि व्याघ्र परियोजना से सांप को पकड़े हुए कुछ संपेरे पकड़े गये थे, जिन पर वन विभाग ने कार्यवाही की थी, तब उपरोक्त बात का खुलासा नहीं हुई था.

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