बगहा: CM के सभा में हंगामा करने वालों की बुद्धिजीवियों ने की निन्दा

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बुद्धिजीवियों ने की निन्दा

बगहा/चौतरवा: बिहार सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समीक्षा यात्रा के सभा दौरान मंच पर हुए स्थानीय विधायक के विरुद्ध में हो-हल्ला की निंदा बुद्धिजीवियों ने की है. आज सरस्वती शिशु मंदिर के परिसर में एक बैठक बुद्धिजीवियों की हुई है. बैठक की अध्यक्षता चंदरपुर- रतवल पंचायत के सरपंच जग्रनाथ यादव ने किया है. बैठक का संचालन दीपक शुक्ला ने किया है. बैठक में लगुनाहा-चौतरवा, चंदरपुर- रतवल और पतिलार पंचायत के जनप्रतिनिधि, प्रबुद्ध समाजिक लोग शामिल रहे.

बैठक को संबोधित करते हुए समाजसेवी मिथिलेश उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में असमाजिक तत्वों के द्वारा विधायक आरएस पांडेय को मंच पर विरोध किया. जिसको बैठक के माध्यम से पुरजोर निंदा किया गया. उन्होंने कहा कि गलत मानसिकता वाले लोगों  के विरुद्ध समाजिक रुप से बहिष्कार होनी चाहिए. ताकि भविष्य में वैसी घटना की पुनरावृति नही हों सके.

वही कई समाजसेवियों ने घटना को घोर निंदा की. गौरतलब हो कि जब विकास यात्रा के दौरान सुबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पतिलार पंचायत मे आये थे, तो तात्कालिन विधायक चन्द्रमोहन राय के साथ मंच पर ही लोगों ने दुर्व्यवहार की. इधर जब सीएम अपनी समीक्षा यात्रा के क्रम में पतिलार 12 दिसंबर को पतिलार आये, तो मंच पर ही स्थानीय विधायक को भी लोगों की विरोध की सामना करना पड़ी.

बैठक को समाजसेवी अशोक राव, शशि राव, काजू प्रसाद, मुखिया अशोक यादव, आनंद शाही, समेत दर्जनो लोगों ने संबोधित करते हुए घटना की निंदा की.

ठंढ़ पड़ने से किसानों के चेहरे खिल उठे

 

बगहा: ठंढे का मौसम ने आज सुबह अपनी रंगत बदली है. बगहा के क्षेत्र में पारा लुढ़ककर सुबह आठ बजे 9 सेंटीग्रेड तक पहुंचा है. समाचार के मुताबिक आज मौसम की रंगत देखकर बगहा ग्रामीण क्षेत्र के किसानों के चेहरे खिल उठा है. कल तक धूप का तेवर देखकर किसान मायूस दिखाई पड़ रहे थे. किसानों का कल बताना था, कि ऐसे ही धूप का तेवर रहेगा, तो गेहूं का खेती होना मुश्किल हो जायेगा. गेहूं के अच्छे फसल के लिए ठंढ़ का पड़ना आवश्यक है.

ठंढ़ पड़ने पर गेहूं के पौध का ग्रोथ बढ़िया होता है. किसान रामबदन तिवारी पुअर हाउस के रहने वाले बताते हैं, कि गेहूं के अच्छी खेती के लिए सिंचाई जितनी जरूरी है, उतना ही ठंढ़ की भी जरूरत है. कुल मिलाकर आज के ठंढ से धूप खिलने की गारंटी नहीं है, परन्तु किसानों के चेहरे खिल उठे हैं.

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