पुरखों की साहित्य ‘शिल्प कला’ को आगे बढ़ाएंगे युवा कवि अविनाश पांडेय

abhinash-pandey
युवा कवि

बगहा: ‘चम्पा अरण्य’ की भूमि चम्पारण कहे जाने वाली भूमि पर आदि कवि वाल्मीकि का प्रार्दुभाव हुआ था. आदि कवि वाल्मीकि ने ऋषिवर नारद की कृपा से जो साहित्य परम्परा का सृजन किया, वो अब तक इस भूमि पर हो रहा है. पुरखों के साहित्य शिल्प कला को यहां बगहा के धरती पर नामचीन साहित्यकार और कवियों ने वाल्मीकि के महत्व को देश और विश्व पटल पर सजोकर रखा है.

इन्हीं कवियों और साहित्यकारों में एक ऐसे युवा कवि का नाम जुट रहा है, जिन्हें युवा कवि अविनाश पाण्डेय के नाम से जाना जाता है. युवा कवि अविनाश पाण्डेय स्थानिय महिला कॉलेज पं०उमा शंकर तिवारी के डिग्री खण्ड में पुस्तकालय अध्यक्ष हैं. हाल फिलहाल के काल में अविनाश ने हिन्दी और भोजपुरी साहित्य में सशक्त हस्ताक्षर के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है.

यह सुखद संयोग है, कि भारत में जब गांधी के चम्पारण शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा था, उस समय में अविनाश ने अपनी महत्वपूर्ण कविता संग्रह ‘ कविता जिन्दा रहेगी’ का लोकार्पण प•उमा शंकर तिवारी महिला कालेज में 5 अक्टूबर 2016 को कराया. कविता संग्रह की भुरी-भुरी प्रशंसा लोगों के बीच हो रही है.

जानकारी हो कवि अविनाश बगहा के रतनमाला निवासी हैं, जो मुजफ्फरपुर बीआर अम्बेडकर विश्वविद्यालय में हिन्दी में शोध भी कर रहें हैं. काव्य पाठ, साहित्य सृजन, रंगकर्मी और स्वतंत्र पत्रकारिता के क्षेत्र में अब तक सक्रिय रहे. ‘स्पन्दन ‘(हिन्दी काव्य संग्रह) ‘स्वंदन ‘(भोजपुरी काव्य संग्रह), कीर्ति किंञ्जल, साहित्य समिधा एवं गीतामृत के संपादन मंडल में रहे.

कविता और वर्त्ताओं का प्रसारण गोरखपुर और पटना के आकाशवाणी केन्द्रों से हुआ है. इनकी रचनाएँ कादम्बिनी, अन्तर प्रवाह, आज, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, सन्मार्ग में छपते रहे हैं. इनकी लोकप्रिय कविताओं में ‘ ऐ आकाश ‘काफी लोकप्रिय रहा.

‘ऐ आकाश, ऐ आकाश! अब तेरा वो विस्तार न रहा, तेरा वो चांद अब वो चांद न रहा…
कवि की कविता में वो अहसास न रहा, तुम्हारी चांदनी में अब उसकी प्रेरणा का विश्वास न रहा.
ऐ आकाश! लोगों को अब तुम्हारी चांदनी में अपनी प्रियतमा नजर नहीं आती है. इस कलयुग में
सबको बल्ब की रोशनी. इस कलयुग में सबको बल्ब की रोशनी तुमसे कभी ज्यादा आती है.

ऐ आकाश!

तेरी ओर देखने की फुरसत अब किस को रही तेरी चांदनी के सादगी से कही ज्यादा
सबको पैसे की चमक नजर आती है… अविनाश

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