इंकार किया तो दस का सिक्का भेजेगा जेल

बगहा : देश के कई हिस्सों की तरह बगहा में भी दस रुपये के नकली सिक्के चलने की अफवाह फैली हुई है. यह अफवाह दिल्ली से भारी मात्रा में नकली सिक्कों की बरामदगी के बाद और तेज हो गई है. कई स्थानों पर इसी अफवाह के कारण  दस रुपये के सिक्के नहीं लिए जाने की भी खबर है. जबकि जानकारों की मानें तो यदि कोई भी व्यापारी या आम आदमी मात्र अफवाह के आधार पर दस का सिक्का या अन्य मुद्रा लेने से इंकार करता है तो राष्ट्रीय मुद्रा सम्मान के विरुद्ध  मुद्रा की अवेहलना माना जाएगा और इसके लिए उसे जेल भी हो सकती है. भारतीय संविधान की विभिन्न धाराओं में यह स्पष्ट कहा गया है कि मुद्रा के चलन पर कोई भी व्यक्ति रोक नहीं लगा सकता है. इस कारण कोई भी व्यक्ति या व्यापारी दस रुपये के सिक्के पर रोक नहीं लगा सकता.

रिजर्व बैंक किसी भी मुद्रा के चलन से पहले उसकी सुरक्षा यानि नकल की संभावनाओं को समाप्त करने के लिए मुद्रा पर प्रतिक चिन्हों का इस्तेमाल करती है ताकि किसी भी मुद्रा की नकल आसानी से नहीं की जा सके. इसी प्रकार दस रुपये के सिक्के पर भी कई प्रकार के प्रतिक चिन्हों का इस्तेमाल किया गया है. जिसके आधार पर असली नकली सिक्कों की पहचान आसान हो जाती है.  दस रुपये के असली सिक्के में दस अंक में लिखा हुआ है और रुपये का प्रतिक चिन्ह भी बन हुआ है. 10 का अंक सिक्के के मध्य भाग और बाहरी भाग के घेरे पर संयुक्त रूप से उभरा हुआ है जबकि दस रुपये के नकली सिक्के में सिर्फ दस अंक में लिखा गया है जो सिक्के के बीच में बना हुआ है. इसके अलावा दस रुपये के असली सिक्के में दस छोटी छोटी पट्टियां बनी हुई हैं, जबकि नकली सिक्कों में इस पट्टियों की संख्या दस से अधिक है.

असली सिक्के की दुसरी ओर भारत और इंडिया अलग अलग लिखा गया है जबकि नकली दस के सिक्के में भारत और इंडिया एक साथ लिखा गया है. असली दस के सिक्के पर अशोक स्तंभ का राष्ट्रीय चिन्ह और सत्य मेव जयते स्पष्ट व बडे आकार में सिक्के के मध्य भाग में स्थित है. वहीं नकली सिक्के में अशोक स्तंभ छोटा छपा है. इन चिन्हों पर यदि गौर करें तो असली और नकली दस के सिक्के की पहचान आसानी से की जा सकती है.

नकली सिक्के की पहचान: सिक्के के उपर में 10 से ज्यादा की संख्या में फूल के निशान

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