#नोटबंदी : हर दिन बढ़ रही लोगों की परेशानी, बगहा का सूरतेहाल खराब

बगहा : आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जैसे ही पांच सौ और हजार के नोट बंद करने की घोषणा की… तो देश के साथ-साथ बिहार का बगहा भी इसके प्रभाव से अछूता नहीं रहा. मोदी के फैसले को विपक्ष ने बिना तैयारी और जल्दबाजी में लिया फैसला बताकर इसकी कमियां उजागर की, तो कईयों ने इसके दूरगामी परिणाम अच्छे आने की उम्मीद बताई.

अब जब पचास दिन बीत गये हैं, तो इन दिनों में जो परिणाम जो सामने आए, उनमें प्रमुख है नकदी संकट की वजह से बड़े से लेकर छोटे उद्योग धंधों पर मंदी छा जाना. ज्वैलरी, ऑटोमोबाइल, गारमेंट व्यापार की भी कमर टूट गई. वहीं पहले से मंद पड़ा रियल स्टेट बाजार और मंदा हो गया. इसके विपरीत इसका एक अच्छा असर यह दिखा कि आम जनता धीरे-धीरे कैशलेस की तरफ तेजी से कदम बढ़ाने लगी है. एक सर्वे के अनुसार बगहा में नोटबंदी का व्यापार जगत पर बुरा प्रभाव पड़ा है. पिछले पचास दिनों में व्यापार और कारोबार में 55 से 60 फीसदी तक गिरावट दर्ज होने की सूचनाएं हैं. पहले से ही मंदी की मार झेल रहे रियल एस्टेट कारोबार की नोटबंदी ने कमर ही तोड़ दी. बाजार में जमीनों के भाव एकाएक 50 से 60 फीसदी नीचे आ गए. इसके अलावा बिल्डिंग निर्माण, सीमेंट कारोबार 50 फीसदी कम हो गया. नोटबंदी के बाद ज्वैलरी की खरीद-फरोख्त 80 फीसदी बिक्री घट गई है. लोगों ने ज्वैलरी से दूरी बना लिया है. छोटा व्यापार नोटबंदी से काफी प्रभावित हुए. छोटे व्यापारियों की बिक्री 80 फीसदी घट गई.

हालांकि डिजीटल लेन-देन बढऩे से अब व्यवस्था पटरी पर अब धीरे-धीरे शुरू हो रही है, लेकिन जानकारों का कहना है कि इसमें समय लगेगा. जरूरत के सामान की खरीददारी दूसरी ओर आम जरूरत और रोजमर्रा की वस्तुओं के कारोबार पर हालांकि मंदी की मार कम है, लेकिन फिर भी ग्राहक केवल अपनी जरूरत की ही सामग्री खरीद रहे हैं. इसका कारण हाथ में धन की तंगी होना है. विमुद्रीकरण के बाद न केवल आम आदमी को उसकी बैंकों में जमा राशि निकालने में दिक्कत आ रही है, बल्कि सरकार की ओर से नोट निकालने की जो सीमा बैंक शाखाओं और एटीएम पर तय की गई है, वह भी पूरी नहीं हो रही. बहरहाल नोटबंदी से बगहा कार्यक्रम सुरतेहाल खराब हो गया है.

bagha1

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*