जेल के ताने से पम्पी आत्महत्या करने पर हुई मजबूर

बगहा(अनुमण्डल):पति के हत्या के पश्चाताप ने कहिं का नही छोड़ा और खुद को फांसी लगा मौत को गले लगाना पड़ा.होगा क्यों नही ,क्यों कि जेल के भीतर सिर्फ क़ानूनी दण्ड मिल सकती थी,समाज के सामने क्या?जी हा भसुर के साथ प्रेम की पेंग बढ़ाने वाली हत्यारिन पत्नी ने पिछले दिनों अपने ही पति की हत्या भसुर के साथ मिल सर काटकर कर देने वाली पत्नी पम्मी ने जेल के भीतर ही आत्महत्या कर ली है.

पहले तो पम्मी ने पति को मारकर अपने ही बच्चों को बेसहारा कर खुद पति बिहिन हो गई और आज खुद मौत को गले लगा अपने पश्चाताप कि पश्चात्प् कर ली.अगर यू कहा जाय कि पम्मी ने अपने पति कि हत्या करते यह नही सोचा होगा कि आखिरकार पश्चाताप कि आग उसे कहि का नही छोड़ेगा.कानून के द्वारा तो जो भी सजा मिलती उसमे जेल कि चहारदीवारी के भीतर ही सजा भुगतनी पड़ती,परन्तु जेल के अन्दर भी अन्य कैदियों के द्वारा मिलने वाली ताने और मानशिक प्रताड़ना को कैसे सह पाती. अभी तो सजा मुकर्रर भी नही हुई.लेकिन जेल के भीतर पम्मी कि आत्मा ने जब उसे धिक्कारा होगा तो इस सजा को पम्मी बर्दाश्त नही कर पाई होगी और सजा के रूप में उसने मौत को गले लगा पश्चाताप को गले लगाया.आखिर यह पश्चाताप भी तो उसे धिक्कारता होगा कि ओ कैसी माँ है कि जिसने अपने ही बच्चों के सर का साया छीन लिया और पति कि हत्यारिन बन गई. इतना ही नही उसने अपने सारे रिश्तों को भी खत्म कर लिया था.बस एक ही ठप्पा मिला कि वह माँ,पत्नी,बहू, बेटी,भावज सहित कई रिश्तों को एक साथ शर्मसार किया और किसी की नही हो सकी.

 

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