कृष्ण जन्माष्टमी आज, ऐसे करें व्रत, मिलेगी सफलता

बेगूसराय- कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी जोरो पर है। अष्टमी एवं रोहिणी नक्षत्र दोनों का योग अर्धरात्रि के समय मिल रहा है अतः आज ही जयंती योग में श्री कृष्णावतार एवं जन्माष्टमी का व्रत सबके लिए हो जाएगा। उदया तिथि अष्टमी एवं उदय कालिक रोहिणी नक्षत्र  को मानने वाले वैष्णव जन 3 सितंबर सोमवार को श्री कृष्ण व्रत पर्व मनाएंगे।

आज शाम 5.09 तक सप्तमी, तत्पश्चात् अष्टमी तिथि रहेगी तथा कृत्तिका नक्षत्र शाम 6.29 तक उपपरान्त रोहिणी नक्षत्र रहेगा। अष्टमी और रोहिणी के योग में मध्यरात्रि में भगवान का अवतरण हुआ था। अगले दिन मध्यरात्रि में न तो अष्टमी रहेगी और न रोहिणी गृहस्थों (स्मार्तों) के लिए व्रतोत्सव मनाना सर्वथा उचित होगा। उदयकालीन अष्टमी एवं रोहिणी माननेवाले साधु-समाज के लोग सोमवार (3सितम्बर) को भी मनाएँगे।

 

गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान् श्रीकृष्ण जन्म से सम्बन्धित अष्टमी तिथियों के सम्बन्ध में स्मार्तो एवं वैष्णव सम्प्रदाय के अनुयायियों में मतान्तर होगा। परम्परा इस व्रत के विषय में दो मत हैं। स्मार्त लोग (सामान्य गृहस्थी) अर्द्भुरात्रि-व्यापिनी एवं सप्तमीयुता अष्टमी में व्रत-उपवास एवं उत्सव करते हैं। क्योंकि इनके अनुसार भगवान् श्रीकृष्ण का अवतरण अर्धरात्रि के समय (रोहिणी नक्षत्र एवं वृष राशिस्थ चन्द्रमा कालीन) भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि में हुआ था। जबकि बैष्णव (संन्यासी) सम्प्रदाय के अनुयायी अर्धरात्रि-व्यापिनी अष्टमी की उपेक्षा करके नवमी विद्व अष्टमी में व्रत, उत्सवादि करने से विश्वास रखते हैं (चाहे उस दिन अर्धरात्रि के समय अष्टमी हो या न हो)।

`स्मार्तानां गृहिणी पूर्वा पोष्या, निष्काम वनस्थेविधवाभी: बैष्णवैश्च परै वा पोष्या ।।

बैष्णवास्तु अर्धरात्रिव्यापिनीमपि, रोहिणी युतामपि सप्तमी विद्वां अष्टमी परित्यज्य नवमी युतैव ग्राह्मा ।। (धर्मसिन्धु:)

परंतु अधिकांश शास्त्रकारों ने अर्द्वरात्रिव्यापिनी अष्टमी में ही व्रत, पूजन एवं उत्सव मनाने की पुष्टि की है ।श्रीमद् भागवत्, श्रीविष्णु पुराण, वायु पुराण, अग्नि-पुराण, भविष्यादि पुराण भी तो अर्द्वरात्रि व्यापिनी अष्टमी में ही श्री कृष्ण भगवान् के जन्म की पुष्टि करते हैं’

गतेऽर्धरात्रसमये सुप्ते सर्वजने निशि।। भाद्रेमास्य-सिरे पक्षेऽष्टम्यां ब्रह्मर्क्षसंयुजि सर्वग्रहशुभे काले-प्रसन्नहृदयाशये आविरासं निजेनैव रुपेण हि अवनीपते ।। (विष्णु पुराण)

धर्मसिन्धुकार का भी यही अभिमत है –

कृष्ण जन्माष्टमी निशीथ व्यापिनी ग्राह्मा। पूर्वदिन एवं निशीध योगे पूर्वा।।

इस प्रकार सिद्धांन्तरुप में तत्काल-व्यापिनी (अर्द्वरात्रि के समय रहने वाली ) तिथि अधिक शास्त्रसम्मत एवं मान्य रहेगी..  केवल अष्टमी तिथि को ही जन्माष्टमी का निर्णायक तत्व मानते हैं । रोहिणी-युक्त होने से तो श्रीकृष्ण- जन्माष्टमी जयंती संज्ञक कहलाती है।

🌷 कृष्णाष्टम्यां भवेद्यत्र कलैका रोहिणी यदि।

जयंती नाम सा प्रोक्ता उपोष्या सा प्रयत्नत:। (अग्नि पुराण)

ध्यान रहे – भगवान् श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा-वृंदावन में तो वर्षा की परम्परानुसार भगवान् श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी व्रत एवं जन्मोत्सव के लिए सूर्योदयकालिक एवं नवमी विद्वा  (युक्त) अष्टमी अपनाते हैं, जबकि उत्तर भारत में लगभग सभी प्रांतों में सैकड़ों वर्षों से अर्द्वरात्रि एवं चन्द्रोदयव्यापिनी जन्माष्टमी ही व्रत, उत्सवादि हेतु ग्रहण करने की परम्परा है ।

विशेष – हिन्दू पंचांग के अुनसार भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि को कृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इसी तिथि पर और इसी नक्षत्र में कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है।

राशिनुसार जन्माष्टमी के उपाय-

भगवान श्री कृष्ण द्वारका के राजा थे उन्होंने द्वारका नगरी बसाई थी इसलिए उन्हें द्वारकाधीश भी कहते हैं शास्त्रों के अनुसार द्वारकाधीश की कृपा होने पर मनुष्य के भाग्य बदल जाते हैं या यू कहें तो उनका जीवन सुखमय होने लगता है उनके जीवन की सभी समस्याएं सभी संकट कष्ट विपत्तियां परेशानियां प्रत्यक्ष-परोक्ष परेशानियां दूर होने लगते हैं। भगवान श्री कृष्ण की कृपा प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी को उत्कृष्ट दिन माना गया है जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था अतः उनकी पूजा पाठ अभ्यर्थना करनी चाहिए मनुष्य अपनी राशि के अनुसार भगवान पूजन करें तो उन्हें श्रेष्ठ फलों की प्राप्ति होती है।

मेष-

मेष राशि वालों को राधा कृष्ण जी का गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए कृष्ण कन्हैया को दूध से बनी हुई मिठाई नारियल के लड्डू एवं माखन मिश्री का भोग लगाना चाहिए और तुलसी की माला से ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का यथासंभव जाप करना चाहिए। इस मंत्र के जाप के बाद यथासंभव में अगर प्रसाद में अनार अर्पित किया जाए तो इससे उन्हें अपने कार्यों में सर्वोत्तम सफलता मिलेगी।

वृष-

वृषभ राशि वाले को भगवान श्री कृष्ण का पंचामृत से अभिषेक करके उन्हें दूध से निर्मित मिठाई रसगुल्ले आदि का भोग लगाना चाहिए और कमलगट्टे की माला से श्री राधा कृष्ण शरणम मम् मंत्र की 11 माला का जाप करना चाहिए। भगवान को मखाने का भोग लगाना चाहिए। इससे वृषभ राशि वाले जातकों की जीवन में मनवांछित फल की प्राप्ति होगी।

मिथुन-

मिथुन राशि वाले भगवान श्री कृष्ण का दुग्ध से अभिषेक करके उन्हें पंचमेवा काजू से निर्मित मिठाई और केले का भोग लगाना चाहिए। खासकर “श्री राधायै  स्वाहा” मंत्र की 11 माला कब तुलसी या स्फटिक की माला पर जप करें फलों में पीले केले को अर्पित करें इससे आपके जीवन में मान सम्मान और यश की वृद्धि होगी।

कर्क-

कर्क राशि के जातकों को भगवान राधे कृष्ण का जिसे अभिषेक करके उन्हें केसर और खोए की बर्फी या काजू की बर्फी भोग में लगाना चाहिए और श्री राधा वल्लभाय नमः मंत्र के पांच माला का जाप करें और फलों में पानी वाला नारियल चढ़ाएं इससे घर परिवार में सुख समृद्धि की वृद्धि होगी और सुख की प्राप्ति होगी।

सिंह-

सिंह राशि वाले को भगवान श्री कृष्ण का गंगा जल में शहद मिलाकर अभिषेक करके उन्हें लाल पीले और गुड़ का भोग लगाना चाहिए एवं ॐ विष्णवे नमः मंत्र का जाप करें और बादाम मिश्री और फलों में शिव अर्पित करें इससे सभी क्षेत्र में अपार सफलता प्राप्त हुए और विरोध भी कुछ नहीं कर पाएंगे।

कन्या-

कन्या राशि वाले को भगवान श्रीकृष्ण का दूध में घी मिलाकर अभिषेक करके उन्हें मेवा अथवा दूध से बनी हुई मिठाई का भोग लगाना चाहिए और ह्रीं श्रीं राधा ही स्वाहा मंत्र के 11 माला का जप करें और भगवान कृष्ण को लौंग इलायची तुलसी का पत्ता,हरा पान और कोई हरा फल भोग में लगाएं। इससे आपके जीवन में सुख समृद्धि में वृद्धि होगी।

तुला-

तुला राशि वाले को भगवान कृष्ण को दूध में शक्कर मिलाकर अभिषेक करना चाहिए और प्रसाद से संबंधित दूध से निर्मित प्रसाद चढ़ाना चाहिए और श्री कृष्णाय नमः मंत्र की माला का जाप करें और महाप्रसाद में बादाम माखन मिश्री और केला भोग में लगाएं इससे जीवन में तमाम परेशानियां धीरे-धीरे स्वत:समाप्त समाप्त हो जाएंगी।

वृश्चिक-

सिंह राशि वालों को भगवान श्री कृष्ण का पंचामृत से अभिषेक करके गुड़ से बने हुए मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए और श्री राधा कृष्णाय नमः मंत्र के कम से कम 5 माला का जाप करें और पंचमेवा फलों में पानी वाला नारियल भोग में लगाएं। इससे आपके सभी काम आसानी से बनने शुरू हो जाएंगे।

धनु-

धनु राशि वाले को भगवान श्री कृष्ण को शहद और दूध से अभिषेक करके बेसन की मिठाई का भोग लगाना चाहिए और ओम नमो नारायणाय नमः मंत्र की पांच माला का जाप करें। पीला वस्त्र पीला फल चढ़ावे  अमरूद चढ़ाएं।

मकर-

मकर राशि वाले को भगवान श्रीकृष्ण को गंगाजल से अभिषेक करके उनके ऊपर हरे कृष्णा भोग लगाएं और देवकीसुत गोविंदाय नमः इस मंत्र का जाप करें और अंगूर मीठा पान और केसर वाली मिठाई भोग लगावें। व्यापार में लाभ की प्राप्ति होगी।

कुम्भ-

कुंभ राशि वाले को भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक करके उन्हें लाल कलर की दूध से निर्मित मिठाई का भोग लगाना चाहिए और ओम नमो भगवते वासुदेवाय 11 बार जाप करना चाहिए और मेवे बादाम काजू किशमिश पिस्ता अखरोट यह सब प्रसाद में चढ़ाना चाहिए। जीवन के सभी क्षेत्रों में मनवांछित फल की प्राप्ति होगी।

मीन-

मीन राशि वाले को भगवान श्री कृष्ण का पंचामृत से अभिषेक करके उन्हें मेवा की मिठाई प्रसाद में चुनाव और ओम देवकीसूत गोविन्दाय नमः  मंत्र का जप करें और भगवान को इलायची नारियल और फल अर्पित करें।

जन्माष्टमी पर कुछ उपाय

जल्दी धनवान बनने के लिए

(1) जन्माष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण को सफेद मिठाई या खीर में तुलसी के पत्ते डाल कर भोग लगाएं। इससे आपकी समस्त आर्थिक समस्याएं जल्दी ही दूर होंगी।

(2) जन्माष्टमी के दिन दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान श्रीकृष्ण का जलाभिषेक करें। इससे भी अटूट धन की प्राप्ति होती है।

 

सुख शांति हेतु

(3) भगवान श्रीकृष्ण अथवा विष्णु के मंदिर में जाकर तुलसी की माला से निम्न मंत्र का 11 माला जाप करें। जप के बाद भगवान को पीले वस्त्र तथा तुलसी के पत्ते अर्पित करें। मंत्र इस प्रकार हैं

क्लीं कृष्णाय वासुदेवाय हरि: परमात्मने प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:

कर्जा चुकाने हेतु

(4) जन्माष्टमी के दिन श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी पीपल के वृक्ष में चढ़ाएं। इस उपाय को जन्माष्टमी से आरंभ कर लगातार छह शनिवार तक करें। इस उपाय से बड़े से बड़ा कर्जा भी चुक जाएगा।

लंबे समय से अटके कार्य पूरे करने के लिए

(5) जन्माष्टमी के दिन से आरंभ कर लगातार सत्ताईस दिन तक नारियल, बादाम मंदिर में चढ़ाएं। असंभव काम भी अवश्य पूरा होगा।

तिजोरी में अखंड लक्ष्मी का आव्हान करने हेतु

(6) जन्माष्टमी की रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें तो जीवन में कभी धन की कमी नहीं आती।

(7) जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की पूजा के समय उनके चरणों में कुछ रुपए रखें। पूजा के बाद इन रुपयों को अपने पर्स में रख लें। कभी जेब खाली नहीं रहेगी।

पूजा और व्रत करने वाले भक्त दिन में अन्न ग्रहण नहीं करें। और कृष्ण जन्म के बाद ही अपना व्रत तोड़ें। इस दिन उपवास करने वाले भक्तों को कृष्ण जन्म के बाद स्नान करके ही उपवास खोलना चाहिए। जिसमें भगवान् को भोग लगी पंजीरी का पहले प्रसाद ले।