काला दूल्हा से गोरी दुल्हन ने शादी रचाने से किया इंकार, बैरंग लौटी बारात

बखरी / बेगूसराय : गया वह जमाना जब काली दुल्हन को देखकर दूल्हा शादी करने से इंकार कर देते थे. लेकिन बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने से एक बात तो साबित हो गई है कि बेटियां अब खूंटे से बंधने वाली गाय नहीं रहीं. मां—बाप ने जिस खूंटे से बांध दिया वहीं रम गए. बीते रविवार को थाना क्षेत्र के सलौना गांव से बारात रोसड़ा गई थी. लेकिन दूल्हा शादी रचाने में कामयाब नहीं हो पाया. सलौना निवासी पन्नालाल दास के पुत्र इंदल दास की शादी रोसड़ा थाना के सिंहमा गांव के हनुमाननगर के चुनचुन दास की पुत्री आरती कुमारी से तय हुई थी. तिलक सहित सभी औपचारिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद 23 अप्रैल को शादी का दिन तय हुआ. दूल्हे को लेकर बारात वधू के घर पहुंची. बाराती का खूब स्वागत हुआ. हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार वरमाला सहित सभी विधि—विधान को पूरा किया गया.

सूत्र बताते हैं कि वरमाला के समय ही शराती और बाराती पक्ष में किसी बात को लेकर हल्की नोंक-झोंक हुई. फिर सब कुछ सामान्य हो गया. किंतु मड़बा पर वर के पहुंचते ही सब कुछ बदल गया. लड़के के रंग को काला देख लड़की ने शादी से साफ इंकार कर दिया. इसमें दुल्हन की मां ने भी बेटी का साथ दिया और सिंदूर नहीं मिलने की बात कहते हुए शादी नहीं करने पर अड़ गई. लगभग डेढ़ से दो घंटा तक दुल्हा मड़बा पर बैठा दुल्हन का इंतजार करता रहा पर सिंदूर लेकर लड़की की मां नहीं आई.

अंत में लड़का के वहां से उठते ही लड़की पक्ष के लोगों ने दूल्हा सहित उसके पिता, भाई, बहनोई और कुछ बारातियों को बंधक बना तिलक में दिए गए नगदी और सामानों की वापसी की मांग करने लगे. इस खबर के सलौना पहुंचने के बाद लोग हतप्रभ रह गए. दूसरी सुबह गांव के पूर्व मुखिया तुफैल खान, सरपंच पति सुभाष ठाकुर के साथ गांव के प्रबुद्ध लोग सिंहमा पहुंचे और तिलक में लिए गए नगदी व सामानों को वापस किया. तब लड़की पक्ष ने बंधकों को मुक्त किया. ऐसे इस घटना को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, हालांकि लड़का पक्ष वाले घटना के पीछे कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं.