जिलास्तरीय छात्रावास है अतिक्रमण का शिकार, बच्चों के विकास के लिए हॉस्टल जरूरी

जर्जर छात्रावास में नहीं रहना चाहते हैं कोई

बेगूसराय : अनुमंडल क्षेत्र के राजकीयकृत हाईस्कूलों में छात्रावास की सुविधा नहीं है. जो पहले से छात्रावास बना था वह आज अतिक्रमण का शिकार है या फिर असमाजिक तत्वों का अड्डा बनकर रह गया है. इस ओर न तो शिक्षा विभाग का न ही जनप्रतिनिधियों का ध्यान है. इससे शिक्षा प्रेमी अभिभावकों में शिक्षा विभाग व जनप्रति के प्रति आक्रोश है. छात्रावास सुविधा नहीं रहने से वर्तमान में इसका नुकसान गरीब व निसहाय मेधावी बच्चों को उठाना पड़ रहा है.

जबकि पहले शहर में बीपी स्कूल के बाद आरकेसी फुलबड़िया व ओमर हाईस्कूल में छात्रावास की बेहतर व्यवस्था थी. ओमर उच्च विद्यालय का मुंगेर प्रमंडल में 10वां स्थान था. यहां के छात्रावास में 80-90 छात्र रहते थे. छात्रावास का भवन ओमर हाईस्कूल के नाम से है. लेकिन वर्तमान में उस पर मध्य विद्यालय तेघड़ा बाजार का कब्जा है.

कभी शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित जिला स्तरीय प्रतिभा परीक्षा में चयनित मेधावी छात्रों को रखने का आवासीय केंद्र हुआ करता था आरकेसी फुलबड़िया का छात्रावास. बाद में विभागीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों की उदासीनता से लेकर रख – रखाव के अभाव में यह धीरे-धीरे ध्वस्त हो गया.

अभिभावकों में नगर पंचायत के पार्षद शिवशंकर पासवान, हरेराम पंडित, मो मेहबूब आलम, सच्चिदानन्द सिंह, पेंशनर समाज के रामबदन महतो, शिक्षाविद देवीकान्त राय ने डीएम से हर हाल में इस दिशा में सकारात्मक पहल शुरू कराने की मांग की है ताकि गरीब मेधावी बच्चों को शिक्षा का एक बेहतर माहौल मिल सके.

छात्रावास के अभाव में जरूरतमंद परिवार के बच्चे इस लाभ से वंचित हैं. राष्ट्रीय उच्च विद्यालय के छात्र गोरख पासवान, सुरेश नंदन कुमार, गणपति बैठा, सुरेश महतो ने बताया कि उन्हें सिर्फ दो घर है. इससे घर में पढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जबकि वह पढ़कर देश का बेहतर नागरिक बनना चाहता है.

बीएन हाईस्कूल तेयाय का छात्रावास के ध्वस्त रहने से उपस्कर गायब है. रिटायर्ड बैंक प्रबंधक रामनाथ महतो, शिक्षाविद प्रो. रामपरीक्षण शर्मा, कवि शिवाश्रय राय, सेवानिवृत एचएम डॉ. काशी नाथ पाठक, डॉ. सच्चिदानन्द पाठक, नवल किशोर सिंह ने बताया कि छात्रावास के रहने से छात्रों में अनुशासन, अध्ययन के प्रति लगाव, पुस्तकालय का उपयोग, खेल कूद के लिए समय व अन्य क्रियाशीलन के प्रति रूचि उत्पन्न होती है. उनमें सामुहिक जीवन जीने की अच्छी आदत होती. जिससे समाज में सद्भाव कायम होती. इसके अभाव से बच्चों का बौद्धिक व आत्मिक विकास कमतर हो रहा है.